ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग शुक्रवार, 26 जनवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🇮🇳 आज का पंचाग 🇮🇳
शुक्रवार 26 जनवरी 2024

🚩 26 जनवरी 2024 दिन शुक्रवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था और तब से हम सब इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। आज ही के दिन हमारे भारतवर्ष में आदरणीय अम्बेडकर महोदय द्वारा निर्मित अथवा संसोधित संविधान लागु हुआ था। आज भारतीय गणतन्त्र दिवस है। आज देश की राजधानी दिल्ली में सम्माननीय प्रधानमन्त्री महोदय द्वारा ध्वजोतोलन, राष्ट्रगान एवं सैन्यशक्ति प्रदर्शन आदि जैसे कार्यक्रम भी सम्पन्न होंगे। आज शुक्र एवं नन्दा के संयोग से सिद्धयोग निर्मित हो रहा है। माघ मास में मूली नहीं खाना चाहिए। आप समस्त भारतीयों को “भारतीय गणतन्त्र दिवस” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मासारंभ
🌕 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार माघ माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 01:20 AM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 10:28 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी : पुष्य नक्षत्र के देवता गुरु बृहस्पति हैं। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि और राशि कर्क है।
🔕 योग – प्रीति योग 07:42 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
प्रथम करण : बालव – 12:18 पी एम तक
द्वितीय करण – कौलव – 01:19 ए एम, जनवरी 27 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:38:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:22:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:26 ए एम से 06:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:53 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:12 पी एम से 12:55 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:21 पी एम से 03:04 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:52 पी एम से 06:19 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:55 पी एम से 07:15 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जनवरी 27 से 01:00 ए एम, जनवरी 27
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारंभ/ माघ मासारंभ/ गणतंत्र दिवस/ संविधान दिवस/ अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस, भारतीय दार्शनिकों में क्रान्तिकारी मानवेन्द्र नाथ राय शहीद दिवस, स्वतंत्रता सेनानी सत्यवती देवी जयन्ती, हूमायु, मुगल बादशाह स्मृति दिवस, भारतीय क्रिकेटर अशोक मल्होत्रा जन्म दिवस, जम्मू और कश्मीर स्थापना दिवस
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🛕 Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा के विपरित उत्तर दिशा में सिर करके सोना अच्छा नहीं होता। दरअसल पृथ्वी में चुम्बकीय शक्ति होती है, इसीलिए दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर लगातार चुंबकीय धारा प्रवाहित होती रहती हैं।
वास्तु के मुताबिक जब हम दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोते हैं तो यह ऊर्जा हमारे सिर की ओर से प्रवेश करती है और पैरों की ओर से बाहर निकल जाती है। इस तरह सुबह जगने पर व्यक्ति को ताजगी और स्फूर्ति महसूस होती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने पर चुम्बकीय धारा पैरों से प्रवेश करके सिर तक पहुंचती है, जिसकी वजह से मानसिक तनाव बढ़ता है और सुबह जागने पर मन भारी रहता हैं ।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दूध में गुड़ मिलाकर पीने से शरीर की कमजोरी दूर होने के साथ थकान से भी राहत मिलती है। दूध में मौजूद कैल्शियम और गुड़ में मौजूद आयरन शरीर की थकान और कमजोरी को आसानी से दूर करता है। अगर आप भी बाहर से आने पर थक कर आए हैं, तो रात को 1 गिलास गुड़ वाला दूध पीने से पूरे दिन की थकान दूर होगी।
हड्डियों को मजबूत बनाएं दूध में गुड़ मिलाकर पीने से हड्डियों में होने वाला दर्द की समस्या दूर होती है। दूध में मौजूद कैल्शियम हड्डियों में होने वाली बीमारियों को आसानी से दूर करता हैं। वहीं गुड़ में मौजूद फास्फोरस भी हड्डियों की कमजोरी को दूर करके उन्हें मजबूत बनाता हैं।
एनिमिया की समस्या से राहत गुड़ में मौजूद आयरन खून को बढ़ाने के साथ एनिमिया की समस्या से भी राहत देता है। दूध में गुड़ मिलाकर पीने से हीमोग्लोबिन बढाने में मदद मिलती है और शरीर हेल्दी रहता है। यह दूध शरीर में होने वाले दर्द को भी आसानी से कम करता है।
