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सूखती नदियों को बचाने उठी आवाज, अवैध सिंचाई पर कार्रवाई की मांग

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया

उमरियापान  ।  दतला मोरी हिरन नर्मदा संयुक्त समिति ने सूखती छोटी नदियों में बचे जल के अवैध दोहन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है ।  समिति ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ढीमरखेड़ा को ज्ञापन सौंपकर मशीनों के माध्यम से दलहन फसलों की सिंचाई में उपयोग हो रहे नदी के जल पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है  ।समिति ने अपने ज्ञापन में बताया कि वह पिछले 6 वर्षों से नर्मदा एवं सहायक नदियों के पुनर्जीवन के लिए लगातार प्रयासरत है । इसी क्रम में 14 अप्रैल से 25 अप्रैल तक नदी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ।  अभियान के दौरान यह सामने आया कि कुछ लोग मूंग एवं उड़द जैसी फसलें बोकर छोटी नदियों के शेष बचे जल को मशीनों के जरिए खींचकर सिंचाई कर रहे हैं  ।समिति ने चिंता जताई कि भीषण गर्मी में यही सीमित जल स्रोत मूक पशु-पक्षियों और जल जीवों के लिए जीवनदायिनी है, लेकिन अवैध दोहन के कारण वे एक-एक बूंद पानी को तरसने को मजबूर हो रहे हैं । इसे जीव-जंतुओं के जीवन पर सीधा खतरा बताते हुए समिति ने इसे रोकना आवश्यक बताया है ।*ये रखी गई प्रमुख मांगें*नदी से अवैध रूप से पानी खींचने में उपयोग हो रही मशीनों को जब्त कर संबंधित व्यक्तियों पर प्रकरण दर्ज किया जाए ।प्रत्येक ग्राम में 10 महिला एवं 10 पुरुषों की ग्राम रक्षा समिति का पुनर्गठन कर उन्हें अवैध जल उपयोग एवं रेत उत्खनन रोकने का अधिकार दिया जाए तथा पुलिस संरक्षण उपलब्ध कराया जाए।समिति के सक्रिय सदस्य राजेश व्यवहार एवं एडवोकेट अटल बिहारी वाजपेई ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में जल संकट और गहरा सकता है।

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