बेटी के जीवन को बचाने पिता ने दिया अपना लीवर, अंततः हुई मौत
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । एक पिता का प्यार बिटिया के लिए लिए कितना गहरा होता है, इसका अंदाजा शायद ही कोई लगा सकता है।
ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के ग्राम झिन्नापिपरिया निवासी पीतांबर सिंह ठाकुर जो पेशे से किसान हैं,जिनकी लाडली बेटी दिवांशी ठाकुर कटनी जिले के नवोदय विद्यालय बड़वारा की कक्षा बारहवीं की होनहार छात्रा थी।
शिक्षिका माँ लक्ष्मी सिंह एवं शिक्षित परिवार के सानिध्य मे पली बढ़ी बेटी के अरमान भी उच्च स्तर के थे, वो आगे चल कर आईएएस बनना चाहती थी, पिता भी बेटी की पढ़ाई लिखाई मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहे थे।लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, तीन माह पूर्व दिवांशी की अचानक तबियत बिगड़ी, डॉक्टरों को चेक कराया तो पता चला उसका लीवर पूर्णतः खराब हो गया है, डॉक्टर ने दो टूक जवाब दे दिया बचना मुश्किल है।आप लोग इसे घर ले जाए, ऐसा सुनते ही मानो बेटी के पिता एवं परिवार जनो पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, इसके बाद भी साहस से भरपुर पिता का कोमल ह्रदय बेटी को घर वापिस लाना उचित ना समझते हुए डॉक्टर से निवेदन किया अगर मै अपना लीवर दे दूँ तो मेरी बेटी बच सकती है -? डॉक्टर ने कहा हो सकता है बच जाएं।
पहले से ही लीवर ट्रांसफर करने का मन चुके पिता को परिजनों एवं दोस्त भाइयो ने ऐसा ना करने की सलाह दी
किन्तु बेटी को बचाने दृढ संकल्पित पिता ने अतः अपना लीवर नागपुर के एक निजी हॉस्पिटल मे ट्रांसफर कर दिया ।
पिता का प्यार किसी भी सीमा को पार कर सकता है । इसका जीता-जागता उदाहरण पेश किया है ग्राम झिन्ना पिपरिया निवासी पीतांबर सिंह ठाकुर ने, लीवर ट्रांसफर करने के बाद पीतांबर की हालत बिगड़ती जा रही थी, किन्तु बीच बीच मे वे अपनी बेटी को भरोसा दिलाते रहे कि वे पूरी तरह स्वस्थ है । लेकिन बेटी की लगातार गिरती सेहत के सदमे को वे बर्दाश्त नही कर सके और उनका दुःखद निधन हो गया, मृत्यु की सूचना मिलते ही पूरा क्षेत्र शोक मे डूब गया।
कल ग्रह ग्राम झिन्ना पिपरिया मे हजारों नम आँखो के बीच अंतिम संस्कार किया गया । पिता का त्याग जन मानस के ह्रदय अमर हो गया।



