धार्मिकमध्य प्रदेश

श्रीराम कथा हमारे समाज को प्रेम और सद्भाव का संदेश देती है: राजेंद्र कृष्ण शास्त्री

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । श्रीराम की कथा हमारे समाज को अनुशासन और प्रेम तथा सदभाव का संदेश देती है। जिन घरों में श्रीराम एवं श्रीकृष्ण सहित हमारे देवी देवताओं एवं महापुरुषों की कथाओं का गुणगान होता है उन परिवारों में हमेशा सुख शांति बरसती है। श्रीराम लक्ष्मण भरत शत्रु जैसे भाई से हमें सभी गुण सीखना चाहिए और जिस तरह भरत ने अपने चरित्र आचरण और सादगी के साथ राज्य चलाया और प्रजा को सब कुछ दिया उससे हमे सीख लेने की जरूरत है।
उक्त उद्गार ग्राम महुआखेड़ा कला में आयोजित श्रीराम चरित्र मानस सम्मेलन के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित राजेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज वृंदावन धाम ने व्यक्त किए।
झांसी उत्तर प्रदेश से पधारे पंडित राजेंद्र पाठक जी ने भरत चरित्र की कथा सुनाते हुए बताया कि भरत ने बड़े भाई भगवान श्रीराम की चरणपादुका को चौदह वर्षों तक उनकी पूजा अर्चना उनका दास बनकर अयोध्या की प्रजा की सेवा की। यदि हमारे समाज के लोग श्रीराम चरित मानस का अनुकरण करते हुए जीवन निर्वाह करने की कला सीख ले तो समाज की सभी प्रकार की समस्याओं का निस्तारण अपने आप हो जाएगा।
महंत धर्मदास फलाहारी ने कहा कि कहा कि जो युवा भगवान राम की तरह अपने जीवन जियेगा वही राम की तरह अपने जीवन में उच्च आदर्श या अनुशासन का पालन करेगा। आज की युवा पीढ़ी के श्रेष्ठ मार्ग दर्शक हैं परमात्मा राम । श्रीराम के जैसा कोई राजा हो ही नहीं सकता, क्योंकि श्री राम को प्रजा अपने प्राणों से और पुत्रवत प्रिय थी। उनके सुख में ही रामजी को सुख मिलता था। उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र और उनके बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कंस के आतंक की कहानी बताई।
श्रीराम जानकी मंदिर में चल रही श्री राम चरित्र मानस कथा में भारी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित हो रहे हैं यह कथा 20 जनवरी तक दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक चल रही है।

Related Articles

Back to top button