अनिद्रा की समस्या दूर होती है दूध में गुड़ मिलाकर पीने से तनाव कम होने के साथ शरीर को ताकत मिलती है। इस दूध को पीने से खून साफ होता है और शरीर को भी आराम मिलता है। जिन लोगों को नींद न आने की समस्या होती है। उन्हें रात को सोने से पहले हल्के गुनगुने दूध में गुड़ मिलाकर पीना चाहिए
🍷 आरोग्य संजीवनी 🥃
जमीन पर सोने के फायदे रीढ़ की हड्डी रहेगी स्वस्थ- जमीन पर सोने से रीढ़ की हड्डी अकड़ती नहीं है। जब आप गद्देदार बिस्तर पर सोते हैं तो रीढ़ की हड्डी अकड़ जाती है और इससे दिमाग पर सीधा असर पड़ता है। रीढ़ की हड्डी सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुडती है। जिसका सीधा ब्रेन से कनेक्शन होता है।
मांसपेशियों को मिलता है आराम- जमीन पर सोने से कंधे और कूल्हे की मांसपेशियों को आराम मिलता है। इन्हीं मांसपेशियों की वजह से पीठ दर्द, कंधा दर्द, गर्दन दर्द की समस्या होती है।
पीठ दर्द में राहत- जो लोग जमीन पर सोते हैं उन्हें पीठ के दर्द में आराम मिलता है। जमीन पर सोने से पोश्चर ठीक होता है और कमर दर्क कम होता है।
शरीर का तापमान कम होगा- जमीन पर सोने से शरीर का तापमान कम हो जाता है। बेड पर सोने से शरीर की गर्मी बढ़ जाती है जिससे बॉडी टेंपरेचर भी बढ़ने लगता है। जमीन पर सोने से शरीर का टेंपरेचर अच्छा रहता है।
📘 गुरु भक्ति योग 🕯️
कर्म-सिद्धांत — जीव के द्वारा मनुष्य योनि (जीव की कर्म-योनि) में की गयी क्रियाएँ उभय-रूप होती हैं, अर्थात् उनसे दो प्रकार के फल मिलते हैं — पुण्य फल और पाप फल या दोनों का मिश्रित फल।
पुण्य फल अपेक्षाकृत सुख दायक होते हैं और पाप फल दुःख दायक होते हैं। दोनों प्रकार के कर्म-फलों को अलग अलग भोगना पड़ता है। वे एक-दूसरे को निरस्त नहीं करते।
कर्म-फलों को भोगने के लिए जीव को पाप कर्मों के एवज़ में नरक योनियां, पुण्यकर्मों के एवज़ में देवता (स्वर्ग)-योनियां और भोग-विलास-ख्याति आदि की अतृप्त इच्छाओं के एवज़ में मनुष्य योनियां मिलती हैं।
नरक योनियों को त्रियंच की योनियां भी कहा जाता है, जिसमें मनुष्य योनि से निम्नतर योनियां अर्थात् जानवरों और कीड़े-मकोड़ों आदि की योनियां शामिल हैं।
देवता-योनियां अपेक्षाकृत सुखदायी योनियां होती हैं। उनका स्पष्ट विवरण प्राप्त नहीं है। कहीं कहीं यह कहा जाता है कि मनुष्य योनि में ही सुख-साधन सम्पन्न मनुष्य ही देवता-योनि है।
नरक योनियों और देवता योनियों में कर्म-फल जैसे-जैसे भोगे जाते हैं, उनका क्षालन होता जाता है। इन योनियों में नए कर्म-फल नहीं जुड़ते।
परंतु मनुष्य योनि भोग-योनि होने के साथ-साथ जीव की कर्म-योनि भी होती है। उसमें, जैसा कि ऊपर कहा गया है, पिछले कर्मफलों के क्षालन के साथ-साथ, हर क्रिया के नए कर्म-फल जुड़ते जाते हैं।
मनुष्य योनि में नए कर्म-फल न जुड़ें उसके लिए ब्रह्मविद्या शास्त्र में और श्रीमद् भगवद्गीता में जो उपाय बताया गया है वह यह है कि मनुष्य योनि में आया हुआ जीव जो भी कर्म करे वह निष्काम (निरासक्त) भाव से करे, क्योंकि निष्काम भाव से किए गए कर्मों के कोई पाप या पुण्य फल नहीं होते।
निष्काम भाव से किए गए कर्मों में वे सभी कर्तव्य कर्म आते हैं जो मनुष्य अपने सामान्य जीवन व्यापन के लिए और अपने आचार-व्यवहार के तौर पर परमेश्वर के वचनों के अनुसार बिना किसी लाभ हानि की इच्छा से स्वयं को परमेश्वर का समर्पित सेवक मानते हुए करता है और किसी अन्य प्राणी को किसी भी प्रकार का शारीरिक, भावनात्मक या मानसिक कष्ट पहुँचाने का कारण नहीं बनता।
इस प्रकार मनुष्य योनि में आया जीव अपने प्रारब्ध में आये सुख दुःख भोग कर अपने पिछले कर्मफलों का क्षालन कर सकता है और अपने सभी कार्य निष्काम (निरासक्त) भाव से करते हुए नए कर्मफल जोड़ने से बच सकता है और कर्मफल शून्य होकर परमेश्वर के मोक्ष (शाश्वत नित्य-नूतन परमानंद) का सुपात्र बन सकता है। जीव ऐसी सुपात्रता अनेक जन्मों में अर्जित ज्ञान और संस्कारों के द्वारा ही प्राप्त कर सकता है।
अतः मनुष्य योनि जीव के लिए मोक्ष प्राप्त करने का सौभाग्य से प्राप्त स्वर्णिम अवसर होता है। परंतु विडम्बना यह है कि जो जीव अब तक इस संसार में किसी न किसी योनि में विचरण कर रहा है वह उसे अब तक प्राप्त हुईं मनुष्य-योनियों को वह व्यर्थ गँवाता आया है। क्योंकि अनादि काल से उसके स्वरूप पर लगी अविद्या (अज्ञान) के कारण उपजे अहम् भाव और अन्यथा ज्ञान के कारण उसकी सांसारिक आसक्ति और इच्छाएँ पूर्ण-रूप से ख़त्म नहीं हुई हैं।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।

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