कृषिमध्य प्रदेश

फरवरी महीने में ही मार्च, अप्रैल जैसी गर्मी: अचानक बढ़े तापमान ने बढ़ाई चिंता

सिकुड़ जाएगा गेहूं का दाना, उत्पादन में आएगी कमी
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। दो बार बारिश का पानी मिलने से फसलें अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन फरवरी में ही मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी पड़ने और तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने से गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। क्योंकि इस समय गेहूं की फसल में दाना बन रहा है, ऐसे में माैसम का ठंडा हाेना जरूरी है। ज्यादा टेंपरेचर से दाना सिकुड़ जाएगा।इस स्थिति ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है। जिले भर में 4.34 लाख हेक्टेयर रकबे में बोवनी की गई है। इसमें से 2 लाख 85 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बोवनी की गई है। किसानों की मानें तो बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की फसल पकने के लिए कम से कम 90 दिन का समय जरूरी होता है। देर से बोई गई गेहूं की फसल बढ़ते तापमान से प्रभावित हो सकती है। नकतरा कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वप्निल दुबे के मुताबिक अचानक बढ़े मौसम के तापमान की वजह से भी गेहूं की उत्पादन पर फर्क पड़ सकता है।किसान पोटेशियम नाइट्रेट घोल पानी में मिलाकर छिड़काव करें ताकि नियंत्रण हो सके।
पिछले साल 11 लाख क्विटल का हुआ था उत्पादन…..
पिछले साल 2 लाख 69 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हुई थी और 11 लाख क्विंटल से ज्यादा गेहूं का उत्पादन हुआ था। इतना ही नहीं साढ़े चार लाख टन गेहूं की खरीदी समर्थन केंद्रों पर की गई थी।जबकि कृषि उपज मंडी में शेष गेहूं बिक्री हुई थी। इस बार जिले भर में 2 लाख 85 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बोवनी हुई है।जिससे 12 लाख क्विंटल से ज्यादा उत्पादन होने की संभावना जिला कृषि विभाग के अधिकारी जता रहे हैं।
एक्सपर्ट की सलाह: फसलों को बचाने यह करें उपाय….
नकतरा कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. स्वप्निल दुबे ने बताया कि वर्तमान में तापमान 30 से 32 डिग्री के आसपास चल रहा है,।जिससे फसलों को कोई नुकसान नहीं होगा। यदि तापमान इससे ऊपर जाता है ताे जरूर फसलों पर असर पड़ सकता है। गेहूं के दाने सामान्य तापमान में पकते हैं।
जब गर्मी अधिक होती है ताे दाना सिकुड़ने लगता है। किसानों को चाहिए कि अपनी गेहूं की फसल में पोटैशियम नाइट्रेट दो ग्राम एक लीटर पानी और सल्फेट या पोटाश पांच ग्राम एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। पाइप से सिंचाई करने के बजाए स्प्रिंकलर और रेनगन से सिंचाई करें, जिससे मौसम के असर को कुछ कम किया जा सके।

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