कृषिमध्य प्रदेशव्यापार

पूसा बासमती धान: एक माह पहले 4600 रु. तक बिक रही थी, अब 3800 रु. हुए दाम

प्रोजेक्ट कंपनियों ने खींचे हाथ 800 रुपए/क्विंटल दाम कम होने से किसानों में बढ़ रहा आक्रोश
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी । पिछले कुछ सालों से धान में अच्छा मुनाफा होने के कारण किसानों का रुझान धान की तरफ बढ़ा था। अब यह क्षेत्र की पारंपरिक फसल के रूप में स्थापित हो गई है, लेकिन इस वर्ष धान के रेट कम मिलने के कारण किसानों को चिंता सता रही है। एक माह पहले जो पूसा बासमती धान 4600 रुपए तक बिक रही थी, अब वहीं घटकर 3600 से लेकर 3800 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है।
इस हिसाब से किसानों को 800 रुपए प्रति क्विंटल नुकसान हो रहा है, जिससे किसानों का आक्रोश बढ़ रहा है। किसानों ने बताया कि धान के दामों में अचानक कमी आना उनकी भी समझ से परे हैं। वहीं सिलवानी अंचल में पर्याप्त मिलर न होने से खासी किसानों को परेशानी रही है। किसानों ने बताया कि अभी किसानों के पास करीब 70 प्रतिशत धानं बेचने के लिए बची हुई है। ऐसे में यदि दाम कम मिलेंगे तो किसान को आर्थिक नुकसान होगा। धान में अब लागत ज्यादा आ रही है और दाम नहीं मिले तो किसान कैसे अगली फसल की पैदावार लेगा।
2 हजार क्विंटल धान की रोजाना हो रही आवक
मंडी लेखापाल ब्रजभूषण तिवारी ने बताया कि अभी मंडी में 2 हजार क्विंटल धान की रोजाना आवक है। अभी तक 3 लाख क्विंटल आवक हो चुकी है। कंपनियां जो रेट देती है उसी हिसाब से व्यापारी खरीदी करते हैं। वहीं राष्ट्रीय किसान मौजूद संघ के जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार निर्यात पर रोक लगाए हैं। लगातार चावल के रेट गिराने की कोशिश कर रही है। यही वजह है धान के दाम गिर रहे हैं। किसान रामकुमार रघुवंशी, देवेंद्र सिंह, दीपक पटेल, नवनीत पटेल, राजकुमार रघुवंशी ने बताया कि धान के रेट बढाएं जाए और जिन कंपनियों ने प्रोजेक्ट किया था वह चालू करें जिससे किसानों को उचित दाम मिल सके।
प्रोजेक्ट खत्म होने की बात कहकर धान खरीदी की बंद
क्षेत्र में कई दवा कंपनियों ने धान की बोवनी से लेकर खरीदने तक प्रोजेक्ट चला रखे थे। और खेतों में धान को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न प्रकार की दवाएं किसानों से डलवाई। लेकिन पहले तो कंपनियों ने धान खरीदी, लेकिन अब 31 जनवरी तक प्रोजेक्ट खत्म होने की बात कहकर धान खरीदना बंद कर दिया है। किसानों ने बताया कि कंपनी के कर्मचारी और व्यापारी बता रहे है कि लाल सागर से निर्यात बंद है जिस कारण से धान के रेट नही बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय मजदूर किसान संघ जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र पटेल ने कहा की सरकार और अन्य कम्पनी निर्यात खोले और धान के पुनः रेट वापस लाने की कोशिश करें ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके।
इस संबंध में रितु गढ़वाल, मंडी सचिव कृषि उपज मंडी सिलवानी का कहना है कि जो कंपनियां व्यापारियों के माध्यम से खरीदी करती है या सीधी खरीदी करती है उनकी मांग नहीं आ रही है। इसके अलावा धान की क्वालिटी पर भी दाम निर्भर रहता है। वर्तमान में 200 से 300 ट्रालियां रोजाना मंडी में आ रही है। वर्तमान में 3 हजार से शुरु होकर 4100 तक दाम मिल रहे हैं।

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