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Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 17 जुलाई 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 17 जुलाई 2024
आप सभी देशवासियों को देवशयनी एकादशी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – बुधवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 09:03 PM तक उपरांत द्वादशी
🖍️ तिथि स्वामी – एकादशी तिथि के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 03:12 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है, जो राशि स्वामी मंगल का शत्रु है।
⚜️ योग – शुभ योग 07:04 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
प्रथम करण : वणिज – 08:54 ए एम तक
द्वितीय करण – विष्टि – 09:02 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:19 :00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:41:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:13 ए एम से 04:53 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:33 ए एम से 05:34 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:19 पी एम से 07:39 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:20 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 04:23 पी एम से 06:03 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 18 से 12:48 ए एम, जुलाई 18
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:34 ए एम से 03:13 ए एम, जुलाई 18
🌊 अमृत सिद्धि योग : 05:34 ए एम से 03:13 ए एम, जुलाई 18
🚗 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-किसी बटुक को धर्मशास्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवशयनी एकादशी व्रत (सर्वे)/सौर श्रावण मास प्रारंभ/चातुर्मास प्रारंभ/मूल प्रारंभ/सूर्य दक्षिणायण/ देवशयनी आषाढ़ी एकादशी/ मुहर्रम (ताजिया)/ चतुर्मास आरंभ/ पंढरपुर यात्रा/ करिदिवस/ रवि नारायण एकादशी (उड़ीसा)/ विश्व अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस, विश्व इमोजी दिवस, अभिनेता रवि किशन जन्म दिवस, मुहर्रम बैंक अवकाश दिवस, इंडोनेशियाई स्वतंत्रता दिवस, इलेक्ट्रॉनिक ग्रीटिंग कार्ड भेजने का दिवस है, ग्लियोब्लास्टोमा जागरूकता दिवस , राष्ट्रीय हॉट डॉग दिवस, राष्ट्रीय लॉटरी दिवस, राष्ट्रीय पीच आइसक्रीम दिवस, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर आई. जी. पटेल स्मृति दिवस, निर्मलजीत सिंह सेखों, परमवीर चक्र सम्मानित जयन्ती
✍🏼 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
सोते समय दिशाओं का रखें ध्यान वास्तु के अनुसार हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोना चाहिए। भूलकर भी आपके पैर दक्षिण दिशा में रखकर न सोएं। क्योंकि ऐसा करने पर आप तमाम तरह के मानसिक तनाव से घिर सकते हैं। यह आपके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है। वास्तु के अनुसार अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं और चैन की नींद लेना चाहते हैं तो सोते समय दिशाओं का ध्यान जरूर रखें।
न करें ये काम कई लोगों की आदत होती है कि वह सीढ़ियों के नीचे की जगह पर कुछ-न-कुछ रख देते हैं। वास्तु शास्त्र में इसे ठीक नहीं माना गया, क्योंकि ऐसा करने से आप कई बीमारियों से घिर सकते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए वास्तु में सीढ़ियों के नीचे की जगह को साफ और अव्यवस्था मुक्त रखने की सलाह दी जाती है।
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दिमाग के लिए भी है फायदेमंद हर रोज महज एक कप ऊंटनी का दूध पीना आपकी ब्रेन हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। ऊंटनी का दूध आपकी गट हेल्थ को इम्प्रूव करने में भी कारगर साबित हो सकता है। अगर आप पेट से जुड़ी तमाम समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको ऊंटनी का दूध पीना शुरू कर देना चाहिए। ऊंटनी के दूध का सेवन करके इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाया जा सकता है।
🥂 आरोग्य संजीवनी 🍶
कैसे करें अपने दिन की शुरुआत? अगर आप सुबह-सुबह फ्रेश होना चाहते हैं तो आपको अपने दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करनी चाहिए। उठते ही पेट साफ करने के लिए ये तरीका काफी ज्यादा असरदार साबित हो सकता है। एक गिलास पानी को पैन में डालकर हल्का गर्म कर लें। सर्दियों में सुबह-सुबह उठते ही गर्म पानी और गर्मियों में सुबह-सुबह उठते ही गुनगुना पानी पीना शुरू कर दीजिए।
किस तरह से करना चाहिए सेवन? बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए आपको गुनगुने पानी का सेवन खाली पेट ही करना चाहिए। गुनगुना पानी पीते ही फ्रेश होने के लिए टॉयलेट में बैठ जाइए। थोड़ी ही देर में आपका पेट एकदम साफ हो जाएगा। अपनी गट हेल्थ के लिए आपको भी इस छोटे से काम को अपने मॉर्निंग रूटीन का हिस्सा बना लेना चाहिए।
🐚 गुरु भक्ति योग 🪙
पद्म पुराण के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी (17 जुलाई) के दिन भगवान विष्णु पाताल लोक जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक वहीं निवास करते हैं। इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं। भगवान विष्णु के इन चार माह तक पाताल गमन के पीछे एक घटना है। विष्णु ने जब वामन रूप धारण कर असुर राज बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी, तब बलि ने उन्हें अपना सर्वस्व दान कर दिया था। और भगवान ने उन्हें पाताल लोक में रहने का आदेश दिया था। भगवान बलि की दानशीलता और वचनबद्धता को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उससे वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा, ‘प्रभु यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे साथ पाताल लोक में निवास करें।’ विष्णु बलि के आग्रह को मना नहीं कर पाए क्योंकि वे वचनबद्ध थे। वे बलि के साथ पाताल चले गए। इधर देवि लक्ष्मी विष्णु के पाताल लोक में जाने पर परेशान हो गईं। उन्होंने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त करवाया। इस पर भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देव प्रबोधनी एकादशी) तक पाताल में निवास करेंगे। विष्णु के पाताल गमन के इस समय को ही चातुर्मास कहते हैं।
देवशयनी एकादशी से जुड़ी एक अन्य कथा भी है। भगवान विष्णु का शंखचूड़ नाम के एक असुर से लंबे समय तक भयंकर युद्ध चला। अंत में भगवान विजयी हुए। लेकिन इस युद्ध में वे काफी थक गए थे। देवताओं ने आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा कर उनसे निवेदन किया कि आप कुछ समय विश्राम करें और सृष्टि संचालन का भार भगवान शंकर को सौंप दें। देवताओं की विनती पर विष्णु देवलोक के चार प्रहर की अवधि के लिए शयन करने चले गए, जो पृथ्वी लोक के चार माह के बराबर होते हैं। तब से आषाढ़ शुक्ल की एकादशी हरिशयनी एकादशी के नाम से जानी जाती है।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।

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