मध्य प्रदेश

डेढ़ करोड़ से चेनपुर पटपटी में नदी पर बन रहा पुल, निर्माण में देरी से ग्रामीणों में रोष

पुराना पुल भी तोड़ने से 5 किमी का लंबा चक्कर लगाकर आवागमन कर रहे ग्रामीण
बारिश में होगी दिक्कत,
अक्टूबर तक बनकर तैयार होगा पुल

रिपोर्टर : रिजवान खान
जैथारी । चैनपुर पटपटी में स्थानीय नदी पर रिपटा बना हुआ था, जिसे तोड़कर नया ढाई मीटर ऊंचा पुल बनाया जा रहा है। डेढ़ करोड़ की लागत से बनने पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों में जहां खुशी का माहौल बना हुआ है तो वहीं निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारण अब आक्रोश पनपने लगा है। ग्रामीण 5 किमी का लंबा चक्कर लगाकर चैनपुर पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों का अतिरिक्त खर्च होने के साथ-साथ समय की बर्बादी हो रही है। यही नहीं आवागमन में होने वाली परेशानी को शब्दों में भी बयां नहीं कर पा रहे है। ऐसे में ग्रामीणों की यह खुशी फिलहाल परेशानी का कारण बन रही है।
उल्लेखनीय है कि जब इस पुल के निर्माण के लिए एस्टीमेट और डिजायन तैयार हुई थी उसी हिसाब से पुल निर्माण को लेकर स्वीकृति मिली, लेकिन टेंडर होने के बाद इस पुल निर्माण को लेकर अफसरों ने बार-बार एलाइजमेंट बदलवाया, जिससे निर्माण में देरी हो गई। निर्माण एजेंसी ने पुरानी डिजायन के अनुसार पुराने पुल को तोड़कर खुदाई करना शुरु कर दिया, लेकिन जब इसका मूल्यांकन करने अफसर मौके पर पहुंचे तो इसका डिजायन बदलवा दिया, इसके बाद ठेकेदार ने नए सिरे से खुदाई का काम शुरु किया है। अब ठेकेदार ने काम शुरु कर दिया है, जिसे अक्टूबर तक पूरा होने का दावा किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक इस पुल की लंबाई लगभग 100 मीटर है तो वहीं चौड़ाई साढ़े सात मीटर है। ऊंचाई ढाई मीटर रखी गई है। । इस पुल से आसानी से भारी वाहन भी आवागमन कर सकते ते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पुल का निर्माण पूर्ण गुणवत्ता के साथ होना चाहिए ताकि लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके। टेंडर के अनुसार जो निधारित मापदंडों के अनुसार ही निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए। वहीं जब इस संबंध में एसडीओ नितिन पटेल से चर्चा करना चाही तो पहले उन्होंने शाम 4 बजे जानकारी देने का बोला, जब शाम 4 बजे फोन लगाया तो एक बार घंटी गई दूसरी बार उन्होंने फोन बंद कर लिया।
ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण एजेंसी ने पुराना पुल तोड़कर आवागमन पुरी तरह से बंद कर दिया है। जो वैकल्पिक मार्ग बनाया था वह भी तोड़ दिया है। ऐसे में ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। उन्हें समय पर स्कूल पहुंचना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण संदीप मेहरा, लखनलाल आदिवासी, राजू आदिवासी, अरविंद आदिवासी, निरपत सिंह आदिवासी, हरिओम आदिवासी ने मांग की है कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण किया जाए ताकि आवागमन सुलभ हो सके।
ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण की समय सीमा 18 माह थी, लेकिन एक साल से ज्यादा समय हो गया है। अभी तक सिर्फ खुदाई और पिलर का काम शुरु हुआ है। यानि की इस बारिश भी ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने बताया कि चाहे अफसरों की लापरवाही हो या निर्माण एजेंसी की हो, लेकिन ग्रामीणों की परेशानियों को भी समझना चाहिए। दोनों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों पर दोहरी मार पड़ रही है।
इस संबंध में अनुरंजन सिंह चौहान, ठेकेदार का कहना है कि पहले गलत खुदाई के कारण पुल निर्माण में देरी हुई है। अफसर जैसा निर्देश देते हैं उसके मुताबिक काम करते हैं। पुराना रास्ता तोड़ने से जरूर ग्रामीणों को परेशानी हो रही है, लेकिन वह जल्द से जल्द इस पुल का निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं। संभवतः अक्टूबर तक पुल का काम पूरा हो जाएगा।

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