ज्योतिष

आज का पंचाग गुरुवार 29 सितम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

……. ✦••• जय श्री हरि •••✦ ……
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 29 सितम्बर 2022

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
👣 29 सितम्बर 2022 दिन गुरुवार को शारदीय नवरात्रि का चतुर्थ दिन है। आप सभी सनातनी बंधुओं को शारदीय नवरात्रा के चौथे दिन माता को प्रशन्न करने हेतु एक विशेष उपाय बताता हूँ। आज माता चंडी की चौथी स्वरूप माँ कुष्मांडा की उपासना में माता मस्तक पर तिलक हेतु चाँदी का टुकड़ा उपयोग करें। नेत्रों में अंजन लगायें और माता को मधुपर्क (दही, मधु और घी) भोग हेतु समर्पित करें। आप सभी को माँ कुष्मांडा के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन माह
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथिः- चतुर्थी तिथि 24:10:00 तक तदोपरान्त पंचमी तिथि।
✏️ तिथि स्वामीः- चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा पंचमी तिथि के स्वामी सर्पदेव (नागराज) नागदेव है।
💫 नक्षत्रः- विशाखा नक्षत्र 30:16:34 तक।
🪐 नक्षत्र स्वामीः- विशाख नक्षत्र के स्वामी गुरु देव जी हैं हैं।
📢 योगः- विषकुंभ 24:55:00 तक तदोपरान्त प्रीति
प्रथम करण : वणिज – 12:50 पी एम तक
द्वितीय करण: विष्टि – 12:08 ए एम, सितम्बर 30 तक बव
⚜️ दिशाशूलः-गुरूवार को दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि ज्यादा आवश्यक हो तो घर से सरसों के दाने या जीरा खाकर निकलें।
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 09:12:00 से 10:41:00 तक
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 01:41:00 से 03:10:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:04:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:56:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:37 ए एम से 05:25 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:01 ए एम से 06:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:47 ए एम से 12:35 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:11 पी एम से 02:58 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:58 पी एम से 06:22 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:10 पी एम से 07:22 पी एम
💧 अमृत काल : 08:39 पी एम से 10:13 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:47 पी एम से 12:36 ए एम, सितम्बर 30
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:13 ए एम, सितम्बर 30 से 06:13 ए एम, सितम्बर 30
❄️ रवि योग : 06:13 ए एम से 05:13 ए एम, सितम्बर 30
☄️ विशाखा नक्षत्र – आज का पूरा दिन पार कर के अगले दिन सुबह 5 बजकर 13 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में बेसन के लड्डू अर्पण करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – माँ कूष्मांडा पूजा / व्रत, रंग नारंगी, वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत, ब्रह्मावर्त (बिठुर ) में सिद्ध गणेश मन्दिर में अभिषेक, पम्पकिन ( कद्दू ) दिवस, अंतर्राष्ट्रीय खाद्य हानि और अपशिष्ट न्यूनीकरण जागरूकता दिवस, विश्व समुद्री दिवस 2022, विश्व हृदय दिवस
✍🏽 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🗼 Vastu tips 🗽
पूर्व दिशा – पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है। इस दिशा से सकारात्मक व ऊर्जावान किरणें हमारे घर में प्रवेश करती हैं। यदि घर का मेनगेट इस दिशा में है तो बहुत अच्छा है। खिड़की भी रख सकते हैं।
पश्चिम दिशा – आपका रसोईघर या टॉयलेट इस दिशा में होना चाहिए। रसोईघर और टॉयलेट पास- पास न हो, इसका भी ध्यान रखें।
उत्तर दिशा – इस दिशा में घर के सबसे ज्यादा खिड़की और दरवाजे होने चाहिए। घर की बालकॉनी व वॉश बेसिन भी इसी दिशा में होना चाहिए। यदि मेनगेट इस दिशा में है और अति उत्तम।
दक्षिण दिशा – दक्षिण दिशा में किसी भी प्रकार का खुलापन, शौचालय आदि नहीं होना चाहिए। घर में इस स्थान पर भारी सामान रखें। यदि इस दिशा में द्वार या खिड़की है तो घर में नकारात्मक ऊर्जा रहेगी और ऑक्सीजन का लेवल भी कम हो जाएग। इससे घर में क्लेश बढ़ता है।
उत्तर-पूर्व दिशा – इसे ईशान दिशा भी कहते हैं। यह दिशा जल का स्थान है। इस दिशा में बोरिंग, स्वीमिंग पूल, पूजास्थल आदि होना चाहिए। इस दिशा में मेनगेट का होना बहुत ही अच्छा रहता है।
उत्तर-पश्चिम दिशा – इसे वायव्य दिशा भी कहते हैं। इस दिशा में आपका बेडरूम, गैरेज, गौशाला आदि होना चाहिए।
दक्षिण-पूर्व दिशा – इसे घर का आग्नेय कोण कहते हैं। यह ‍अग्नि तत्व की दिशा है। इस दिशा में गैस, बॉयलर, ट्रांसफॉर्मर आदि होना चाहिए।
