आज का पंचांग आज का पंचांग शनिवार, 20 जनवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 20 जनवरी 2024
20 जनवरी 2024 दिन शनिवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। आज साम्ब दशमी है। आज सर्वार्थऽमृतसिद्धियोग एवं रवियोग भी है। आज की इस दशमी को सूर्य दशमी के रूप में उड़ीसा में मनाया जाता है। आप सभी सनातनियों को “सूर्य पुजा के इस पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार पौष माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 07:26 PM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी : दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है। यह सौम्य अर्थात शांत तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 03:09 AM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं।
🔔 योग – शुभ योग 11:06 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 07:35 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 07:26 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:41:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:19:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:11 पी एम से 12:53 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:18 पी एम से 03:00 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:47 पी एम से 06:14 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:50 पी एम से 07:10 पी एम
💧 अमृत काल : 12:43 ए एम, जनवरी 21 से 02:20 ए एम, जनवरी 21
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, जनवरी 21 से 12:59 ए एम, जनवरी 21
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:09 ए एम, जनवरी 21 से 07:14 ए एम, जनवरी 21
💦 अमृत सिद्धि योग : 03:09 ए एम, जनवरी 21 से 07:14 ए एम, जनवरी 21
❄️ रवि योग : 07:14 ए एम से 03:09 ए एम, जनवरी 21
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-ज़रूरतमन्दों को काला कम्बल दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थऽमृतसिद्धियोग/ साम्ब दशमी/ सर्वार्थसिद्धि योग/ शांबदशमी (उड़ीसा)/ सूर्य पुजा (उड़ीसा)/ पेंगुइन जागरूकता दिवस, भारतीय अभिनेत्री परवीन बॉबी पुण्य तिथि, स्वतंत्रता सेनानी तेज बहादुर सप्रू शहीद दिवस, भारतीय उद्योगपति सर रतनजी जमशेदजी टाटा जन्म दिवस, भारतीय राज्य मेघालय स्थापना दिवस, परमवीर चक्र सम्मानित सैनिक लांस नायक करम सिंह स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय)।
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🛕 Vastu Tips 🏚️
कपूर से कैसे करें घर का वास्तुदोष दूर? जानें सही तरीका वास्तुशास्त्र हर किसी के जीवन में अहम भूमिका अदा करता है इसमें व्यक्ति के जीवन से जुड़ी हर समस्या का समाधान बताया गया है वास्तुशास्त्र में कपूर को लाभकारी माना गया है इसके कुछ विशेष उपाय का घर का वास्तुदोष दूर करने में मदद करते हैं जिससे घर की नकारात्मकता दूर हो जाती है और चारों ओर सकारात्मकता का संचार होने लगता है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा घर के वास्तुदोष को दूर करने के लिए कपूर के आसान उपाय बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
कपूर से करें वास्तुदोष दूर— अगर आपके घर में कोई वास्तुदोष है जिसके कारण आर्थिक परेशानी, गृहक्लेश या धन हानि का सामना करना पड़ रहा है तो ऐसे में आप कपूर के उपायों को आजमा सकते हैं। वास्तुदोष दूर करने के लिए कपूर के चार से पांच टुकड़े लेकर इसे घी में डुबोकर मिट्टी के दीपक में जलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से लाभ मिलता है
इसके अलावा आप घर के हर कोने में कपूर की छोटी छोटी टिक्की रख सकते हैं और उन्हें तब तक रखे रहने दें जब तक वह खुद से खत्म नहीं हो जाती हैं। अगर आपके घर में कपूर की टिक्की खत्म होने लगे तो समझ लें कि घर का वास्तुदोष दूर हो रहा है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
