आज का पंचांग आज का पंचांग रविवार, 04 फरवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 04 फरवरी 2024
04 फरवरी 2024 दिन रविवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज रात्री को भद्रा लग रहा है, और वो भद्रा भी स्वर्ग में है, इसलिए भद्रा का कोई दोष नहीं होगा। आज यायि (मुद्दई) जयद् योग भी है।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथी – रविवार माघ माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 05:49 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी : नवमी तिथि की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 07:20 AM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाख नक्षत्र का स्वामी गुरू है। विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं।
🔕 योग – वृद्धि योग 12:12 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : गर – 05:49 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 05:44 ए एम, फरवरी 05 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:33:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:27:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:23 ए एम से 06:16 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:49 ए एम से 07:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:24 पी एम से 03:08 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:00 पी एम से 06:26 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:02 पी एम से 07:21 पी एम
💧 अमृत काल : 09:15 पी एम से 10:54 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 05 से 01:01 ए एम, फरवरी 05
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पीली ध्वजा चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/मूल प्रारंभ/वाहन क्रय, विश्व कैंसर दिवस, अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर जन्मोत्सव, मानव भ्रातृत्व का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, श्रीलंका स्वतंत्रता दिवस, अभिनेता भगवान दादा स्मृति दिवस, सशस्त्र संघर्ष दिवस (अंगोला), भारत रत्न सम्मानित, गायक पंडित भीमसेन जोशी जन्म दिवस, सोशल मीडिया फेसबुक दिवस, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह), चौरी-चौरा दिवस (1921)
✍🏼 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🏝️ Vastu tips 🏜️
ईशानोन्मुख भवन की उत्तरी दिशा में ऊंची इमारत या भवन हो तो इस ऊंची इमारत और भवन के बीच एक मार्ग / पतली गैलरी बना देना चाहिए अर्थात् कुछ खाली जगह छोड़ दें। इससे ऊंची इमारत के कारण उत्पन्न दोष का स्वतः निवारण हो जाएगा।
अगर ईशान कोण में रसोई घर हो तो उस रसोई घर के अंदर गैस चूल्हे को आग्नेय कोण में रख दें और रसोई के ईशान कोण में साफ बर्तन में जल भरकर रखें ।
अगर ईशान कोण में शौचालय हो तो उस शौचालय का प्रयोग यथासंभव बंद कर दें अथवा शौचालय की बाहरी दीवार पर एक बड़ा आदमकद शीशा या शिकार करता हुआ शेर का चित्र लगाएं। ईशान में शौचालय होने में उपरोक्त में कोई भी उपाय अवश्य ही करें क्योंकि ईशान कोण में शौचालय होना अत्यंत अशुभ होता है।
ईशान क्षेत्र में पेयजल का कोई स्रोत/नल जरूर होना चाहिए है। ईशान में एक चीनी मिट्टी के एक पात्र में जल में गुलदस्ता या एक जल के पात्र में फूलों की पंखुड़ियां रखें और इस जल और फूलों को नित्य बदलते रहें।
ईशान दिशा के भवन में शुभ फलों की प्राप्ति हेतु विधिपूर्वक बृहस्पति यंत्र की स्थापना करें।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
समुद्र शास्त्र के अनुसार काले रंग के लोगो कि सबसे बड़ी खासियत यह है कि सामान्यता यह पूर्ण स्वस्थ, दृढ़ परिश्रमी एवं साहसी होते है। यह कोई भी बड़ी से बड़ी चुनौती को स्वीकार कर लेते है लेकिन इनकी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह तमोगुणी एवं क्रोधी होते हैं। यह लोगो पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते है। इनका बौद्धिक विकास कम होता है, यह शीघ्र उत्तेजित हो जाते है। ये हिंसक, कामी, हठी एवं आक्रामक तथा अपराधी प्रवृत्ति के होते हैं।ये सभी सामाजिक परंपराओं, संस्कारों एवं मर्यादाओं से दूर होते है। इनमें बदला लेने की भावना बहुत ज्यादा होती है। ऐसे लोगो को चाहिए कि वह क्रोध कम करेँ, रिश्तोँ को महत्व दे, अपने मस्तिष्क पर काबू रखें, ईश्वर की भक्ति एवं अपने माता पिता या किसी भी बड़े बुजुर्गों की सेवा अवश्य ही करे।
एकदम काले रंग की स्त्रियों के संबंध में समुद्र शास्त्र में वर्णन है कि अत्यधिक काले रंग के नेत्र, त्वचा, रोम, वाली स्त्रियॉं निम्न वर्ग में आती है। इस वर्ण की स्त्रियां स्वामी भक्त अपने बात की पक्की एवं निर्भिक होती है।यह रति में पूर्ण सहयोग और आनन्द देती हैं।यह परम विश्वसनीय, उत्तम मार्गदर्शिका और प्यार में बलिदान देने वाली होती हैं। इनके प्यार में धूप सी गर्मी व चंद्रमा सी शीतलता पाई जाती है। यह अपने प्रेम में अपने प्राण तक निछावर कर देती है ।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
