27 वर्षों से बिना ऑडिट-बिना निविदा प्रकाशन के सिकमी में जा रही मंदिर की भूमि
अधिकारियों की आंखों में बंधी पट्टी, अध्यक्ष को भी नहीं मलतब
ग्राम परसेल में बने राधा कृष्ण और महोदव मंदिर का मामला
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम परसेल में काफी प्राचीन मंदिर राधा कृष्ण और महादेव मंदिर है जो की ग्रामीणों की आस्था का केन्द्र है लेकिन उक्त मंदिर देखरेख के आभाव में और सरकारी अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना कारणों एवं अध्यक्ष कलेक्टर की बेरूखी के कारण उक्त मंदिर जर्जर अवस्था में पहुंच गया है ।
चूंकि उक्त मंदिर से लगी 20 एकड़ शासकीय भूमि है जिसके अध्यक्ष स्वयं कलेक्टर है एवं सरबराहकार की भूमिका में वर्तमान सरपंच वर्ष 1996 में अपने अधिपत्य में लेकर उक्त मंदिर भूमि को सिकमी में देकर उसका उपयोग-उपभोग स्वयं और अपने व्यक्तियों कार्यो में कर रहा है और मंदिर से किसी तरह का कोई लेना-देना नहीं।
उल्लेखनीय है कि मौजा-परसेल, रा.नि.मं-उमरियापान, प.ह.नं.-20 तहसील-ढीमरखेडा, जिला कटनी स्थित खसरा नं. क्रमश:- 232, 532 एवं 555 है जिसका रकवा क्रमश:- 6.07 हे, 0.95 हे. एवं 0.59 हे है। इस प्रकार मंदिर की कुल 08 हे. भूमि जो श्री शंकर जी एवं राधाकृष्ण मंदिर ठाकुर जी मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है। जिसके अध्यक्ष कलेक्टर कटनी है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त मंदिर की जमीन बटाईदार सिकमी में दी जाती है जिससे प्रतिमाह चार लाख रूपये प्राप्त होते है। उक्त राशि कहा जाती, उसका क्या उपयोग, उपभोग होता है ग्रामीणों को इस तरह की जानकारी नहीं दी जाती है और जानकारी मांगने पर परसेल सरंपच के द्वारा कहा जाता है कि सरबराहकार है और मैं स्वतंत्र हूं, किसी को हिसाब नहीं दूंगा।
स्मरण रहे कि उक्त मंदिर की जमीन की देखरेख पहले रामनारायण खरे के द्वारा की जाती है और उनके द्वारा मंदिर की देखरेख तथा समय-समय पर जो भी धार्मिक कार्य होते है उनका आयोजन भी किया जाता है लेकिन उनके निधन के बाद जालसाजी कर वर्तमान सरपंच राजेन्द्र खरे पिता स्व. ब्रजबिहारी खरे सरबराहकार के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया । यही नहीं सरबराहकार के द्वारा वर्ष 1996 से 2023 तक लगभग एक करोड़ की राशि का गबन भी किया गया है। इस संबंध में सिकमी के रूप में प्राप्त हुई राशि धार्मिक कार्य में खर्च न होकर व्यक्तिगत रूप से खर्च की गई है और मंदिर की जमीन से अपने एशो-अराम किये जा रहे है।
नियमों का उड़ाया जा रहा माखौल
लोक न्याय अधिनियम 1951 में वर्णित विधि के अनुसार मंदिर की जमीनों के संबंध में यह प्रावधान वर्णित किये गये है कि प्रत्येक वर्ष दैनिक समाचार पत्र में सिकमी में दी जा रही भूमि के संबंध में निविदा का प्रकाशन करवाया जायेगा, साथ ही प्रत्येक वर्ष मंदिर की आय के संबंध में आडिट अध्यक्ष एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में करवाया जायेगा लेकिन नियमों को रौंदकर सरबराहकार राजेन्द्र खरे के द्वारा मंदिर की जमीन की संपूर्ण आय अर्थात सिकमी में दी जा रही भूमि से प्राप्त राशि अपने उपयोग-उपभोग में ली जा रही है, जिससे मंदिर के नाम पर दर्ज भूमि का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।
कलेक्टर का नाम अध्यक्ष के रूप में है दर्ज
मंदिर की उक्त भूमि में अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर कटनी का नाम दर्ज है और सरबराहकार के रूप में वर्तमान सरपंच राजेन्द्र खरे का नाम दर्ज है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कई शिकायतें अधिकारियों को सौँपकर मांग की कि मंदिर की 20 एकड़ जमीन है जिस कारण से एक ट्रस्ट का गठन कर दिया जाये जिसमें गांव के स्वच्छ छवि वालों व्यक्तियों को शामिल किया जाये जिससे मंदिर की जमीन का उपयोग-उपभोग मंदिर के कार्यों में हो सके लेकिन ग्रामीणों की बात को किसी अधिकारी के द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि मंदिर की जमीन में अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर का नाम दर्ज है जिस कारण से उनका यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि मंदिर की जमीन और मंदिर की देखरेख आदि व्यवस्था की जानकारी समय-समय पर लेते रहे, साथ ही साथ सरबराहकार की भूमिका में कार्य करने वाले व्यक्ति से इस संबंध में संपूर्ण हिसाब किसाब लिया जाना चाहिये लेकिन गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण सरबराहकार के द्वारा उक्त भूमि की संपूर्ण रकम अपने उपयोग-उपभोग में लगाई जा रही है और मंदिर जर्जर हालत में पहुंच गया है। मंदिर के पुजारी को मात्र 400 रूपये वेतन के रूप में दिये जा रहे है जिस कारण से वे भीख मांगकर एवं बीड़ी बनाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।