भूखे रहने के संबंधित स्वास्थ्य लाभों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
वजन कमी: भूखे रहने से वजन कम हो सकता है, जिससे ओबेसिटी और उससे जुड़ी समस्याएं कम हो सकती हैं।
इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार: भूखे रहने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार हो सकता है, जिससे डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है।
हृदय स्वास्थ्य: भूखे रहने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है और कुछ कार्डिवेस्क्युलर रोगों का खतरा कम हो सकता है।
आंतरीय शोधन: भूखे रहने से शरीर में आंतरीय शोधन हो सकता है, जिससे कई प्रकार के विषैले तत्वों का शरीर से बाहर निकाला जा सकता है।
माइंडफुल ईटिंग: भूखे रहना आत्मा समर्थन और माइंडफुल ईटिंग की अनुभूति करा सकता है, जिससे आप अपने भोजन को बेहतरीन तरीके से स्वीकार कर सकते हैं।
🍹 आरोग्य संजीवनी 🍯
मसूड़ों से खून आना: कई बार जल्दबाजी में टूथपिक के इस्तेमाल से मसूड़ों पर चोट लग जाती है जिस वजह से वहां से खून निकलने लगता है। साथ ही इसके ज़्यादा इस्तेमाल से भी मसूड़ों से खून आने लगता है। जिससे आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पहुंच सकता है दांतों की जड़ों को नुकसान: टूथपिक के लगातार और अधिक इस्तेमाल से दांतों की जड़ें कमजोर हो सकती है। इसलिए अधिक टूथपिक का यूज करने से बचें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हिंदू धर्म और सनातन धर्म में क्या फर्क है? सर्वप्रथम एक आदि सनातन पंथ (धर्म) था। मानव समाज शास्त्रोक्त साधना करता था।
वह सत्ययुग का समय था। पाँचों वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद तथा सूक्ष्मवेद) शास्त्र थे । चार वेद ब्रह्मा जी को मिले, उनमें सम्पूर्ण अध्यात्म ज्ञान नहीं था। परम अक्षर ब्रह्म सत्ययुग में लीला करने के लिए शिशु रूप धारण करके आए। बड़े होकर सूक्ष्मवेद का प्रचार किया तब तक उस समय के ऋषियों ने चारों वेदों वाला ज्ञान पढ़ लिया था। सूक्ष्मवेद वाला कुछ ज्ञान चारों वेदों में न होने के कारण उसको गलत माना। इसलिए सूक्ष्मवेद को धीरे-धीरे छोड़ दिया, परंतु लगभग एक लाख वर्ष तक सत्ययुग में शास्त्रोक्त भक्ति की गई। इसके पश्चात् शास्त्रविधि त्यागकर मनमाना आचरण प्रारंभ हो गया। गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में कहा है कि जो व्यक्ति शास्त्रविधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है, उसको न सिद्धि प्राप्त होती है, न उसकी गति होती है, न उसे सुख मिलता है। (इन तीन वस्तुओं के लिए ही भक्ति की जाती है।)
वर्तमान में सनातन धर्म का नाम वैदिक धर्म व हिंदू धर्म भी प्रसिद्ध है।। परंतु अब जो पहले सनातन धर्म में साधना हुआ करती थी अब धीरे-धीरे लोग उसको भूलकर शास्त्र विरुद्ध भक्ति साधना कर रहे हैं। इसके विषय में संत गरीबदास जी ने बताया है:-
संत गरीबदास जी ने सूक्ष्मवेद में कहा है
आदि सनातन पंथ हमारा। जानत नहीं इसे संसारा ।। पदर्शन सब खट-पट होई हमरा पंथ ना पावे कोई।। इन पथों से वह पंथ अलहदा पंथों बीच सब ज्ञान है यहदा ।।
हमारा आदि सनातन पंथ है जिसको संसार के व्यक्ति नहीं जानते वह आदि सनातन पंथ अर्थात् सब पंथों से भिन्न है। गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में कहा है कि (पुरा) सृष्टि की आदि में जिस (ब्रह्मणः) सच्चिदानंद घन ब्रह्म की साधना तीन नामों ॐ तत् सत् वाली की जाती थी जो तीन विधि से स्मरण किया जाता है सब ब्राह्मण यानि साधक उसी वेद (जिसमें यह तीन नाम का मंत्र लिखा है) के आधार से यज्ञ साधना करते थे।
आज फिर भारत में सनातन धर्म का पुनरुत्थान हो रहा है। जिस भक्ति साधना को करने से फिर लोगों को वैसे ही सुख का अनुभव हो रहा हैं जो पहले सतयुग के समय हुआ करता था। आप भी अपना मनुष्य जन्म न गवाएं और फिर सनातन धर्म वाली भक्ति साधना करें।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

