Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 02 सितम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 02 सितम्बर 2023
02 सितम्बर 2023 दिन शनिवार को भादपद मास के कृष्ण पक्ष कि तृतीया उपरान्त चतुर्थी तिथि है। आज सनातनियों का कजरी 3 व्रत, विशालाक्षी यात्रा, गौ पूजन दिवस एवं रिक्ता तिथि के आ जाने से सिद्धयोग निर्मित हो जाता है, जो अत्यंत ही शुभ है। सिन्धी लोगों का आज तिजड़ी व्रत है। जैनियों का तीज व्रत है। आप सभी सनातनियों को कजरी तीज व्रत, गौ पूजन एवं विशालाक्षी यात्रा की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 08:49 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि के स्वामी :- तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश जी है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 12:30 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि मीन है, जिसके स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं। इसलिए इस नक्षत्र पर शनिदेव और बृहस्पति देव दोनों का प्रभाव पड़ता है।
🔕 योग – शूल योग 09:22 AM तक, उसके बाद गण्ड योग 06:00 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 10:15 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 08:49 पी एम तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:48:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:20:00
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:29 ए एम से 05:14 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:52 ए एम से 05:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:46 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:28 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:42 पी एम से 07:05 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:42 पी एम से 07:50 पी एम
💧 अमृत काल : 08:12 ए एम से 09:38 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:44 ए एम, सितम्बर 03
💥 यायीजयद योग – 2 सितंबर को रात 8 बजकर 50 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सौंफ़ चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारंभ/कज्जली तीज व्रत/ विश्व नारियल दिवस, वियतनाम स्वतंत्रता दिवस, प्रसिद्ध अभिनेत्री साधना जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर इशांत शर्मा जन्म दिवस, साहित्यकार और शिक्षा शास्त्री अमरनाथ झा पुण्य तिथि, सुप्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु सखाराम खांडेकर स्मृति दिवस, भारत की अंतरिम सरकार का गठन हुआ, राष्ट्रीय पोषाहार दिवस (सप्ताह), पंचक प्रारंभ 23.26
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम चर्चा करेंगे पूर्व दिशा में हरे रंग से मिलने वाले शुभ फलों के बारे में। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा में हरा रंग करवाना अच्छा माना जाता है। इस दिशा में हरा रंग करवाने से परिवार के बड़े बेटे के जीवन की गति बनी रहती है। उसकी तरक्की के मार्ग में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती। अगर पढ़ाई करते समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पढ़ा जाए तो पढ़ने वाले को बहुत फायदा होता है। इससे उसकी बौद्धिक क्षमता अच्छी होती है और वह परीक्षा में अच्छे अंक पा सकता है।
साथ ही आपको बता दूं कि पूर्व दिशा का संबंध काष्ठ तत्व से भी है। अतः पूर्व दिशा में अगर हरे रंग के साथ ही लकड़ी से बनी चीजें रखी जाएं, तो और भी शुभ फलदायी होता है। इस दिशा में कमरे का दरवाजा या खिड़कियां बनवाना सबसे अच्छा ऑप्शन होता है। अगर घर का बड़ा बेटा अपने घर से पूर्व दिशा की ओर लकड़ी से जुड़ा कोई व्यापार करे, तो उसके लिये बहुत अच्छा होगा।
वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा में सफेद रंग करवाने से या सफेद रंग की चीजें रखने से पश्चिम दिशा संबंधी तत्वों के बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। पश्चिम दिशा का संबंध घर की छोटी बेटी से होता है। अगर आप अपनी छोटी बेटी के कमरे की पश्चिम दिशा में धातु की कोई चीज़ रखेंगे, या सफेद रंग की कोई चीज रखेंगे, तो उसके हर्ष तत्व में निश्चय ही बढ़ोतरी होगी। साथ ही घर का माहौल भी अच्छा बना रहेगा।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पीले और सफेद होंठ अगर आपके होंठों का रंग पीला या सफेद सा दिखने लगा है तो इसका कारण एनीमिया हो सकता है। शरीर में खून की कमी होने पर होंठ सफेद दिखने लगते हैं। इसके अलावा ब्लड में बिलुरुबिन की मात्रा बढ़ने से होंठ का रंग पीला दिखने लगता है। कई बार वायरल इंफेक्शन के कारण भी होंठ पीले दिखते हैं।
काले होंठ ज्यादातर ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल के कारण होते हैं, इसके अलावा जो लोग सिगरेट पीते हैं उनके होंठों का रंग भी धीरे-धीरे काला दिखने लगता है।
जामुनी होंठ कई बार ज्यादा ठंड लगने पर होंठों का रंग जामुनी हो जाता है। दिल या फेफड़ों से संबंधित कोई बीमारी होने पर भी होंठों का रंग जामुनी दिखने लगता है। इसके अलावा अगर आपका पेट सही नहीं रहता है और पाचन की दिक्कत होती है तो ऐसे में भी होंठों का रंग जामुनी दिखने लगता है।
🫗 आरोग्य संजीवनी 🫖
खांसी के लिए अलसी का उपयोग अलसी के 4 चम्मच बीजों को 2 कप पानी में तब तक उबालें जब तक कि ये आधा न रह जाए। खांसी की समस्या में इस काढ़े को सुबह और शाम में गुनगुना पिएं। इस काढ़े को पीने से खांसी में आराम मिलेगा। स्वाद के लिए आप इस काढ़े में शहद मिला सकते हैं। अगर आपके पास अलसी का पाउडर है तो 1 चम्मच अलसी के पाउडर को 1 गिलास पानी में उबालें और फिर आधा होने के बाद इसे पिएं।
आप अलसी के बीजों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर भी रख सकते हैं और फिर दिनभर इस पानी को पीते रहें। अलसी का पानी पीने से खांसी में आराम मिलता है। इसे पीने से कई और बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।
अलसी के बीजों के आधा चम्मच पाउडर को 1 चम्मच शहद के साथ मिक्स करें और फिर इसका सेवन पानी के साथ करें।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
शनि और सूर्य देव में घोर शत्रुता है। जबकि इन दोनों के बीच बाप-बेटे का रिश्ता है। सूर्य देव शनि के पिता हैं। अब सवाल ये है कि पिता-पुत्र का रिश्ता होते हुए भी इन दोनों के बीच इतनी गहरी दुश्मनी क्यों है? इसका उत्तर हमें पौराणिक कथाओं में मिलता है। ज्योतिष आचार्य श्री गोपी के द्वारा जानिए इसके पीछे की पौराणिक कहानी।
👉🏽 क्यों शनि देव और सूर्य देव शत्रु हैं?
सूर्यदेव का विवाह दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ। बाद में उन दोनों को तीन बच्चों का आशीर्वाद मिला जो मनु, यमराज और यमुना थे। संज्ञा अपने पति सूर्यदेव के तेज से काफी विचलित थीं। एक बार संज्ञा अपने पिता के पास गुहार लेकर पहुंची। उस समय पिता ने उन्हें सूर्य लोक वापस जाने का आदेश देते हुए कहा कि अब उनका घर सूर्य लोक है। यह सुनकर संज्ञा पुनः सूर्यलोक लौट आई। उसी समय संज्ञा ने सूर्य देव से दूर रहने का विचार किया और अपनी हमशक्ल छाया बना ली तथा बच्चों की जिम्मेदारी उन्हें सौंपकर स्वयं तपस्या करने चली गईं। सवर्ण एक छाया थी जिसके कारण उस पर सूर्य के तेज का तनिक भी प्रभाव नहीं पड़ता था। ऐसे में छाया और सूर्य से तीन संतानों का जन्म हुआ जो तपती, भद्रा और शनि हैं।
छाया ने सूर्यदेव को कभी यह पता नहीं चलने दिया कि वह संज्ञा की छाया है। बाद में छाया से शनिदेव का जन्म हुआ। जब शनिदेव का जन्म हुआ तो सूर्यदेव को संदेह हुआ कि शनिदेव उनकी संतान नहीं हैं। तभी शनि की क्रोधपूर्ण दृष्टि उन पर पड़ी और सूर्यदेव भी काले पड़ गये। उस समय, सूर्य देव शापित चेहरा लेकर भगवान शिव के पास पहुंचे। जहां शिवजी ने उन्हें स्थिति से अवगत कराया। तब सूर्य देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने छाया से माफी मांगी। लेकिन इस घटना के बाद शनिदेव और पिता सूर्य के बीच संबंध खराब हो गए।
यदि सूर्य और शनि एक ही घर में हों तो क्या होगा?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि और सूर्य एक ही घर में बैठे हों तो उस व्यक्ति के अपने पिता या पुत्र से संबंध कटु होते हैं। शनिदेव भगवान शिव के भक्त हैं। उन्हें न्याय का देवता कहा जाता है।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।


