
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग🧾शनिवार 25 अप्रैल 2026आप सभी देशवासियों को सीता नवमी के पावन अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं एवं अनंत अनंत बधाइयां।।👸🏻 सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त📃 वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत- 24 अप्रैल को शाम 07 बजकर 21 मिनट पर☀️ वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का समापन- 25 अप्रैल को शाम को 06 बजकर 27 मिनट पर☄️ सीता नवमी मध्याह्न मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 01 मिनट से 01 बजकर 38 मिनट परशनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी*🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – बैशाख मास🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष📅 तिथि – शनिवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 06:28 PM तक उपरांत दशमी✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 08:04 PM तक उपरांत मघा🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। इस नक्षत्र के देवता सर्प (नाग) हैं, जो इसे अत्यंत रहस्यमयी और आध्यात्मिक बनाते हैं।⚜️ योग – गण्ड योग 11:43 PM तक, उसके बाद वृद्धि योग⚡ प्रथम करण : बालव 06:51 AM तक✨ द्वितीय करण : कौलव 06:28 PM तक, बाद तैतिल🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:38:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:30:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:19 ए एम से 05:02 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:41 ए एम से 05:46 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:53 ए एम से 12:46 पी एम✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:23 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:51 पी एम से 07:13 पी एम🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:53 पी एम से 07:58 पी एम💧 अमृत काल : शाम 06:29 पी एम से 08:04 पी एम🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:57 पी एम से 12:41 ए एम, अप्रैल 26❄️ रवि योग : पूरे दिन🔥 ज्वालामुखी योग : शाम 06:27 पी एम से 08:04 पी एम🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – सीता नवमी/ गण्ड मूल/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ ज्वालामुखी योग/ क्रांति दिवस (पुर्तगाल), स्वामी रंगनाथानंद रामकृष्ण मिशन स्मृति दिवस, साहित्यकार पंढरीनाथ रेगे स्मृति दिवस, भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक राजन मिश्रा स्मृति दिवस, साहित्यकार चन्द्रबली पाण्डेय जन्म दिवस, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक उस्ताद बड़े गुलाम अली खां स्मृति दिवस, भारत के प्रसिद्ध फुटबॉलर आई. एम. विजयन जन्म दिवस, राष्ट्रीय टेलीफोन दिवस, राष्ट्रीय ज़ुकिनी ब्रेड दिवस, माता-पिता से अलगाव जागरूकता दिवस, पालतू पशु तकनीशियन सीपीआर दिवस, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा जन्म दिवस, विश्व पेंगुइन दिवस, राष्ट्रीय डीएनए दिवस (National DNA Day), विश्व मलेरिया दिवस (World Malaria Day) ✍🏼 *तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।