फर्जी तरीके से विकास कार्य दर्शाकर राशि की बंदरबाट पूर्व सचिव-सरपंच की करतूत, कागजों में हो गया
निर्माण, हकीकत करती है कुछ और बयां
बिना काम के ग्राम पंचायत सरपंच-सचिव ने निकाल लिये लाखों रुपए
शिकायत के बावजूद कार्रवाई करने से परहेज कर रहे अधिकारी
रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सिलवानी । प्रदेश शासन ने ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण एवं गांव के विकास की बागडोर गांव के लोगों को ही सौंपने के उद्देश्य से प्रदेश में त्रिस्तरीय राज व्यवस्था लागू की है। इस व्यवस्था से अनेक गांव की तस्वीरें भी बदली है लेकिन पंचायती राज्य व्यवस्था को क्रियान्वयन करने वाले पंचायत सचिवों द्वारा अनपढ़ जन प्रतिनिधियों का लाभ उठाकर फर्जी तरीके से विकास कार्य दर्शाकर विकास की राशि का ही बंदरबांट एवं दुरुपयोग भी देखने में आ रहा है। सिलवानी ब्लॉक की आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत नारायणपुर में भ्रष्टचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। एक ओर सरकार ने जहां पंचायती राज्य व्यवस्था के माध्यम से प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में विकास का एक सपना देखा था लेकिन इसका परिणाम कुछ उलट ही आ रहा है। ग्राम पंचायत के सचिव जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। ग्राम की जिम्मेदारी मिलते ही यहां पदस्थ सचिव केवल ग्राम का विकास तो छोड़िए सिर्फ अपना विकास चाहा है यह सब अगर आपको देखना है तो ग्राम पंचायत नारायणपुर में निर्माण कार्य खुद बयान कर देंगे।
जनपद में हो रहे भ्रष्टाचार के कारनामे रुकने का नाम ही नही ले रहे हैं। एक तरफ सिलवानी जनपद विकास के नए आयाम स्थापित करने में लगी है। पर यह चमक वास्तविकता में कितनी है, इसकी जानकारी हैरान करने वाली है। शासन की योजनाओं में पैतरेबाजी करके शासन का पैसा कैसे निकाल लिया जाता है इसका उदाहरण सिलवानी जनपद की कई ग्राम पंचायतों में आसानी से देखने मिल जाएगा।
सिलवानी जनपद में हो रहे कारनामों पर अधिकारियों की चुप्पी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है एवं इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह पूरा खेल उन्हीं के संरक्षण में खेला जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जाने के स्थान पर कार्यालय की ही टेबिल से ही अपने कार्यो को अंजाम दे देते है। मौके पर कार्यों को देखने की जहमत नहीं उठाते है। तत्कालीन पंचायत सचिव जसवंतसिंह रघुवंशी ने अधिकारियों से सांठगांठ कर लाखों रुपयों को धरातल पर उतारने के बजाये कागजों में उतार दिया।
इन कार्यों का मौके पर नहीं नाम निशान
ग्राम पंचायत नारायणपुर के ग्राम मेहका में खेल मैदान 3 लाख 8 हजार, खेल मैदान ककरूआ एक लाख 91 हजार, शांति धाम ककरूआ, लमनयाउ के 40-40 हजार रूपये, सामुदायिक कूप 1 लाख 75 हजार, एप्रोच रोड नारायणपुर से ककरूआ 13 लाख रुपए, सामुदायिक कूप नारायणपुर 1 लाख 47 हजार, सड़क ग्राम घोघरी से ककरूआ 11 लाख रुपए, पुलिया निर्माण लमनयाउ 4 लाख 70 हजार तालाब मरम्मत नारायणपुर 1 लाख 67 हजार, ग्राम मेहका से टडा की ओर खिरिया तक ग्रेवल सड़क निर्माण 14 लाख और पर दो ट्राली मुरम डाली गई थी जैसे कई कार्य है जो मौके पर हुये ही नहीं और राशि निकाल ली गई। ग्रामीणों ने बताया कि नाॅडेप 8 की राशि निकाली गई और मौके पर दो नाॅडेप बनाये गये। इसी तरह कई हितग्राही मूलक कार्यो की भी निकाल ली गई मौके पर आधे अधूरे कार्य पड़े हुये है।
ग्राम पंचायत नारायणपुर के सरपंच रमेश सल्लाम का कहना है कि ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच गीताबाई मेहरा और तत्कालीन सचिव जसंवतसिंह रघुवंशी द्वारा ग्राम पंचायत के कार्यों पर व्यापक स्तर पर राशि निकाली गई जो कि मौके पर कार्य ही नहीं हुये वही कई कार्य आधे अधूरे पड़े है जिनकी जांच को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन, क्षेत्रीय विधायक एवं जनपद पंचायत सीईओ को पत्र लिखा गया है।
इस संबंध में जनपद पंचायत सिलवानी मुख्य कार्यापालन अधिकारी नीलम रायकवार का कहना है कि कुछ दिन पूर्व वर्तमान सरपंच आये थे और शिकायती आवेदन दिया है जिसकी जांच के लिए सहायक यंत्री और उपयंत्री से जांच प्रतिवेदन मांगा गया।
अब सवाल यह उठता है कि जिन अधिकारियों के संरक्षण में राशि निकाली गई सीईओ द्वारा उन्ही को जांच सौंपी गई, सहज ही अनुमान लगाया जा सकता कि जांच किस तरह की होगी। जांच के लिए अन्य अधिकारियों के दल को भेजकर जांच कराया जाना चाहिए था।






