25 अक्टूबर 2023: पापांकुशा एकादशी व्रत आज, जानिए मुहूर्त और महत्व
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🔮 25 अक्टूबर 2023: पापांकुशा एकादशी व्रत आज, जानिए मुहूर्त और महत्व
🪙 आज यानी 25 अक्तूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। वैसे तो हर माह में दो एकादशी तिथि आती है, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में, लेकिन पापांकुशा एकादशी का अलग ही महत्व होता है। इस व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को कभी धन-दौलत, सुख, सौभाग्य की कमी नहीं होने देते। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति इस लोक के सुखों को भोगते हुए मोक्ष को प्राप्त करता है। ऐसे में चलिए जानते हैं। आचार्य श्री गोपी राम से पापांकुशा एकादशी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि…_
⚛️ पापांकुशा एकादशी तारीख और शुभ मुहूर्त
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार पापांकुशा एकादशी 25 अक्तूबर, दिन बुधवार को है। इस तिथि की शुरुआत 24 अक्तूबर को दोपहर 3 बजकर 14 मिनट से हो रही है। 25 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर इसका समापन होगा। उदया तिथि 25 अक्तूबर को है, इसलिए पापांकुशा एकादशी का व्रत 25 अक्तूबर को ही रखा जाएगा।
💮 पापाकुंशा एकादशी व्रत की पूजा विधि
इस व्रत के प्रभाव से अनेकों अश्वमेघ और सूर्य यज्ञ करने के समान फल की प्राप्ति होती है। इसलिए पापाकुंशा एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। इस व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है:
- इस व्रत के नियमों का पालन एक दिन पूर्व यानि दशमी तिथि से ही करना चाहिए। दशमी पर सात तरह के अनाज, इनमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इन सातों धान्य की पूजा एकादशी के दिन की जाती है।
- एकादशी तिथि पर प्रात:काल उठकर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
- संकल्प लेने के पश्चात घट स्थापना करनी चाहिए और कलश पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखकर पूजा करनी चाहिए। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।
- व्रत के अगले दिन द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन और अन्न का दान करने के बाद व्रत खोलें।
👉🏽 पापाकुंशा एकादशी का महत्व
महाभारत काल में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को पापाकुंशा एकादशी का महत्व बताया। भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि यह एकादशी पाप का निरोध करती है अर्थात पाप कर्मों से रक्षा करती है। इस एकादशी के व्रत से मनुष्य को अर्थ और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा तथा ब्राह्मणों को दान व दक्षिणा देना चाहिए। इस दिन सिर्फ फलाहार ही किया जाता है। इससे शरीर स्वस्थ व मन प्रफुल्लित रहता है।
🤷🏻♀️ पापांकुशा एकादशी पर बन रहे तीन शुभ योग
पापांकुशा एकादशी का व्रत पर तीन शुभ योग बन रहे है. पापांकुशा एकादशी के दिन रवि योग, वृद्धि योग और ध्रुव योग बन रहे हैं. इस दिन रवि योग सुबह 06 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ हो रहा है. इस दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक मान्य रहेगा. वहीं वृद्धि योग प्रात:काल से प्रारंभ होगा और वह दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से ध्रुव योग शुरू होगा और रात तक है.
🗣️ पापांकुशा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसासर भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को पापांकुशा एकादशी व्रत कथा सुनाई थी. जो कि इस प्रकार है. विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था. वह बेहद ही हिंसक, कठोर, अधर्मी, पाप कर्मों में लिप्त रहने वाला व्यक्ति था. समय बीतने के साथ ही उसके जीवन का अंतिम क्षण आने वाला था. उसकी मृत्यु से एक दिन पहले यमदूतों ने उसे संदेश दिया कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है, कल हम तुम्हारे प्राण लेने आएंगे.
इस बात को जानकर बहेलिया बहुत ही दुखी और भयभीत हो गया. परेशान होकर वह अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंच गया. वह अंगिरा ऋषि को दंडवत प्रणाम किया और अपने साथ हुई पूरी घटना उन्हें बताई. उसने कहा कि उसने पूरे जीवन पाप कर्म किए हैं. इनसे वह मुक्त होना चाहता है, इसलिए आप से अनुरोध है कि कोई ऐसा उपाय बताएं, जिसे करने उसे मोक्ष मिल जाए और पापों से भी वह मुक्त हो जाए



