ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 27 सितम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 27 सितम्बर 2023

27 सितम्बर 2023 दिन बुधवार को भादपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “प्रदोष व्रत” की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 10:19 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✏️ तिथि स्वामी – त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव को माना गया है। तथा तिथि में धन के स्वामी कुबेर जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र धनिष्ठा 07:10 AM तक उपरांत शतभिषा 04:29 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी : धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल हैं और देवता वसु हैं। नक्षत्र के अधिष्ठाता देव अष्ट वसवाल हैं और राशि स्वामी शनि हैं।
🔕 योग : धृति योग 07:53 AM तक, उसके बाद शूल योग 03:54 AM तक, उसके बाद गण्ड योग
प्रथम करण : कौलव – 12:03 पी एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 10:18 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:02:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:58:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:24 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:00 ए एम से 06:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:12 पी एम से 03:00 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:12 पी एम से 06:36 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:12 पी एम से 07:24 पी एम
💧 अमृत काल : 10:05 पी एम से 11:31 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:36 ए एम, सितम्बर 28
❄️ रवि योग : 07:10 ए एम से 07:07 पी एम 04:29 ए एम, सितम्बर 28 से 06:12 ए एम, सितम्बर 28
🚗 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को धर्मशास्त्र भेंट करें।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/अन्न प्राशन/सूर्य हस्त नक्षत्र में प्रवेश/ वैश्विक स्तर पर पर्यटन दिवस, तुर्कमेनिस्तान स्वतंत्रता दिवस , महान समाज सुधारक राजा राम मोहन राय पुण्य तिथि, इंटरनेट सर्च इंजन गूगल स्थापना दिवस, स्वतन्त्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल जयन्ती, प्रसिद्ध पार्श्वगायक महेन्द्र कपूर स्मृति दिवस, प्रसिद्ध नर्तक उदय शंकर पुण्य तिथि, पंचक जारी ✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है। 🌷 *_Vastu tips* 🌸
🤷🏻‍♀️ क्या काले गणपति रखना ठीक है?
सफलता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए आप अपने घर में काले गणपति की मूर्ति रख सकते हैं। काले रंग की गणेश जी की मूर्ति उनकी दिव्यता, शक्ति और श्रेष्ठता का प्रतीक है।
गणेश जी का मुख किस दिशा में होना चाहिए?
गणपति की मूर्तियों या तस्वीरों को आदर्श रूप से उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व या पश्चिम दिशा में रखा जाना चाहिए, मुख्यत: उत्तर की ओर।
अगर घर के मुख्य द्वार पर एकदंत गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर हो तो दूसरी तरफ उसी जगह पर गणेश जी की इस प्रकार मूर्ति स्थापित करनी चाहिए कि दोनों गणेश जी की पीठ मिल जाए। ऐसा करने से वास्तु दोषों के असर से होने वाली नकारात्मकता कम होती है।
इसके अलावा, वास्तु शास्त्र के अनुसार सफेद रंग के गणेश जी को स्थापित करने और सिंदूरी रंग के गणेश की पूजा करने से घर से वास्तु दोष दूर होते हैं। गौरतलब है कि गणेश जी की प्रतिमा में उनका पसंदीदा मोदक या लड्डू और उनका वाहन चूहा जरूर होना चाहिए, जिसे वास्तु दोषों को ठीक करने के लिए आदर्श माना जाता है।
ऑफिस में वहां गणेश जी की खड़े मुद्रा में फोटो या मूर्ति रखने से वास्तु दोष दूर होता है।
✳️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
इससे एकाग्रता व निर्णयशक्ति बढ़ेगी, थकान मिटेगी
अगर तुम्हें थकान होती हो तो तुम क्या करो ? दोनों होंठ बंद करो और दाँत खुले रखो जीभ बीच में – न तालू में, न नीचे. बीच में लटकती रहे | 1 मिनट तुम इस प्रकार एकाग्रता का अभ्यास करो तो तुम्हारे शरीर की थकान मिटेगी और मन की चंचलता कम होगी | तुम्हारे निर्णय व ढ़िया होंगे |
💉 आरोग्य संजीवनी 💉
सुबह खाली पेट कितने खजूर खाने चाहिए सुबह खाली पेट आपको 4 खजूर खाना है। आपको करना ये है कि खजूर को दूध में रातभर भिगोकर रख दें। फिर खजूर को निकालकर खा लें और दूध को पी जाएं। ऐसा करना पेट में गैस औ कब्ज की समस्या को भी दूर करने में मदद करेगा। दूसरा,तरीका ये है कि आप दूध में खजूर को उबालकर उसी समय खाएं और गर्म दूध पी लें। ये तरीका भी हड्डियों की सेहत के लिए फायदेमंद है।
सुबह खाली पेट खजूर खाने के फायदे-सुबह खाली पेट खजूर खाने के अन्य फायदे भी हैं। जैसे कि ये पेट की समस्याओं वालों के लिए फायदेमंद है। जैसे कब्ज और स्लो मेटाबोलिज्म। इसके अलावा जिन लोगों की मांसपेशियां कमजोर हैं उनके लिए भी खजूर खाना अच्छा है। साथ ही स्टैमिना बूस्ट करने और शरीर की एनर्जी बढ़ाने के लिए भी खजूर का सेवन कर सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्री गायत्री मंत्र में प्रयुक्त शब्दों का क्या अर्थ है?
