ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 01 सितम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि ••• ✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 01 सितम्बर 2023

01 सितम्बर 2023 दिन शुक्रवार को भादपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। आज से भाद्रपद मास आरम्भ हो जाता है, जिसमें दही नहीं खाना चाहिए। आज अशून्य शयन व्रत है, क्योंकि आज चंद्रोदय व्यापिनी द्वितीया है। चंद्रोदय रात्री 07:25 मिनट पर है। उसके उपरांत चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करके व्रत को खोलना चाहिए। आज भीमचंडी विंध्याचली माता का अवतरण जयन्ती है। आज कज्जली (कजरी) का पावन त्यौहार भी है। जिसमें रात्री जागरण एवं झूला झूलना आरम्भ होता है। आप सभी सनातनियों को विंध्याचली जयन्ती एवं कजरी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – भाद्रपद कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 11:50 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 02:56 PM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है।नक्षत्र के देवता हैं, अज एकपाद। एक पैर वाला अजन्मा।
🔊 योग – धृति योग 01:09 PM तक, उसके बाद शूल योग
प्रथम करण : तैतिल – 01:31 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 11:50 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:23:25
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:52:32
🌌 ब्रह्म मुहूर्त : 04:29 ए एम से 05:14 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:51 ए एम से 05:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:46 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:28 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:43 पी एम से 07:06 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:43 पी एम से 07:51 पी एम
💧 अमृत काल : 07:52 ए एम से 09:17 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, सितम्बर 02
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में मखाने की खीर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अशून्य शयन व्रत/ विंध्याचली जयन्ती, भीमचंडी विंध्याचली माता अवतरण जयन्ती, कज्जली (कजरी) का पावन उत्सव, गुटनिरपेक्ष दिवस, राष्ट्रीय पोषाहार दिवस (सप्ताह), गुरु अमरदास स्मृति दिवस, उज्बेकिस्तान स्वतंत्रता दिवस, भारतीय संगीतकार चेमबइ वैद्यनाथ भगवतार जन्म दिवस, 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह, पंचक जारी
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी हैं। यह द्वितीया तिथि “भद्रा” नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
घर की दक्षिण दिशा में न रखें ये 5 चीजें
इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनों को कभी भी घर की दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। इससे घर-परिवार के बीच रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं।
मंदिर को हमेशा उत्तर पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए। भूलकर भी घर के मंदिर को दक्षिण दिशा में ना रखें। इससे पूजा का फल नहीं मिलेगा और साथ ही आपकी मनोकामनाएं भी पूरी नहीं हो पाएंगी।
बेडरूम में दांपत्य जीवन को सही और खुशहाल बनाना है तो बेडरूम को दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। इतना ही नहीं वास्तु के अनुसार बेडरूम का बिस्तर भी दक्षिण दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। इससे पति-पत्नी के बीच रिश्ते खराब होते हैं और अनिद्रा की समस्या हो सकती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दक्षिण दिशा में जूते चप्पल या शू रैक नहीं रखना चाहिए। इससे पितरों का अपमान होता है। साथ ही घर में छोटी-छोटी बातों पर कलह होती है और घर की की सुख-शांति बिगड़ सकती है।
घर में तुलसी का पौधा है तो उसे दक्षिण दिशा में ना रखें। यह पितरों की दिशा होती है और तुलसी का पौधा यहां पर लगाने से आपको फायदे की बजाय नुकसान होने की संभावना ज्यादा रहेगी।
जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
