धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 18 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 18 दिसम्बर 2024
18 दिसम्बर 2024 दिन बुधवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया उपरान्त चतुर्थी तिथि है। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का पावन व्रत है। इसे समान्य भाषा में गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। आज की संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत को सनातनी स्त्रियाँ अपने पुत्रों के दीर्घायु हेतु दिन भर अखण्ड उपवास रखकर, सायंकाल में भगवान श्रीगणेश जी की पुजा करने के बाद चन्द्रमा देवता के निकलने (चंद्रोदय:- रात्रि 08:10 PM बजे) पर चन्द्रमा देवता को देखकर ही अर्घ्य देकर फिर व्रत खोलती हैं। आप सभी सनातनियों को “संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : बुधवार पौष माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 10:06 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र पुष्य 12:58 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। देव गुरु बृ्हस्पति को पुष्य नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता माना गया है।
⚜️ योग : इन्द्र योग 07:33 PM तक, उसके बाद वैधृति योग
प्रथम करण : विष्टि – 10:06 ए एम तक
द्वितीय करण : बव – 09:58 पी एम तक बालव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:19 ए एम से 06:14 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:46 ए एम से 07:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:25 पी एम से 05:52 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:28 पी एम से 06:50 पी एम
💧 अमृत काल : 06:30 पी एम से 08:07 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:46 ए एम, दिसम्बर 19
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में कांस्य पात्र में काले तिल के लड्डू चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्री गणेश चतुर्थी व्रत (चंद्रोदय रात्रि 8:50 मि.)/मूल प्रारंभ/ अरबी भाषा दिवस/ अस्पृश्यता निवारण दिवस, भारतीय क्रिकेटर विजय हजारे स्मृति दिवस, भारतीय पत्रकार बरखा दत्त जन्म दिवस, साहित्य समीक्षक रमेश तेंदुलकर जन्म दिवस, भारतीय व्यवसायी विट्ठल माल्या जन्म दिवस, अंतर्राष्‍ट्रीय घुमंतु दिवस, मद्य निषेध दिवस, अभिनेत्री ऋचा चड्हा जन्म दिवस, संत परंपरा में सर्वोपरि गुरु घासीदास जन्म दिवस, राष्ट्रीय धातुविज्ञान दिवस, अंतरराष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
भूमि दोष को दूर करने के उपाय
भूमि दोष को दूर करने के लिए आपको वास्तु शांति करवानी चाहिए। अगर आप साल में एक बार भी घर में वास्तु शांति करवाते हैं तो भूमि से जुड़े कई दोष दूर हो जाते हैं।
अगर आप भूमि को डेढ़ या दो फिट खुदवाते हैं और इसकी मिट्टी को कहीं दूर फिंकवा देते हैं, तो वास्तु के अनुसार भूमि दोष दूर हो जाता है।
भूमि दोष को दूर करने के लिए आपको केले, तुलसी आदि के पौधे जमीन पर लगाने चाहिए।
भूमि दोष से बचने के लिए घर में काले और लाल रंग का प्रयोग कम करना चाहिए।
हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती और गीता का घर में पाठ करने से भी भूमि दोष दूर होने लगता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अश्वगंधा चूर्ण आपके तनाव को दूर करने और शरीर को अंदर से मजबूत बनाने का काम करता है। इसे रोज़ाना सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले दूध के साथ लिया जाए तो यह शरीर की थकावट मिटाकर नई ताकत देता है। सफेद मूसली का चूर्ण उन लोगों के लिए फायदेमंद है,
