ट्रेक्टर टालियों पर नंबर, लाईट, रेडियम पटटी कुछ नहीं , हादसा हुआ तो कोन होगा जिम्मेदार
चालकों की यह लापरवाही ठीक नहीं
कई चालक तो सामान, सवारियों के साथ सरिए भी लादकर सड़कों पर दौड़ रहे ट्रेक्टर ट्राली
सिलवानी। शहर में और हाईवे पर लंबे समय से सड़कों पर दौड़ रहे कई वाहनो कृषि और व्यावसायिक ट्रैक्टर-ट्रॉली में रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं। ट्रॉलियों में बैक लाइट न होने से रात में पीछे चलने वाले लोगों के साथ हादसे की संभावना रहती है। शुक्र का तारा उदय होते ही 28 नवंबर से शुरू हो रहे सहालग के सीजन में इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या और बढ़ेगी। रात में ऐसे वाहनों से अधिक दिक्कत होती है। साथ ही सरिए से ओवरलोड ट्रॉलियां भी शहर की सड़कों पर दोड़ रही है। लोगों का कहना है कि शहर की कृषि उपज मंडी व अन्य कार्यों के लिए हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉली रोज शहर में आती हैं। इन ट्रॉलियों के पीछे संकेतक के लिए रेडियम व रिफ्लेक्टर नहीं होने के कारण रात के अंधेरे में पीछे चलने वाले वाहन चालकों को दिखाई नहीं पड़ती हैं। बाहर तक निकले हुए सरिया भरकर ले जाने वाली ट्रॉलियों से हादसे का डर अधिक रहता है। इसी तरह शहर तथा हाईवे मार्गों पर ट्रक व अन्य वाहन बिना ब्रेक लाइट जलाए ढाबों व मुख्य मार्ग पर खड़े कर दिए जाते हैं। इस कारण दो पहिया वाहन चालकों को इसकी जानकारी नहीं लग पाती है जो हादसों का कारण बन जाते हैं।
रात के अंधेरे में नहीं दिखते वाहन, होते हैं हादसे
ट्रैक्टर के पीछे लगी ट्रॉलियों के पीछे किसी तरह के इंडिकेटर व ब्रेक लाइट नहीं होने के कारण उनके रूकने का पीछे वाले वाहनों को आभास नहीं हो पाता है। सोशल एक्टिविस्ट संजय मंगल ने बताया ने बताया कि कई बार देर रात चौराहों पर ट्रैक्टर ट्राली न दिखने से लोग ‘टकराते टकराते बच जाते है तो कई टकराकर घायल हो जाते हैं।