इंसुलिन की पत्तियांज-भारत में हर डायबिटीज के मरीज के घर में आपको इंसुलिन का पौधा मिल जाएगा। दरअसल, इंसुलिन की पत्तियों का अर्क लगभग वैसे ही काम करता है जैसे शरीर शुगर पचाने के दौरान काम करता है। ये असल में फ्लेवोनोइड्स और एल्केलाइड्स से भरपूर है जो कि शुगर लेवल को कंट्रोल रखने और इसे धीमे-धीमे पचाने में मदद करते हैं। तो, इंसुलिन की पत्तियों को चाय में शामिल करें या फिर इसका अर्क पानी में मिलाकर पिएं।
सहजन की पत्तियां-सहजन की पत्तियों को मेडिकल टर्म में मोरिंग कहते हैं। ये मोरिंगा असल डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है। इसे चाय में मिलाकर पीने से आप डायबिटीज के कई लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं। ये इंसुलिन प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है और फिर शरीर में शुगर स्पाइक को कंट्रोल करने में मदद करता है।
जिनसेंग की पत्तियां-जिनसेंग एक औषधीय पौधा है जो किसी व्यक्ति को टाइप 2 डायबिटीज का प्रबंधन करने में मदद कर सकता है। पौधे में जिनसैनोसाइड्स नामक सक्रिय घटक होते हैं जो ब्लड शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करने के लिए इंसुलिन और ग्लूकागन को स्थिर कर सकते हैं। तो, जिनसेंग की पत्तियां लें और इसे पानी में उबालकर इस पानी को पिएं। तो, डायबिटीज में आप इन तमाम पत्तियों का सेवन कर सकते हैं।
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
खूनी बवासीर या पाइल्स ब्लीडिंग को आम की गुठली से रोका जा सकता है। वही आम की गुठली जिसे आप कचरे में फेंक देते हैं, उससे 6 बीमारियां जड़ से खत्म की जा सकती है। वैद्य मिहिर खत्री ने आम की गुठली का चूर्ण बनाने की विधि और इसके औषधीय फायदों के बारे में बताया।
आम की गुठली से बनाएं पाइल्स की दवा
सफेद पानी यानी ल्यूकोरिया
पीरियड में ज्यादा खून निकलना खूनी बवासीर
डायरिया आईबीएस पेट के कीड़े
आम की गुठली को ढककर धूप में 2 दिन सुखाएं।
फिर इसके ऊपर वाला कठोर छिलका उतार लें।
इसके बाद दोबारा से इसे 5 दिन धूप में सुखाएं।
इस दौरान बिल्कुल भी पानी न लगने दें और इन्हें पूरी तरह सुखने दें।
इन सूखे बीजों को टुकड़े में काटकर ग्राइंडर में बारीक पाउडर बना लें।
इसमें नमक ना डालें या रोस्ट ना करें।
गर्भाशय शोथ, अत्यधिक ब्लीडिंग और सफेद पानी में इसे दिन में दो बार 5 ग्राम पाउडर पानी के साथ सुबह खाली पेट और डिनर से पहले शाम को लें।
डायरिया, आईबीएस और खूनी बवासीर में 5 ग्राम पाउडर छाछ के साथ दिन में दो बार लें।
पेट के कीड़े मारने के लिए 3 से 14 साल के बच्चे को 2.5 ग्राम पाउडर पानी के साथ दिन में दो बार कम से कम 2 हफ्तों तक दें। त्वचा कट जाने, अल्सर या खून निकलने पर यह आम की गुठली का चूर्ण घाव पर लगा सकते हैं।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
रावण का अंतिम संस्कार किस स्थान पर हुआ था?
रावणवध के पश्चात् उसकी पटरानी मंदोदरी ज़ोर ज़ोर से विलाप करने लगी। उसके बगल में विभीषण भी खड़े थे।
उसका विलाप सुनकर श्री राम ने विभीषण को मंदोदरी और रावण की अन्य स्त्रियों का धैर्य बांधने और रावण का दाह संस्कार करने को कहा।
उनकी यह बात सुनकर विभीषण ने विनम्रतापूर्वक उनसे कहा कि यद्यपि रावण उनका ज्येष्ठ भाई था, परन्तु उसके कर्म अत्यंत क्रूर थे इसलिए वह उसका दाहसंस्कार नहीं करेंगे।
विभीषण की यह बात सुनकर श्री राम ने उनसे यह अत्यंत सुंदर बात कही –
👉🏽 उद्धरण –
‘यह निशाचर भले ही अधर्मी और असत्यवादी रहा हो; परंतु संग्राममें सदा ही तेजस्वी, बलवान् तथा शूरवीर रहा है॥ ९८ १/२ ॥
सुना जाता है—इन्द्र आदि देवता भी इसे परास्त नहीं कर सके थे। समस्त लोकोंको रुलानेवाला रावण बल-पराक्रमसे सम्पन्न तथा महामनस्वी था॥ ९९ १/२ ॥
‘वैर मरने तक ही रहता है। मरनेके बाद उसका अन्त हो जाता है। अब हमारा प्रयोजन भी सिद्ध हो चुका है, अत: इस समय जैसे यह तुम्हारा भार्इ है, वैसे ही मेरा भी है; इसलिये इसका दाह संस्कार करो॥ १०० १/२ ॥
स्रोत – युद्धकाण्ड, १११ वां सर्ग, वाल्मीकी रामायण
श्री राम का आज्ञा पाते ही विभीषण ने लंका में लकड़ी, पुरोहित और अग्नि का प्रबंध किया और माल्यवान के साथ अपने भाई का दाह संस्कार किया।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
शास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।

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