सेल्समैन कर रहा नेतागिरी, राशन बांटने से कोई मतलब नहीं
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । सेल्समैनो को राशन वितरण करने से कोई मतलब नहीं है। ग्रामीणों के द्वारा लगातार शिकायत की जाती है कि फिंगर तो लगवा लिए जाते हैं पर राशन वितरण नहीं किया जाता है । मशीन में राशन का स्टाक कम हो जाए इसके लिए सेल्समैन के द्वारा फिंगर लगवा लिए जाते हैं । सूत्रों के द्वारा बताया गया कि जब ये ठिर्री में पदस्थ थे तब इनके द्वारा स्व सहायता समूह जो कि बच्चों के भोजन बनाने का कार्य करती है उसमे भी राशन की जमकर हेराफेरी की गई थी दो माह के जगह पर एक माह का राशन वितरित किया गया था और बाहर ही बाहर राशन बेचने की सप्लाई की जाती थी । इसी प्रकार ग्राम पिड़रई में भी सैल्समैन के द्वारा एक माह का राशन आहरित कर लिया गया और पोड़ी कला बी में तीन माह के जगह मात्र दो माह का राशन वितरित किया गया। गरीबों के राशन को आहरित करके नए- नए वाहन के शौक पूरे किए जा रहे हैं ।
*सरकारी कर्मचारी के नेतागिरी करने पर धारा 129 व 134 की कार्यवाही की जाएगी*
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 129 व 134 के प्रावधानों के अनुसार राज्य एवं केंद्र सरकार के कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकते । अगर राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं तो 2 साल का कारावास व सरकारी नौकरी से सेवा समाप्त करने का प्रावधान हैं । लेकिन सेल्समैन आदर्श ज्योतिषी नेताओं के साथ फोटो खिचवाने के बेहद शौकीन माने जाते हैं । सूत्रों ने बताया कि इनके राजनीतिक लोगों से गहरे संबंध हैं इसलिए ये उच्चाधिकारियों से भी रौब झाड़ते हुए नजर आते हैं। जब इनको नेतागिरी ही करनी है तो पद से इस्तीफा दे देना चाहिए । सूत्रों ने यह भी बताया गया कि सेल्समैनी के लिए नहीं खरीदी केन्द्र के लिए नौकरी करते हैं जो कई बार अनेकों लोगों से इनके द्वारा खुद कहां गया हैं। क्योंकि खरीदी में इनके द्वारा जमकर खेल- खेला जाता है । कुछ साहूकारों का पैसा भी इनके द्वारा आहरित कर लिया गया हैं । बड़े आश्चर्य की यह बात है कि ऑपरेटर और इनकी मिलीभगत से गलत खाते में जो कि वह खाता इनका खुद का था तो बेचारे साहूकार का खाता बदलकर अपना खुद का खाता लगाकर साहूकार के पैसों को इनके द्वारा आहरित कर लिया गया हैं । अनेकों बार साहूकार के मांगने के बाद भी इनके द्वारा पैसा वापस नहीं किए गए इसकी जानकारी इनके उच्चाधिकारियों को भी है लेकिन नेतागिरी के चलते इनका कुछ नहीं हो पाया ।
*ईओडब्ल्यू की हो जांच*
आखिर ये आठ नौ हजार की नौकरी करते हैं तो इनके पास इतना पैसा आया कहां से जो कि जांच का विषय हैं। खमतरा में इनका स्कूल चल रहा है। इसके अलावा पंचायतों में ट्रेडर्स के नाम से जमकर बिल लग रहे हैं । पंचायतों में जो इनके द्वारा बिल लगाए जा रहे हैं वो कमीशन के हिसाब से बिल लग रहे हैं । जो कि जांच का विषय हैं। हर वर्ष इनके द्वारा नए- नए वाहनों को खरीद कर लाया जाता है। इनके नाम से बैंक भी चल रही हैं। सूत्रों के द्वारा यह भी बताया गया है कि इनके द्वारा अनेकों प्रकार के काम राजनीतिक लेवल में हो रहे हैं अगर उच्च स्तरीय जांच उनके ऊपर बैठ जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ।