दक्षिण-पश्चिम दिशा – इस दिशा को नैऋत्य दिशा कहते हैं। इस दिशा में खुलापन अर्थात खिड़की, दरवाजे बिलकुल ही नहीं होना चाहिए। घर के मुखिया का कमरा यहां बना सकते हैं। कैश काउंटर, मशीनें आदि आप इस दिशा में रख सकते हैं।
घर का आंगन – घर में आंगन नहीं है तो घर अधूरा है। घर के आगे और पीछे छोटा ही सही, पर आंगन होना चाहिए। आंगन में तुलसी, अनार, जामफल, मीठा या कड़वा नीम, आंवला आदि के अलावा सकारात्मक ऊर्जा देने वाले फूलदार पौधे लगाएं।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
किसकी आयु कम हो जाती है ?
जिनको अति अभिमान होता है, जो अधिक एवं व्यर्थ का बोलते हैं उनकी आयु कम हो जाती है |
जो निंदा-ईर्ष्या करते है या दुर्व्यसन में फँसे हैं अथवा जो जरा-जरा बात में क्रुद्ध हो जाते हैं उनकी भी उम्र कम हो जाती है |
जो अधिक खाना खाते हैं, रात को देर से खाते हैं, बिनजरूरी खाते हैं, चलते-चलते खाते हैं, खड़े-खड़े हैं उनका भी स्वास्थ्य लडखडा जाता है और आयु कम हो जाती है |
जो मित्र, परिवार से द्रोह करते हैं, संतो, सज्जनों की निंदा करते है उनकी भी आयु कम होती है, जो ठाँस- ठाँस के खाता है, ब्रह्मचर्य का नाश करता रहता है वह जल्दी मरता है |
जो प्राणायाम और भगवद-मंत्र का जप नहीं करता उसकी लम्बी आयु होने में संदेह रहता है और जो ब्रह्मचर्य पालते हैं, प्राणायाम करते हैं उनकी आयु बढती है |
🫃🏻 आरोग्य संजीवनी 👩🏻‍🍼
प्रेगनेंसी में क्यों होता है पैरों में दर्द_
आमतौर पर महिलाओं को गर्भावस्था की दूसरी या तीसरी तिमाही में पैरों में दर्द होने लगती है। हालांकि यह बहुत आम बात होती है। दरअसल इस दौरान वजन बढ़ने, पैरों में सूजन आने, हार्मोनल बदलाव और थकान आदि जैसे कारणों से पैर में दर्द होता है।
प्रेगनेंसी में गर्भाशय के बढ़ने के कारण पैरों से हृदय तक रक्त संचार करने वाली नसों पर दबाव पड़ता है। इससे रक्त परिसंचार में समस्या आ सकती है जिस कारण पैरे में दर्द होने लगता है।
प्रेगनेंसी के दौरान प्रोजेस्टेरोन हार्मोन आपके पैरों की मांसपेशियों को प्रभाविक करता है जोकि पैर दर्द या पैरों में ऐंठन का कारण बनते हैं।_
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
विष्‍णु पूजन से आएंगे मिथुन राशि के अच्छे दिन
मां लक्ष्‍मी के स्‍वामी भगवान विष्‍णु का पूजन करने से मिथुन राशि के लोगों के अच्छे दिन आते हैं. भगवान विष्‍णु ही इस संसार के पालनहार हैं और अगर आप उनकी पूजा सच्‍चे मन और भक्‍तिभाव से करते हैं तो आपको सभी तरह के सांसारिक सुखों की प्राप्‍ति होती है.
अगर आप भगवान विष्‍णु के साथ मां लक्ष्‍मी की भी पूजा करते हैं तो आपको मां लक्ष्‍मी धन और वैभव प्रदान करती हैं और आपके सभी कष्‍ट दूर हो जाते हैं. जो कोई मिथुन राशि का जातक अपने अच्छे दिन लाना चाहता है वो भगवान विष्‍णु के साथ मां लक्ष्‍मी की पूजा अवश्य करें.
विष्‍णु पूजन विधि – विष्‍णु पूजन आरंभ करने से पूर्व व्रत/पूजा का संकल्‍प लें. सबसे पहले हाथों में जल, पुष्‍प और चावल लें. संकल्‍प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस साल, वार, तिथि और उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी मनोकामना बोलें. अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें. किसी भी शुभ कार्य या पूजन में सबसे पहले प्रथम पूज्‍य भगवान गणेश का नाम लिया जाता है. सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें. गणेश जी को स्‍नान कराएं और वस्‍त्र अर्पित करें. अब पुष्‍प और अक्षत अर्पित करें. इसके पश्‍चात् भगवान विष्‍णु की पूजा करें. भगवान विष्‍णु का आवाह्न करें और उन्‍हें आसन दें. अब विष्‍णु जी को स्‍नान करवाएं. पहले पंचामृत और फिर जल से स्‍नान करवाएं. अब विष्‍णु जी को वस्‍त्र पहनाएं. इसके बाद आभूषण और यज्ञोपवीत पहनाएं. फूलों की माला पहनाएं. सुगंधित इत्र अर्पित करें और माथे पर तिलक लगाएं. तिलक के लिए अष्‍टगंध का प्रयोग कर सकते हैं. अब धूप और दीप अर्पित करें. भगवान विष्‍णु को तुलसीदल विशेष प्रिय है इसलिए विष्‍णु पूजन में इसका प्रयोग जरूर करें. भगवान विष्‍णु के पूजन में चावलों का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए आप इनके स्‍थान पर तिल का प्रयोग कर सकते हैं. घी का दीपक जलाएं और आरती करें. आरती के बाद नेवैद्य अर्पित करें और ऊं नमो नारायणाय नम: मंत्र का जाप करें. इस पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी अवश्य ही आपको मनचाहा फल देंगे.
●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●
⚜️चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

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