हमें अपना यकीन सहाबा की तरह की ज़रूरत है: मौलाना समीद
ब्यूरो प्रमुख: शब्बीर अहमद
बेगमगंज। आज हमारी जिंदगी नबी के अनमोल कहे हुए पर नहीं गुजर रही है, यही कारण है कि मसाइब बारिश के प्यार की तरह आ रहे हैं और हमारी गफलत का यह हाल है कि हम अपनी जिंदगी नबी के कहने पर पहले जिंदगी के हिसाब से गुड़ रही आज भी गुजरात रहे हैं। हमारी ये गफलत हमारी नसलों को बर्बादी की ओर ले जा रही है। आज जरूरत है कि हमारा विश्वास सहाबा की तरह हो इसकी हमें कोशिश करनी चाहिए।
उक्त बात जुमे के खुतबे से पहले मरकज मस्जिद के पेशकार इमाम सामिद खां नदवी ने जमातियों से कहा था। उन्होंने सहाबा के विश्वास के बारे में कई वाक्यों का भी विस्तार से उल्लेख किया है कि जब पैगम्बर इस्लाम के बारे में किसी ने कुछ कहा था तो सहाबा के विश्वास को कर लेते थे कि ऐसा ही होगा। जब पैगम्बर इस्लाम ने कई दिनों से भूख की शिद्दत को नजरंदाज कर रखा था तो सहाबा ने कहा था कि केसर और किसरा के ताजफे सरों पर होंगे तो सहाबा को यकीन हो गया कि ऐसा ही होगा। दुनिया ने आगे देखा कि केसर और किस्सा के ताज सहाबा के कदमों में डले थे। पैगम्बर ने आज के मकबूल के बारे में बताया कि हमारा विश्वास सहाबा की तरह होना चाहिए और उसी तरह हमें अमल करना चाहिए जैसा कि हमें हुक्म दिया गया है। तब तक हम सफल हो जायेंगे। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि नबी के चिन्हित रास्ते पर मुकम्मल तौर पर चढ़ाई शुरू कर दी। ऐसा ना हो कि कहीं देर हो जाए और हम हाथ मलते रह जाएं। उन्होंने लोगों से अपने आमल की देखभाल की
मक्का मस्जिद बलाई टेकरी पर मौलाना नजर मोहम्मद गोंडवी, मदीना मस्जिद पाकिस्तान वाली में मुफ्ती रुस्तम खां नदवी, मस्जिद अमीर दादू खां में जमीयत उलेमा के सदर मौलाना सईद जैद ने 28 सितंबर को पैगंबर इस्लाम की पैदाइश पर मनाए जाने वाले 12 वफात के त्योहार के रिश्ते के बारे में बताया। विस्तार से रोशनी की मूर्तियां और लोगों से पैगम्बरे इस्लाम के नामकरण के तरीकों पर अमल पैरा बाल्य जीवन गुजरातने का आह्वान किया गया। शहर की आने वाली मस्जिदों में भी मजहबी तकरीरें हुई।