गले में खराश होने पर दर्द, खुजली या जलन होती है। वैसे तो ये एक आम समस्या है लेकिन इसके होने की कई वजह हो सकती हैं। ज्यादातर मामलों में गले की खराश अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि, इससे निपटने के लिए कुछ लोग दवाई भी खाते हैं। गले में खराश को रोकने के लिए सबसे अच्छा और सरल तरीका ये है कि श्वसन संक्रमण से पीड़ित लोगों से दूर रहें। आप गले की खराश को शांत करने के लिए कुछ घरेलू उपचार भी आजमा सकते हैं।
गले में खराश वायरस या बैक्टीरिया के कारण हो सकती है। इसके अलावा, प्रदूषण, स्मोकिंग और मौसमी या किसी खाने की एलर्जी भी गले में खराश का कारण बन सकती है। गले में दर्द आमतौर पर सर्दी या बहती नाक के साथ होती है लेकिन कभी-कभी, यह श्वसन पथ के संक्रमण जैसी कुछ समस्याओं का संकेत भी हो सकती है। इससे फटाफट निपटने के लिए कुछ घरेलू तरीकों को अपनाएं।
गले की खराश से निपटने के लिए काढ़ा सबसे बेस्ट है। इसे बनाने के लिए पानी गर्म करें और फिर इसमें एक दाल चीनी का टुकड़ा डालें और फिर इसमें तुलसी के कुछ पत्ते डालें फिर अदरक को कद्दूकस करके पानी में डालें। अब इसे अच्छे से उबलने दें और जब पानी आधा हो जाए तब इसे छान लें और फिर घूंट-घूंट करके पीएं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
अध्यात्म का अर्थ अंतर्वर्ती है। शरीर के अंतर्वर्ती मन, बुद्धि, आत्मा का जगत। इस आत्म-जगत और बाहरी भौतिक-जगत के बीच सह सम्बन्ध खोजने की अंतर यात्रा का ही नाम है “अध्यात्म”। सर्व व्यापी चेतना रूप ब्रह्म से तदाकार होना इसका लक्ष्य है।इस अध्यात्म पर अन्य पोस्ट में बहुत लिख चुका हूँ। यहाँ इतना कहना पर्याप्त है कि
◆आध्यात्मिक साधना की अनुभूति व्यक्तिगत होती है यह सामूहिक नहीं हो सकती। इसलिए भी आज के युग में तो अध्यात्म का उपयोग समाज के संचालन में सामूहिक स्तर पर नहीं हो सकता खासकर इसलिए भी आम जनता का मानसिक स्तर और सामान्य होता है उस पर से उसे कु-संस्कारित करने वाले घटक भी कम नहीं हैं।
साधारण जन के लिए क्रम बद्ध तरीके से ही उच्च आध्यात्मिक मार्ग के लिए तैयार किया जा सकता है।इसी लिए सनातन धर्म में अध्यात्म उपलब्धि को जीवन का लक्ष्य बनाने से पहके व्यक्ति को तीन सीढियाँ को पार करना आवश्यक माना गया है।इनका क्रम इस प्रकार है
धर्म या सामाजिक आचार एवम ईश्वर उपासना।
अर्थ या स्वयं के लिए आजीविका कमाना ताकि दूसरों पर बोझ न बने
काम अर्थात सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति संतान मान प्रतिष्ठा की प्राप्ति करना।
( जब संसार के भोग की निस्सारता समझ मे आजाए तब)स्वयं के आत्म कल्याण का मार्ग खोजना अर्थात मोक्ष
इसे उम्र के अनुसार संगठित भी किया गया है। 1 ब्रह्मचर्य आश्रम 2 गृहस्थ आश्रम 3 वानप्रस्थ आश्रम 4 संन्यास आश्रम।
आज के संदर्भ में सेवा निवृत्ति के बाद 50 से 60 साल के दौरान वानप्रस्थ का मतलब जंगल की ओर प्रस्थान करना नहीं बल्कि समाज सेवा में निष्काम भाव से लगजाने से है। बिलगेट्स दम्पत्ति, विप्रो के अजीम प्रेमजी आदि यही वानप्रस्थ सेवा कार्य कर रहे हैं और यही सच्ची आध्यात्मिक भावना है जिसका वह स्व और लोक दोनों का कल्याण कर रहे हैं। ये केवल उदाहरण के लिए नाम लिखे हैं।
अध्यात्म के सिलसिले में एक बात और हमें ध्यान में लेना चाहिए—व्यक्तिगत आध्यत्मिक अनुभूति के कारण सिद्ध पुरुष का व्यवहार सबमें उसी परमसत्य की छवि देखेने के कारण प्रेम-करुणा-मय और समत्व का हो जाता है। पर ऐसा सिद्ध साधक भी अपने जैसा उदार वह कितनों को बना सकता है? वह केवल समाज को प्रेरणा मात्र दे सकता है।और ऐसे प्रेरक महापुरुषों के आचार व्यवहार सद उपदेशों से समाज में सद्भावना समत्व सात्विक भाव की वृद्धि होती रहती है।
अब यहाँ कोई व्यक्ति निजी आध्यात्मिक उपलब्धि या दिखावे के आधार पर निजी व्यक्ति पूजा को बढ़ावा देता है पाखंड फैलता है तो सनातन धर्म की उपरोक्त मान्यताओं के अनुसार विचार करें तो उसका धर्म और अध्यात्म में कोई स्थान नहीं हो सकता।थोड़े समय के लिए थोड़े से समुदाय को भरमा कर ये सब काल के गाल में समा जाते हैं।
जबकि सच्चे आध्यात्मिक साधक की इस उच्च अनुभूति direct perception का व्यवहार का समाज के रूपांतरण में उपयोग होता रहता है यह एक नीति एक सिद्धान्त याअवधारणा concept के रूप में दर्शन philosophy में और सामजिक आचार विचार के लिए बने धर्म शास्त्र में भी कुछ हद तक प्रयुक्त होता रहता जिसे समाज के तात्कालिक परिवेश के अनुसारयुग धर्म कहा जाता है
इति समाप्त
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

