मांस की दुकाने हटाने सीएमओ ने जोड़े हाथ, सकल हिन्दू समाज ने 24 घंटे की चेतावनी के साथ दिया था ज्ञापन
नगर परिषद द्वारा चिन्हित स्थान पर अतिक्रमण था, अतिक्रमण हटने के बाद दुकानें होगी शिफ्ट
सिलवानी। गुरूवार की दोपहर में नगर परिषद ने प्रषासन और पुलिस को सूचना देकर मांस की दुकानें हटाने सेन्ट्ल बैंक के सामने और पुलिया के पास पहुंचकर सीएमओ सुनील जैन ने हाथ जोड़कर मांस की दुकानें हटाने का निवेदन किया। जबकि मांस दुकानदारों को पूर्व से सूचना होने पर उन्होंने अपनी दुकानें बंद कर ली थी। जिससे नगर परिषद की कार्यवाही सिर्फ रस्म अदायगी सिद्ध हुई।
नगर परिषद द्वारा चिन्हित मांस विक्रय स्थल पर पूर्व से 7 दुकानें संचालित है जबकि वर्तमान में 9 मुर्गे मांस और 4 दुकानों से मछली का विक्रय प्रतिबंधित क्षेत्र मेें किया जाता है।
ज्ञातव्य है कि बुधवार को सकल हिन्दू समाज ने नगर में जगह-जगह अतिक्रमण, मांस की दुकानें एवं हाइवे पर पोल लगाकर अतिक्रमण के विरोध में बजरंग चैराहा से एकत्रित होकर रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार डाॅ. हर्ष विक्रमसिंह को 24 घंटे में कार्रवाई करने ज्ञापन सौंपा था।
ज्ञातव्य है कि पूर्व में नगर में कई बार षांति समिति की बैठक में जगह-जगह मांस की दुकानों को हटाने का मुद्दा उठाया जाता रहा है। कार्रवाई के नाम पर नगर परिषद अमला दुकान संचालकों को नोटिस या अस्थाई तौर पर हटा दिया जाता था। जबकि प्रषासन अण्डा मांस की दुकानों को नगर के वार्ड 4 हाॅस्पिटल के पीछे बाउंड्री से लगकर जगह आवंटित कर दी गई और इन दुकान संचालकों ने वहां दुकानों का निर्माण कर लिया है। और धीरे धीरे पुनः हाइवे किनारे मंदिर के पास खुले में मांस की दुकानें संचालित करने लगे है। लगभग एक माह के पूर्व भी नगर परिषद ने मांस की दुकानों को हटाकर टीनषेड को जब्त कर थाने लाया गया था लेकिन कुछ दिन बाद हाइवे किनारे नालियों पर अब टाल्स लगाकर पक्का निर्माण कर खुले में मांस की दुकानें संचालित कर रहे है। गुरूवार को कार्रवाई के दौरान नगर परिषद का राजस्व अमला, सफाई कामगार और पुलिस बल मौजूद रहा।
इस संबंध में सीएमओ सुनीन जैन ने बताया कि 9 मुर्गा मांस एवं 4 मछली दुकानें प्रतिबंधित क्षेत्र में संचालित हो रही है जो कार्यवाही के दौरान बंद पाई गई। दुकानदारों को बुलाकर नगर परिषद द्वारा चिन्हित स्थान पर दुकानों को भूमि आवंटित की गई, आवंटित भूमि पर अतिक्रमण होने के कारण दुकानदारों को सात दिवस के अन्दर अतिक्रमण हटाकर भूमि सौंप दी जाएगी।



