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Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501✦••• जय श्री हरि •••✦🧾 आज का पंचाग 🧾मंगलवार 28 अप्रैल 2026हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी*🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – बैशाख मास🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष📅 तिथि – मंगलवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 06:52 PM तक उपरांत त्रयोदशी✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।💫 नक्षत्र- नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 10:36 PM तक उपरांत हस्त🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी ग्रह सूर्य हैं। इस नक्षत्र के देवता अर्यमा हैं⚜️ योग – व्याघात योग 09:04 PM तक, उसके बाद हर्षण योग⚡ प्रथम करण : बव 06:31 AM तक✨ द्वितीय करण : बालव 06:52 PM तक, बाद कौलव🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:34:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:33:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:17 ए एम से 05:00 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:38 ए एम से 05:43 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:52 ए एम से 12:45 पी एम✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:31 पी एम से 03:23 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:53 पी एम से 07:15 पी एम🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:54 पी एम से 07:59 पी एम💧 अमृत काल : दोपहर 03:01 पी एम से 04:42 पी एम🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:57 पी एम से 12:40 ए एम, अप्रैल 29🌸 त्रिपुष्कर योग : प्रातः 05:43 ए एम से 06:51 पी एम🚓 यात्रा शकुन- मंगलवार को दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मोहिनी एकादशी पारण/ परशुराम द्वादशी/ भौम प्रदोष व्रत/ त्रिपुष्कर योग/ भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयन्ती, महान मराठा पेशवा बाजीराव प्रथम स्मृति दिवस, तानाशाह सद्दाम हुसैन जन्म दिवस, राष्ट्रीय सुपरहीरो दिवस, व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य पेशेवर दिवस, परोपकार दिवस, स्कूल बस चालक दिवस, किस योर मेट डे, महाराज हिरदेशाह लोधी बलिदान दिवस, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन दिवस, युवा मंत्री अनुप्रिया पटेल जन्म दिवस, भारतीय गेंदबाज रमाकांत देसाई स्मृति दिवस, [विश्व कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य दिवस]✍🏼 तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।_🗼 Vastu tips 🛕रोटियों की संख्या का रखें ध्यान भोजन परोसते समय सलीके का ध्यान रखना भी जरूरी है। थाली में सबसे पहले चावल और रोटी रखना शुभ माना जाता है, क्योंकि इन्हें समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। रोटियों की संख्या भी मायने रखती है। वास्तु के अनुसार एक साथ 1, 2 या 4 रोटियां परोसना अच्छा माना जाता है, जबकि 3 रोटियां परोसने से बचना चाहिए।*नमक और अचार रखने के नियम खाने की थाली में नमक और अचार रखने का तरीका भी महत्वपूर्ण होता है। अगर आप अतिरिक्त नमक लेते हैं, तो उसे थाली के दाईं ओर रखना चाहिए। वहीं, अचार को बाईं तरफ रखना शुभ माना गया है। भोजन से जुड़े ये आसान वास्तु नियम अपनाकर आप न सिर्फ अपनी दिनचर्या सुधार सकते हैं, बल्कि घर के माहौल को भी सुखद और एनर्जेटिक बना सकते हैं। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ *यह लू में इतना फायदेमंद क्यों है, इसके कुछ मुख्य कारण यहाँ दिए गए हैं:*इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन: लू लगने पर शरीर से पसीने के जरिए नमक और जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं। आम पना शरीर में सोडियम और पोटैशियम के लेवल को फिर से संतुलित करने में मदद करता है। *शरीर को ठंडक देना: कच्चे आम की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के आंतरिक तापमान को कम करने में बहुत प्रभावी है।*हाइड्रेशन यह शरीर में पानी की कमी को तुरंत पूरा करता है और कमजोरी को दूर कर ताजगी देता है। *पाचन में सहायक इसमें जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाया जाता है, जो गर्मी के कारण बिगड़े हुए पाचन और पेट की जलन को ठीक करते हैं।*आम पना बनाने और लेने का सही तरीका *कच्चे आम (कैरी) को उबालें या भूनें।*उसका गूदा निकालकर उसमें ठंडा पानी, भुना जीरा पाउडर, काला नमक और थोड़ी चीनी या गुड़ मिलाएं। *इसमें पुदीने की पत्तियां पीसकर डालना और भी ज्यादा फायदेमंद होता है।