आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 10 अगस्त 2024
10 अगस्त 2024 दिन शनिवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि है। आज की षष्ठी को स्कंदषष्ठी के रूप में मनाया जाता है। अर्थात आज स्कन्दषष्ठी का पावन व्रत है। आज ही शाम को भगवान कल्कि नारायण का अवतार दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज की षष्ठी को बंगाल में लुंठनषष्ठी के रूप में मनाया जाता है। आज रवियोग एवं सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “स्कंदषष्ठी एवं भगवान कल्कि नारायण के अवतार दिवस के पावन व्रत” की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढ़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 05:45 AM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथि स्वामी – षष्ठी तिथि के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 05:49 AM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह और अधिष्ठाता देव विश्वकर्मा हैं।
⚜️ योग – साध्य योग 02:51 PM तक, उसके बाद शुभ योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 04:31 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 05:44 ए एम, अगस्त 11 तक गर
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:29:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:31:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:22 ए एम से 05:05 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:43 ए एम से 05:48 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:53 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:39 पी एम से 03:32 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:05 पी एम से 07:26 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:05 पी एम से 08:09 पी एम
💧 अमृत काल : 10:35 पी एम से 12:24 ए एम, अगस्त 11
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, अगस्त 11 से 12:48 ए एम, अगस्त 11
🌸 द्विपुष्कर योग : 05:44 ए एम, अगस्त 11 से 05:48 ए एम, अगस्त 11
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 *आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:। 🤷🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में तिल का तेल दान करें। 🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/ रवियोग/व्यापार मुहूर्त/ सूपोदनवर्ण षष्ठी/ श्रियाल षष्ठी/ कल्कि जयन्ती/ स्कन्द षष्ठी, पृथ्वी दिवस, विश्व शेर दिवस, राष्ट्रीय आलस्य दिवस, श्री सनातन धर्म मंदिर में 34वां श्रीमद् गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती, पंडित विष्णु नारायण भातखंडे जन्म दिवस, अमेरिका आलसी दिवस, राष्ट्रीय स्मोर्स दिवस, राष्ट्रीय कनेक्टिकट दिवस, विश्व जैव ईंधन दिवस, पद्म भूषण आचार्य बलदेव उपाध्याय स्मृति दिवस, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ के रचयिता श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ स्मृति दिवस, भारतीय डाकू फूलन देवी जन्म दिवस ✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।। 📡 *_Vastu tips* 📠
वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की सही दिशा में placement महत्वपूर्ण है। इंवर्टर को गलत दिशा में रखना आपकी जीवनशैली और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
💁🏻 नुकसान:
स्वास्थ्य समस्याएँ: अगर आप इंवर्टर को बेड के सिरहाने या सोने की दिशा में रखते हैं, तो यह आपकी नींद और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण सिरदर्द, नींद में खलल, और मानसिक तनाव हो सकता है।
आर्थिक हानि: गलत दिशा में इंवर्टर रखने से विद्युत उपकरणों की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है, जिससे बिजली का बिल बढ़ सकता है और उपकरण जल्दी खराब हो सकते हैं।
परिवार में तनाव: वास्तु दोष के कारण परिवार में झगड़े और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
👉🏽 सही दिशा:
इंवर्टर को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें। यह दिशा विद्युत उपकरणों के लिए उपयुक्त मानी जाती है और इससे नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
सही दिशा में इंवर्टर रखने से आप भयंकर नुकसान से बच सकते हैं और अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रख सकते हैं।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नींबू और शहद वाला पानी सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पीने से शरीर डिटॉक्स होता है। यह पेट की समस्याओं को दूर करता है और वजन कम करने में भी मदद करता है।
तुलसी के पत्ते तुलसी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। रोज़ाना 3-4 तुलसी के पत्ते चबाने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और सर्दी-जुकाम से बचाव होता है।
कच्चा लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। सुबह खाली पेट 1-2 कली कच्चा लहसुन चबाने से हृदय स्वस्थ रहता है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
त्रिफला चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जो तीन फलों से मिलकर बनती है – आंवला, हरड़ और बहेड़ा। इसे रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ लेने से पाचन तंत्र सही रहता है और शरीर की सफाई होती है।
सौंफ और मिश्री का पानी भोजन के बाद सौंफ और मिश्री का पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट की समस्याएं दूर होती हैं। सौंफ में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो पेट की सूजन को कम करते हैं।
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
अडूसा के आयुर्वेदिक लाभ क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, अडूसा (वासा) उत्तेजक, कफनिःसारक, शीत वीर्य, आवाज के लिए फायदेमंद, कृमि नाशक, कुष्ठ याने त्वचा विकार, रक्त , पित्त दोष हर, खांसी, श्वास विकार और क्षय को दूर करता है।
इस के पत्तों में vasicine नामक क्षाराभ होता है।वासा के फूल, स्वाद में कड़वे और तीखे, बुखार कम करनेवाले, मूत्र उत्पत्ति बढ़ाने वाले और शीत होते है।
इसकी मूल की त्वचा, बुखार नाशक, मूत्र उत्पत्ति वर्धक, कफनिःसारक, कृमिनाशक होती है।इसका प्रधान गुण कफ को पतला कर बाहर निकलना है।
यह श्वासनलिकाओं का विस्फार करा है जिससे सांस लेने में आसानी होती है। पुरानी खांसी और श्वसन संस्थान के विकारों में वासा पत्तियों के स्वरस में काली मिर्च, अरदक स्वरस और शहद मिलाकर दिया जाता है। इस से जमा हुआ कफ आसानी से बाहर निकलता है और खांसी, सांस फूलना कम होता है।बच्चों के कफ विकारों में भी इसका टंकण के साथ इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।
वासावलेह कफ विकारों के लिए असरदार और प्रसिद्ध औषधी योग है।
रक्तपित्त में इसका स्वरस शहद के साथ देते है। इस के फूलों से बनाये हुए गुलकंद या पत्तियों के चूर्ण का भी इस्तेमाल होता है।वासा सिद्ध घृत – वासा घृत का प्रयोग किया जाता है।
मलेरिया में पत्तों के या मूल की त्वचा के चूर्ण का उपयोग करते है।
आमवात में पत्तियों का पुल्टिस बनाकर लगाया जाता है। इस से सूजन और दर्द कम होने में मदत मिलती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है।
आदिनाथ शिव : – सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें ‘आदिदेव’ भी कहा जाता है। ‘आदि’ का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम ‘आदिश’ भी है।
शिव के अस्त्र-शस्त्र : – शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था।
भगवान शिव का नाग : – शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।
शिव की अर्द्धांगिनी : – शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं।
शिव के पुत्र : – शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है।
शिव के शिष्य : – शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे।
शिव के गण : – शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख हैं। इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है।
शिव पंचायत : – भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु ये शिव पंचायत कहलाते हैं।
शिव के द्वारपाल : – नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल।
शिव पार्षद : – जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि शिव के पार्षद हैं।
सभी धर्मों का केंद्र शिव : – शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। मुशरिक, यजीदी, साबिईन, सुबी, इब्राहीमी धर्मों में शिव के होने की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शिव के शिष्यों से एक ऐसी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर शैव, सिद्ध, नाथ, दिगंबर और सूफी संप्रदाय में विभक्त हो गई।
बौद्ध साहित्य के मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय: – ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर।
(शेष कल)
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⚜️ षष्ठी तिथि यदि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है। परन्तु ऐसे जातक छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।