गायत्री मंत्र का सामान्य व्यवहृत स्वरूप है
ॐ भूर्भुव: स्व:
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्
अर्थ :
ॐ भूर्भुव: स्व: आह्वान है। मूल मंत्र अगली तीन पंक्तियाँ हैं।
अन्वय क्रम ( सायण भाष्य के अनुसार )
य: न: धिय: प्रचोदयात तत देवस्य सवितु: वरेण्यं भर्ग: धीमहि
शब्दार्थ:
पृथ्वी, अंतरिक्ष औऱ स्वर्ग – त्रिलोक में व्यापक परमेश्वर का आवाहन करते हैं
जो हमारी बुद्धियों को प्रेरित करते हैं उस देवता सविता का वरण करने योग्य पाप नाशक तेज – (हम ) धारण करें या ध्यान करें .
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सायण , 14 वीं सदी में विजय नगर साम्राज्य के अमात्य थे और चारों वेदों पर भाष्य ( जो आज उपलब्ध है ) लिखने वाले पहले व्यक्ति हैं . वे इस अर्थ की विषद व्याख्या करते हुए आगे लिखते हैं .
हम उस प्रकाश का ध्यान करते हैं जो ब्रह्मा के साथ एकाकार है , उसका स्वयं का प्रकाश जो अज्ञानता और उसके दुष्परिणामों को क्षर ( खा लेना या ख़त्म कर देना ) लेने के कारण भर्गस् कहलाती है और जो सबों के द्वारा वरण किया जाता है – जो एक गुण है – परमेश्वर का जो जगत का सृष्टा , पालन करता और प्रेरित (सावित्री ) करने वाला है – समस्त प्राणियों में अपनी अन्तर्यामी शक्ति द्वारा . यह प्रकाश हमारी बुद्धियों , कर्म को उज्जवल करता है , जो समस्त जीवों को उत्पन्न करनेवाला है ( सर्वस्य प्रसवितुर ) जिसके प्रकाश का गोला समस्त पाप को हरने वाला है ( पापानाम तपकम तेजो मंडलम ) . उसकी कृपा से हमें अन्न आदि लक्षण वाले फल आदि प्रसाद स्वरुप मिले ऐसा आधार हो ( तस्य प्रसादाद अन्नादिलक्ष्नम फलं धीमहि तस्य आधारभूत: भमेन;)
शब्दों के अलग अलग अर्थ हैं
ॐ ईश्वर सूचक है ( तस्य वाचकः प्रणवः: योगसूत्र 1.27)
भू – भू लोक या पृथ्वी , र्भुव : भुवन या अंतरिक्ष लोक , स्व: स्वर्गलोक
अन्य शब्दों के अर्थ हैं :
तत् – उस, सवितु :- सवितृ मूल शब्द है ( सू+तृच्) अर्थ – जनक, उत्पादक , फल देने वाला – सूर्य
वरेण्यं: वरण करने योग्य ,भर्ग : पाप को भस्म कर देने वाला तेज ,देवस्य: देवता का ,
धीमहि:धारण करें -यह ध्यान रहे,धिय: : बुद्धि ,समझ (धीः मूल शब्द है) ; य: जो(यद् मूल शब्द है)
न: हमारी, ( अस्मद् मूल शब्द है),, प्रचोदयात् : आगे हाँकना, प्रेरित करना , बलपूर्वक चलाना
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⚜️ इस त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।

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