*एक जरूरी बात अगर किसी को बहुत तेज बुखार है, बेहोशी जैसा महसूस हो रहा है या लगातार उल्टियां हो रही हैं, तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। *क्या आप रायपुर की गर्मी से बचने के लिए इसे घर पर बनाने की सोच रहे हैं या बाजार से लाने का प्लान है🍋‍🟩 *आरोग्य संजीवनी* 🍉”बुद्धिवर्धक वचा”इस जड़ी बूटी के नाम की उत्पत्ति संस्कृत की धातु (शब्द) ‘ वच’ से हुई है जिसका अर्थ है बोलना।*बच्चो के हकलाने तुतलाते आदि समस्याओं के लिए यह चमत्कारी औषधि या रामबाण दवा है। *ये तासीर में गर्म, स्वाद में कटु तिक्त, गुणों में तीक्ष्ण, लघु होती है। इसका बॉटनिकल नाम है।*यूं तो इसके अनेक औषधीय प्रयोग होते हैं पर बुद्धि वर्धन के लिए इसका प्रयोग कुमार रसायन नामक बच्चों की आयुर्वेदिक दवाई में किया जाता है। जो बच्चे जन्म के बाद जल्दी नहीं बोलते या हकलाते हैं उनमें वाक् शक्ति को बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग करते हैं। *यह मेध्य द्रव्य है। इसका प्रयोग किसी भी उम्र में किया जा सकता है। यह आसानी से बाज़ार में पंसारी के पास मिल जाता है।*प्रयोग करने के लिए इसे घर पर ही पीसा जा सकता है। उसके बाद एक चुटकी पाउडर दूध में डालकर सुबह या शाम को भी लिया जाता है। इसका सेवन पूरी तरह से सुरक्षित है। गौदूध से सेवन विशेष लाभकारी है। *गौ दूध के अलावा आप इस चूर्ण को (आधा ग्राम) शहद के साथ सुबह शाम दे सकते है बच्चो को तुतलाने पर।📖 गुरु भक्ति योग 🕯️कुलदेवता और इष्टदेव:जड़ और पुष्प का संबंध अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि जब हमारे घर में ‘कुलदेवता’ की पूजा होती ही है, तो फिर ‘इष्टदेव’ की आवश्यकता क्यों? और इन दोनों में अंतर क्या है?शास्त्रों में एक सुंदर बात कही गई है “जन्मना कुलदेवता, सद्भावना इष्टदेवता।कुलस्य रक्षकं प्रोक्तं, इष्टं मोक्षप्रदायकम्॥”* इसे एक बहुत ही सरल और व्यवहारिक उदाहरण से समझते हैं:**विभीषण का कुल ‘राक्षस’ था (जहाँ के नियम और कुल-परंपराएँ अलग थीं), लेकिन उनके इष्टदेव ‘श्री राम’ (विष्णु स्वरूप) थे। उन्होंने अपनी जड़ों (कुल) को नहीं नकारा, बल्कि अपने इष्ट के प्रति समर्पण से अपने पूरे वंश का उद्धार कर दिया। *कुलदेवता वह देव स्वरूप होते हैं जो किसी विशेष वंश या कुल के रक्षक माने जाते हैं।*आधार: इनका संबंध आपके जन्म और रक्त (वंश) से होता है। यह परंपरा से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे होते हैं। *अनिवार्यता: कुलदेवता को बदलना संभव नहीं होता। जिस कुल में आपने जन्म लिया है, उस कुल के पूर्वजों द्वारा पूजित देव ही आपके कुलदेवता रहेंगे।*उद्देश्य: इनका पूजन वंश की वृद्धि, कुल की रक्षा और पारिवारिक परंपराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए किया जाता है। विवाह, मुंडन या किसी भी मांगलिक कार्य में सबसे पहले कुलदेवता को याद करना अनिवार्य होता है। *इष्टदेव वह देव स्वरूप होते हैं जिनके प्रति आपकी व्यक्तिगत रुचि, श्रद्धा या मानसिक झुकाव होता है।*आधार: इनका चुनाव आप स्वयं अपनी भावना या कुंडली के ग्रहों की स्थिति (विशेषकर पंचम भाव) के आधार पर करते हैं। *स्वतंत्रता: एक ही परिवार के विभिन्न सदस्यों के इष्टदेव अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे, पिता के इष्टदेव भगवान शिव हो सकते हैं और पुत्र के इष्टदेव हनुमान जी।उद्देश्य: इष्टदेव का पूजन आत्मिक शांति, व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। साधना के मार्ग में इष्टदेव का मार्गदर्शन सर्वोपरि माना जाता है।कुलदेवता सामूहिक होती है, इष्टदेव व्यक्तिगत* कैसे जानें कि आपके इष्टदेव कौन हैं? *आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, आपकी कुंडली का ‘पंचम भाव’ आपके

*_मेष और वृश्चिक राशि: हनुमान जी या भगवान कार्तिकेय। *वृषभ और तुला राशि: माता दुर्गा या लक्ष्मी जी।

*_मिथुन और कन्या राशि: भगवान गणेश या विष्णु जी

*_कर्क राशि: भगवान शिव या गौरी माता।

  • *_सिंह राशि: भगवान सूर्य या गायत्री माता।
  • *_धनु और मीन राशि: भगवान विष्णु या श्री दक्षिणामूर्ति (गुरु)।
  • *मकर और कुंभ राशि: भगवान शनिदेव या हनुमान जी। 👉🏼 *विशेष बात: याद रखें, यदि कुल की जड़ें (कुलदेवता) मजबूत होंगी, तभी इष्टदेव की कृपा का फल भी प्राप्त होगा। कुलदेवता से हमें ‘अस्तित्व’ मिलता है और इष्टदेव से ‘सिद्धि’।
    *_क्या आपको अपने कुलदेवता और इष्टदेव के बारे में पता है? यदि नहीं तो पता कीजिए,
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    ⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।

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