📡 Vastu tips 🖥️आपकी जन्म कुंडली। मुहूर्त चिंतामणि में उल्लेख है कि गृह प्रवेश फलं जातक लग्नाधीनम्। इसका अर्थ है कि घर का फल पूरी तरह से रहने वाले व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। यहीं पर केपी ज्योतिष (KP System) का महत्व बढ़ जाता है। यदि आपकी कुंडली का चौथा भाव (सुख स्थान) और उसका उप-स्वामी (Sub-lord) मंगल या सूर्य जैसे अग्नि तत्व के ग्रहों से जुड़ा है, तो दक्षिणमुखी मकान आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।*खासकर मेष, वृश्चिक और सिंह लग्न वाले जातकों के लिए, जिनका लग्नेश मंगल या सूर्य है, दक्षिणमुखी मकान अक्सर बहुत फलदायी रहता है। वहीं, यदि कुंडली में मंगल अष्टम या द्वादश भाव में पीड़ित है, तो दक्षिण की ऊर्जा उस व्यक्ति के लिए भारी पड़ सकती है। सरल शब्दों में कहें तो दिशा वही है, लेकिन कुंडली बदलने से उसका परिणाम बदल जाता है। 🔰 *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ सबसे अच्छा नाश्ता क्या है?भोगेर खिचुरीदुर्गा पूजा में माँ दुर्गा के प्रसाद के रूप में बनाई जाने वाली खिचड़ी। यही मेरे सप्तमी, अष्टमी और नवमी का नाश्ता/खाना होता है। वैसे भी प्याज लहसुन नहीं खा रहा होता तो नाश्ते या खाने में मुझे यह बेहतर विकल्प लगता है। कम से कम पूजा के दौरान मेरे लिए यह सबसे अच्छा नाश्ता है।*दुर्गा पूजा के लिए झारखंड भी पहले बंगाल का हिस्सा था इसलिए यहाँ के पूजा में बंगाल का प्रभाव भरपूर है। जितने भी मोहल्लों के पंडाल बनते हैं उन सभी में पुजारी बंगाल से आते हैं। सभी ढाक बजाने वाले भी बंगाल के होते हैं और भोग बनाने वाले भी। भोग बनाने का तरीका बंगाल जैसा होता है इसलिए स्वाद भी वैसा ही होता है। महीन चावल में पतली पानी की तरह बहने वाली खिचड़ी बनती है जिसमें बड़े बड़े आलू के टुकड़े और कुछ हरी सब्जियां होती हैं। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक से बनता है। साल के पत्तों के बने दोनों मे भोग बंटता है जिसे खाना नहीं पीना पड़ता है। इतनी पतली होती है कि हाथ से नहीं उठेगी। घर ला कर चम्मच से खाएं या पंडाल मे दोने को मुँह में लगा कर पी लें। भोग में खीर और सब्जी भी बनती है। किसी किसी पंडाल में भोग में बज़का बनते भी देखा है। *घर में कई बार भोगेर खिचुरी बनाने का प्रयास किया गया है लेकिन पूजा पंडालों में बड़े पैमाने पर बनने वाले भोग वाला स्वाद नहीं आ पाता।👉🏼 *एडिट:- आज नवमी को घर घर जा कर भोग बाँट रहे हैं। आश्चर्य की बात है कि बहुत कम लोग लेने के लिए घर से निकल रहे हैं। बचपन में जब घूम घूम कर भोग बांटते थे तो भीड़ लग जाती थी। 🍋🟩 *आरोग्य संजीवनी* 🫒 फिटकरी को शुद्ध करने का तरीका सबसे पहले फिटकरी का एक टुकड़ा लें और उसे तवे पर गरम करें। गरम होने पर यह पिघलने लगेगी और बुलबुले उठेंगे। जब इसका पूरा पानी सूख जाए और यह सफेद, भुरभुरी (Popcorn जैसी) हो जाए, तो इसे आंच से उतार लें। ठंडा होने पर इसे पीसकर पाउडर बना लें। इसे ही ‘भुनी हुई फिटकरी’ या ‘स्फटिका भस्म’ कहते हैं। *प्रयोग के तरीके बलगम वाली खांसी के लिए: लगभग 1 से 2 चुटकी (लगभग 125-250 मिलीग्राम) भुनी हुई फिटकरी को एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार चाटने से जमा हुआ बलगम आसानी से निकल जाता है।*दमा या अस्थमा में राहत के लिए: भुनी हुई फिटकरी को बराबर मात्रा में मिश्री के पाउडर के साथ मिला लें। इसकी एक चुटकी सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लेने से सांस फूलने की समस्या में आराम मिलता है। *पुरानी खांसी के लिए आधा गिलास गुनगुने पानी में एक चुटकी भुनी हुई फिटकरी डालकर गरारे (Gargle) करने से गले की सूजन कम होती है और खांसी में राहत मिलती है।