धार्मिक

चैतन्य देवियों की झांकी के तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन

रिपोर्टर : तारकेश्वर शर्मा
बम्होरी । नवरात्रि के पावन पर्व पर चैतन्य देवियों की झांकियों में कन्याओं को देवियों के रूप में सजाया जाता है। वैसे तो भारत त्योहारों का देश है पर केवल नवरात्र ही एकमात्र ऐसा पर्व है जो वर्ष में दो बार मनाया जाता है। यह त्यौहार महाशक्ति के नव रूपों से प्रेरणा पाने का समय है। माँ के यह नव स्वरुप शक्ति के महत्त्व और कर्त्तव्य पर आधारित हैं।
नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य को लेकर ब्रह्मकुमारी साध्वी बी. के. मोहिनी दीदी ने बताया कि भारत में परम्परागत तरीके से नवरात्र मनाया जाता है। नवरात्र का भावनात्मक अर्थ है दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिनों तक पूजा-अर्चना और नवरात्र का आध्यात्मिक अर्थ है नव या नए युग में प्रवेश करने से ठीक पहले की ऐसी घोर अंधियारी रात्रि, जिसमें शिव, अवतरण लेकर मनुष्यात्माओं के पतित अवचेतन मन (कुसंस्कार) का ज्ञान अमृत द्वारा तरण (उद्धार) कर देते हैं। अवतरण अर्थात्‌ अवचेतन का तरण। ऐसी तरित-आत्माएं फिर चैतन्य देवियों के रूप में प्रत्यक्ष हो कर कलियुगी मनुष्यों का उद्धार करती हैं।इस प्रकार पहले शिवरात्रि होती है, फिर नवरात्रि और फिर नवयुग आता है। मां दुर्गा को शिव-शक्ति कहा जाता है। हाथ में माला भी दिखाते हैं। माला परमात्मा के याद का प्रतीक है। जब परमात्मा को याद करेंगे तो जीवन में सामान करने की शक्ति, निर्णय करने, सहन करने, सहयोग करने इत्यादि अष्ट शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसलिए दुर्गा को अष्ट भुजा दिखाते हैं। इस तरह नौ देवियों की आध्यात्मिक रहस्यों को धारण करना ही नवरात्रि पर्व मानना है। वर्तमान समय स्वयं निराकार परमपिता परमात्मा इस कलियुग के घोर अंधकार में माताओ -कन्याओं द्वारा सभी को ज्ञान देकर फिर से स्वर्ग की स्थापना कर रहे हैं।
इस दौरान विभिन्न परिधानों में लोगों ने झांकी से मनमोह लिया। साथ ही झांकी के माध्यम से लोगों को कई संदेश दिया। विदित हो कि यह झांकी 29 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक रात्रि 8 बजे से रात्रि 11 बजे तक प्रस्तुत किया जाएगा। चेतन देवी की झांकियों को देखने के लिए बम्होरी कस्बे के आसपास के क्षेत्र के सहित काफी संख्या में लोगों ने झंकी का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं।

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