जो अपनी स्टेमिना और यौन स्वास्थ्य को सुधारना चाहते हैं। इसे नाश्ते के बाद दूध या शहद के साथ लें और इसका असर कुछ ही दिनों में दिखने लगेगा।
अब बात करें कौंच के बीज के चूर्ण की, तो यह आपकी प्रजनन क्षमता बढ़ाने और टेस्टोस्टेरोन लेवल को संतुलित रखने में बेहद मददगार है।
इसे रात में सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ लें। तीनों जड़ी-बूटियां प्राकृतिक हैं और बिना किसी साइड इफेक्ट के आपके शरीर को मजबूती देती हैं।
अगर आप अपनी सेहत को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो इन जड़ी-बूटियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। लेकिन ध्यान रखें, इनका सेवन शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।
🥒 आरोग्य संजीवनी 🫒
दर्द निवारण:• धतूरे के बीजों से बनी औषधि का उपयोग शूल (दर्द) जैसे गठिया, मांसपेशियों के दर्द और तंत्रिका संबंधी दर्द को कम करने के लिए किया जाता है।
इसे लेप के रूप में बाहरी रूप से लगाया जाता है।
मानसिक विकार:• मदत्व (संज्ञान पर हल्का प्रभाव) के कारण, इसे गंभीर मानसिक विकारों में नियंत्रित खुराक में उपयोग किया जाता है।
यह वात और कफ दोष के असंतुलन को संतुलित करने में मदद करता है।
श्वसन रोग:• धूम्रपान योग में धतूरे का उपयोग अस्थमा और सांस संबंधी परेशानियों के लिए किया जाता है। यह ब्रोंकाइटिस में श्वसन मार्ग को साफ करता है।
त्वचा रोग: • धतूरे का तेल और बीजों से तैयार लेप चर्म रोगों (त्वचा के संक्रमण) में लाभकारी होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
💐वास्तविक चरित्र💐
राजा भोज के दरबार में एक विद्वान आए। वे अनेक भाषाऐं धारा प्रवाह रूप से बोलते थे।
भोज यह जानना चाहते थे कि उनकी मातृ-भाषा क्या है? पर संकोचवश पूछ न सके।
विद्धान जी के चले जाने के बाद राजा ने अपनी शंका दरबारियों के सामने रखी और पूछा- “क्या आपमें से कोई बता सकता है कि विद्धान जी की मातृभाषा क्या है?”
मंत्री रघुवीर ने कहा- “आज तो नहीं कल मैं पता लगा दूँगा कि उनकी अपनी भाषा क्या है?”
दूसरे दिन नियत समय पर विद्वान जी आए और दरबार समाप्त होने पर जब वे जाने लगे तो रघुवीर ने उन्हें सीढियों पर धक्का लगा दिया, जिससे वे गिर पडे, उन्हें थोडी चोट लगी।
रघुवीर की अशिष्टता पर उन्हें बहुत क्रोध आया और वे धडाधड गालियाँ देने लगे। जिस भाषा में वे गालियाँ दे रहे थे उसे ही उनकी मातृ-भाषा मान लिया गया।
प्रकट में रघुवीर पर राजा ने भी क्रोध दिखाया पर मन ही मन सभी ने उसकी सूझ की प्रशंसा की।
विद्धान जी के जाने के बाद रघुवीर बोला- “तोता तभी तक राम-राम कहता है जब तक कोई मुसीबत उस पर नहीं आती। पर जब बिल्ली सामने आती है तो वह बस टें-टें ही बोलता है। इसी प्रकार क्रोध में मनुष्य असली भाषा बोलने लगता है।”
रघुवीर ने कहा- “विपत्ति आने पर मनुष्य के असली व्यक्तित्व का पता चलता है। साधारण समय में लोग आवरण में छिपे रहते हैं पर कठिनाई के समय वे वैसा ही आचरण करते हैं जैसे कि वस्तुतः वे होते हैं।”
💐शिक्षा:-💐
जो मौका मिलने पर या विपत्ति में भी स्वार्थ के लिए गलत मार्ग न अपनाए वही ईमानदार और वास्तविक चरित्रवान है।
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आप चाहे किसी भी समाज से हो, अगर आप अपने समाज के किसी उभरते हुए व्यक्तित्व से जलते हो या उसकी निंदा करते हो तो आप निश्चित रूप से उस समाज के लिए कलंक हो ।
सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

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