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21 जून 2024 : शुभ योग में रखा जाएगा ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत? जानिए पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 21 जून 2024 : शुभ योग में रखा जाएगा ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत? जानिए पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व
HIGHLIGHTS
◼️ साल के सबसे शुभ त्योहार में से एक वट पूर्णिमा का पर्व भी है।
◼️ इस पर्व को लोग बड़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ मनाते हैं।
◼️ वट पूर्णिमा का त्योहार आमतौर पर विवाहित महिलाएं मनाती हैं।
◼️ यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है।
◼️ इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा 21 जून को मनाई जाएगी।
🌎 हिन्दू सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का बहुत अधिक महत्व है. इस दिन पूजा पाठ नदी स्नान के साथ भगवान सत्यनारायण की कथा पड़ने और चन्द्रमा को अर्घ्य देने का विधान है. वैसे तो हर पूर्णिमा खास होती है लेकिन ज्येष्ठ मास की ये पूर्णिमा बहुत अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन ही यमराज ने सावित्री को उसके पति के प्राण लौटाए थे, इस बार साल 2024 में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा 21 जून को है, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त और महत्त्व के बारे में आइये हम आपको बताते हैं…
⚛️ ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 21 जून 2024 को सुबह 06 बजकर 01 मिनट से शुरू हो रहा है, वहीं इस तिथि का समापन 22 जून 2024 को सुबह 06 बजकर 37 मिनट तक होगा, इस पूर्णिमा पर स्नान दान करके पुण्य कमाया जाता है. ज्येष्ठ मास की पूजा मुहूर्त सुबह 07 बजकर 31 से सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक होगा.
🔯 21 जून को वट पूर्णिमा व्रत
शुभ योगः शुभ योग शाम 6.42 बजे तक* चंद्रोदयः शाम 6.48 बजे 💰 _22 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा स्नान दान
शुभ योगः शुक्ल, शाम 04:45 बजे तक
चंद्रोदय : 22 जून 7.48 बजे तक
⏱️ ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का समय: ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का शुभ समय सुबह 04 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होगा और सुबह 04 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगा। एक अन्य मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से 03 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा स्नान-दान का समय सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 01 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
🤷🏼‍♀️ जून की पूर्णिमा क्यों है खास?
आम तौर पर जून में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा आती हैं, जिसे वट पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन व्रती लक्ष्मीनारायण की पूजा के साथ-साथ सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए बरगद के वृक्ष की उपासना करते हैं. वट पूर्णिमा का व्रत सौभाग्य, सुख, धन, पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है.
🤷🏻 यह करें ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर किसी पवित्र नदी में सुबह स्नान करें और जरूरतमंदों को अपनी इच्छा अनुसार, भोजन, कपड़े, अनाज आदि का दान करें।
💮 ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि-
▪️ इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
▪️ नहाने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
▪️ अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
▪️ विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना भी करें।
▪️ भगवान विष्णु को भोग लगाएं।
▪️ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
▪️ इस पावन दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अधिक से अधिक ध्यान करें।
▪️ पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।
▪️ चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा की पूजा अवश्य करें।
▪️ *चंद्रमा को अर्घ्य देने से दोषों से मुक्ति मिलती है। 💁🏻 *पूर्णिमा व्रत का महत्व_*
पूर्णिमा पर लक्ष्मी-नारायण व्रत करने का बहुत महत्व है। भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी सांसारिक दुखों का नाश होता है और सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, व्रत एवं दान-पुण्य करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। इस दौरान चंद्रमा से जुड़ी चीजों का दान करने से कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। आप सफेद वस्त्र, शक्कर, चावल, दही या फिर चांदी का दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव अपनी पूर्ण कला से युक्त होते हैं जिसका प्रभाव सीधे व्यक्ति के मन और शरीर पर पड़ता है। इस दिन चंद्र पूजन से व्यक्ति की मानसिक और आर्थिक स्थिति ठीक होती है क्योंकि ज्योतिष में चंद्रमा को द्रव्य और मन का कारक कहा गया है।

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