*जरूरी सावधानियां सीमित मात्रा फिटकरी का बहुत अधिक सेवन पेट में दर्द या उल्टी का कारण बन सकता है। इसे केवल 1-2 चुटकी ही लें। *अवधि इसे लंबे समय तक (हफ्तों तक) लगातार न लें। 3-5 दिन के प्रयोग के बाद डॉक्टर की सलाह जरूर लें🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌸शुक्र ग्रह का एक दिन उसके एक साल से भी बड़ा होता है” कैसे? सान्ध्य आकाश में पश्चिम में चमकता शुक्र ग्रहसूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में ग्रह को जो समय लगता है उसे उस ग्रह का वर्ष कहते हैं।शुक्र को इस परिक्रमा में 225 दिन लगते हैं इसका परिक्रमा पथ अपेक्षाकृत अधिकतम वृत्ताकार है या कहें कि अण्डाकार न्यूनतम है।*★ग्रह की अपनी धुरी एक्सिस पर एक भ्रमण में जो समय लगता है वह उस ग्रह का दिन कहा जाता है।शुक्र ग्रह यह काम 243 दिन में करता है। इस प्रकार इस कारण से शुक्र का दिन(=अपने अक्ष पर घूमने में लगने वाला समय ) उसके वर्ष (=सूर्य की एक परिक्रमा में लगने वाले समय)से बड़ा होता है। *◆शुक्र के भ्रमण की दो अनोखी बातें और है:*1-पृथ्वी के 117 दिन में एक बार शुक्र पर एक सूर्योदय होता है।कुल दो सूर्योदय शुक्र के एक वर्ष में होते हैं। *_2-शुक्र पर सूर्योदय वहाँ के पश्चिम में और सूर्यास्त वहाँ के पूरब में होता है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शुक्र अपनी धुरी axis पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है। पृथ्वी पश्चिम से पूरब की ओर घूमती है इसलिए सूर्य सहित पूरे तारे पूरब से पश्चिम की ओर जाते दिखते हैं। *◆चलते चलते यह भी जानना भी आपको रोचक लगेगा: खगोल के इतिहास में भारत के खगोलविद आर्यभट ( 476 -550 ईस्वी ) विश्व में खगोलविद प्रथम थे जिन्होंने सिद्ध किया कि पृथ्वी अपनी कीली पर घूमती है।और यह भी की यह पश्चिम से पूरब की ओर धूमती है। पृथ्वी के इस अक्ष भ्रमण को समझाने के लिए उन्होंने अपने आर्यभटीयम ग्रन्थ में उदाहरण दिया है कि जैसे नाव में बैठने पर नाव के चलने पर किनारे लगे वृक्ष नाव की दिशा से विपरीत दिशा में चलते प्रतीत होते हैं वैसे ही पृथ्वी के पश्चिम से पूर्व दिशा में भ्रमण करने के कारण तारे पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर चलते प्रतीत होते हैं।*★प्रश्न: आखिर पृथ्वी या अन्य ग्रह के अपनी कीली पर भ्रमण के क्या कारण हो सकते हैं? *सौर मेघ से >प्रोटो प्लेनेट और प्रोटो प्लेनेट से > ग्रह बनते समय इन बातों का प्रभाव पड़ता है:● ग्रह रूप में आकार लेते समय की आरंभिक स्थितियाँ ●ग्रह की वर्तमान संहति, ◆पर्यावरण एवं भौतिकसंरचना, ●गुरुत्व, ●गति स्थिति के साथ साथ अपनी कीली पर दैनिक भ्रमण की अवधि -ये सब मुख्य काऱण होती हैं ।इसी प्रकार ग्रह के अपने तारे की , (शुक्र के मामले में हमारा सूर्य ही शुक्र सहित सभी ग्रहों का तारा है ) परिक्रमा लगाने में कितना समय लगता है यह इस बात पर निर्भर है कि ग्रह पर तारे के गुरुत्वाकर्षण का कितना प्रभाव पड़ रहा है।दैनिक भ्रमण की अवधि के पीछे ग्रह बनते समय की स्थिति का असर अधिक।*★वार्षिक भ्रमण की अवधि के पीछे ग्रह जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है उस तारे की गुरुत्व शक्ति का असर अधिक। ★ ग्रह जिन आरंभिक स्थितियों से गुजरा वे ठीक ठीक कभी नहीं जानी जा सकती हैं। ★किसी भी ग्रह की आरंभिक स्थितियों का सैद्धान्तिक गणितीय मॉडल बना कर केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है । ▬▬▬▬▬๑ ⁂❋⁂ ๑▬▬▬▬▬ ⚜️ *नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।*_आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।


