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29 जुलाई 2023: आने वाली है अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, कई गुना पुण्‍य देता है यह व्रत, नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🛕 29 जुलाई 2023: आने वाली है अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, कई गुना पुण्‍य देता है यह व्रत, नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार 18 जुलाई 2023 से अधिकमास शुरू हो चुका है। हिंदू धर्म में इसे पुण्यदायक मास माना गया है। अधिक मास यानि पुरुषोत्तम मास के दौरान पड़ने वाली एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी और सुमद्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। अधिक मास हर 3 साल में एक बार आता है। इसके अनुसार अधिक मास में सावन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। अधिकमास और एकादशी दोनों ही भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है। मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी को करने से सालभर की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है। आइए जानते हैं। आचार्य श्री गोपी राम से कि अधिकमास की पद्मिनी एकादशी की डेट, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।
🚩 पद्मिनी एकादशी व्रत 2023 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, श्रावण अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 जुलाई दोपहर 02:51 बजे से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 29 जुलाई को दोपहर 01:05 बजे तक होगा। बता दें कि श्रावण अधिक मास पद्मिनी एकादशी व्रत 29 जुलाई 2023, शनिवार के दिन रखा जाएगा। इस विशेष दिन पर दो अत्यंत शुभ संयोग के निर्माण हो रहा है, जिसमें पूजा पाठ का विशेष महत्व है।
✡️ पद्मिनी एकादशी व्रत 2023 शुभ योग
पंचांग के अनुसार, पद्मिनी एकादशी व्रत के दिन दो अत्यंत शुभ योग के निर्माण हो रहा है। इस विशेष दिन पर ब्रह्म योग और इंद्र योग बन रहे हैं। बता दें कि सुबह 09:34 बजे तक ब्रह्म योग रहेगा और इसके बाद इंद्र योग शुरू हो जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दोनों शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ एवं स्नान-दान करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
⚛️ एकादशी पूजा विधि
🔹 पद्मिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें.
🔹 इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करें.
🔹 भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें.
🔹 भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें.
🔹 अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें.
🔹 भगवान की आरती करें.
🔹 भगवान के भजन या मंत्रों का पाठ करें.
🔹 इस दिन एकादशी व्रत कथा सुनें.
🔹 भगवान को भोग लगाएं.
🔹 इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें.
🔹 ब्राह्मण को फलाहार का भोजन करवायें और उन्हें दक्षिणा दें.
🔹 एकादशी व्रत द्वादशी के दिन पारण मुहूर्त में खोलें.
🗣️ एकादशी व्रत का नियम क्या है?
एकादशी व्रत करने वाले लोगों को दशमी यानी एकादशी से एक दिन पहले के दिन से कुछ जरूरी नियमों को मानना पड़ता है. दशमी के दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज, मसूर की दाल और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. दशमी और एकादशी दोनों दिन लोगों को भोग-विलास से दूर पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
🍱 पूजन सामग्री
पूजा की सामग्री में पान, लौंग, सुपारी, कपूर, पीला चंदन, अक्षत, पानी से भरा नारियल, पंचमेवा, कुमकुम, हल्दी, धूप, दीप, तिल, मिष्ठान, अनार, फूल, घी, पंचामृत बनाने के लिए कच्चा दूध, शहद और शक्कर, चावल, तुलसी, गोबर, केले का पेड़, मिठाई, मौली इत्यादि अवश्य रखें. इन चीजों के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है.
💁🏻‍♀️ पद्मिनी एकादशी व्रत का महत्व
अधिकमास की एकादशी तिथि का विशेष महत्व है. पद्मिनी एकादशी जगत के पालनहार भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है. शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति पद्मिनी एकादशी व्रत का पालन सच्चे मन से करता है, उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति हर प्रकार की तप-तपस्या, यज्ञ और व्रत आदि से मिलने वाले फल के समान फल प्राप्त करता है. मान्यता यह भी है कि अधिक मास एकादशी व्रत रखने से साधकों को श्री हरि के चरणों में स्थान प्राप्त होता है और जीवन में विशेष लाभ मिलता है. इसके साथ शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि यह व्रत रखने से व्यक्ति को यज्ञ, तप और दान के समान फल की प्राप्ति होती है.
🥘 एकादशी व्रत उद्यापन
एकादशी व्रत के दिन और उद्यापन पर ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए. पूजन कितना भी बड़ा या छोटा हो सभी व्रतियों को श्रद्धा के साथ इसे करना चाहिए. एकादशी व्रत का उद्यापन किसी योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करना चाहिए. उद्यापन में 12 माह की एकादशियों के निमित्त 12 ब्राह्मणों को पत्नी सहित निमंत्रित किया जाता है. उद्यापन पूजा में तांबे के कलश में चावल भरकर रखें. अष्टदल कमल बनाकर भगवान विष्णु और लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन किया जाता है. पूजन के बाद हवन होता है और सभी ब्राह्मणों को फलाहारी भोजन करवाकर वस्त्र,दान आदि दिया जाता है.

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