Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 18 अगस्त 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 18 अगस्त 2024
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 03:05 AM तक उपरांत पूर्णिमा
✏️ तिथि स्वामी : चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 10:14 AM तक उपरांत श्रवण
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। राशि स्वामी गुरु है तो नक्षत्र स्वामी सूर्य है।
⚜️ योग – आयुष्मान योग 07:50 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग 04:28 AM तक, उसके बाद शोभन योग
⚡ प्रथम करण : गर – 04:31 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 03:04 ए एम, अगस्त 19 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:32:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:28:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:25 ए एम से 05:08 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:47 ए एम से 05:52 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:36 पी एम से 03:28 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:57 पी एम से 07:19 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:57 पी एम से 08:03 पी एम
💧 अमृत काल : 10:40 पी एम से 12:08 ए एम, अगस्त 19
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, अगस्त 19 से 12:47 ए एम, अगस्त 19
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:52 ए एम से 10:15 ए एम
❄️ रवि योग : 10:15 ए एम से 05:53 ए एम, अगस्त 19
🚕 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में आठ बादाम चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – शिव पवित्रारोपण (उड़िसा)/ पूर्णिमा प्रारम्भ उ. रात्रि 3. 04/ भद्रा/रवियोग/ भारतीय गायक दलेर मेहंदी जन्म दिवस, स्वतन्त्रता सेनानी सुभाष चन्द्र बोस स्मृति दिवस, महिला स्वतंत्रता सेनानी विजयलक्ष्मी पण्डित जयन्ती, प्रसिद्ध महिला पहलवान गीतिका जाखड़ जन्म दिवस, भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान स्थापना दिवस, राष्ट्रीय फजीता दिवस, अंतर्राष्ट्रीय डिलीवरी ड्राइवर प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय दम्पति दिवस, राष्ट्रीय आइसक्रीम पाई दिवस, राष्ट्रीय पिनोट नॉयर दिवस
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🪠 Vastu tips 🧹
झाड़ू से जुड़ी इन बातों का जरूर रखें ध्यान
वास्तु के मुताबिक, टूटी हुई झाड़ू का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। झाड़ू टूट जाने तुरंत बाद ही उसे बदल देना चाहिए।
सूर्यास्त के बाद आप जब भी झाडू लगाएं तो उस कूड़े या मिट्टी को घर के बाहर न फेंके, कहीं एक जगह पर कूड़ेदान में ही रख दें और सुबह होने पर बाहर फेंक दें।
झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना ता है, लिए गलती से भी कभी झाड़ू को पैर न लगाएं। लक्ष्मी माता का पमान माना जाता है और इससे घर में कई तरह की आर्थिक परेशानियां भी आ कती हैं।
रात के चार पहरों में झाडू लगाने से घर में दरिद्रता अपने पैर पसारती है और धन की देवी लक्ष्मी रूष्ठ हो जाती है। इसलिए सूर्यास्त के बाद या रात के समय कभी भी झाड़ू न लगाएं।
जिस अलमारी या तिजोरी में आप पैसा या अन्य कीमती मान रखते हैं, उसके पीछे या सटाकर कभी भी झाड़ू नहीं रखनी चाहिए। इससे धन की कमी होती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बच्चो के भोजन में इसका प्रयोग उदारता से करें।
यदि आपको शुद्ध देसी गाय का दूध उपलब्ध है तो छाछ, दही या मक्खन का सेवन करें। तब घी की मात्रा कम चाहिए। और यदि आपको गाय के दूध उपलब्ध नही है तो ग़लत दूध न मंगवाकर घी का सेवन अधिक करें।
एकादशी पर धार्मिक दृष्टि से न सही शारीरिक दृष्टि से उपवास करें। उस दिन 50 से 100 ग्राम गुनगुना घी पीकर दिन भर गुनगुने या गर्म पानी का सेवन करें। जीवन मे कभी कैंसर और जोड़ो का दर्द नहीं होगा इसके अतिरिक्त अनगिनत लाभ होंगे।
रात में गाय के दूध में फेंटकर पीने से अद्भुत लाभ है।
घी को पका कर या बिना पकाए दोनों तरीके से खा सकते है। चाहे तो इसमें खाना पका लें या फिर बाद में खाने के ऊपर डालकर खा लें। दोनों ही तरीके से घी बहुत ही फायदेमंद है।
आप सबसे अच्छा, सुंदर एवं युवा दिखना चाहते हैं तो घी अवश्य खाएं क्योंकि घी एंटीओक्सिडेंट जोकि आपकी त्वचा को हमेशा चमकदार और मुलायम रखता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
त्रिफला चूर्ण का सेवन सुबह खाली पेट नीचे बताइ गइ चिजो के साथ करना है । ध्यान रहे इसे खाने के बाद एक घंटा तक कुछ न खाए ।
इसकी मात्रा आपकी जितनी उम्र हो उससे साथ 0.12 से गुना करके लें । उदाहरण के तौर पर 40 उम्र हो तो 40 ×0.12= 4.8 ग्राम ।
शुरू में आधी मात्रा से शुरू करके धीरे-धीरे बढाना चाहिए ।
चैत्र, वैसाख -> वसंत ऋतु – शहद के साथ चाटना चाहिये।
ज्येष्ठ, आषाढ़ -> ग्रीष्म ऋतू – त्रिफला के 1/4 भाग जितना गुड़ मिलाकर खाना चाहिये*
सावन, भादों -> वर्षा ऋतू – त्रिफला के 1/8 भाग जितना सेंधा नमक मिलाकर खाना चाहिए।
आश्विन, कार्तिक -> शरद ऋतू – त्रिफला के 1/6 भाग जीतनी देशी शक्कर के साथ खाना चाहिये।
अगहन, पौष -> हेमंत ऋतू – त्रिफला के 1/6 भाग जितना सौंठ का चूर्ण मिलाकर खाना चाहिये।
माघ, फाल्गुन -> शिशिर ऋतू – त्रिफला के 1/8 भाग जितनी छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर खाना चाहिए।
जिसको कब्ज और पेट की समस्या हो वो रात को सोते वक्त एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को पानी के साथ लें और उपर से एक ग्लास हल्का गरम दुध पिए ।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बार की बात है किसी गांव में एक साधु बाबा रहा करते थे। पूरे गांव में वह अकेले साधु थे, जिन्हें पूरे गांव से कुछ न कुछ दान में मिलता रहता था। दान के लालच में उन्होंने गांव में किसी दूसरे साधू को नहीं रहने दिया और अगर कोई आ जाता था, तो उन्हें किसी भी प्रकार से गांव से भगा देते थे। इस प्रकार उनके पास बहुत सारा धन इकट्ठा हो गया था।
वहीं, एक ठग की नजर कई दिनों से साधु बाबा के धन पर थी। वह किसी भी प्रकार से उस धन को हड़पना चाहता था। उसने योजना बनाई और एक विद्यार्थी का रूप बनाकर साधु के पास पहुंच गया। उसने साधु से अपना शिष्य बनाने का आग्रह किया।
पहले तो साधु ने मना किया, लेकिन फिर थोड़ी देर बाद मान गए और ठग को अपना शिष्य बना लिया। ठग साधु के साथ ही मंदिर में रहने लगा और साधु की सेवा के साथ-साथ मंदिर की देखभाल भी करने लगा।
ठग की सेवा ने साधु को खुश कर दिया, लेकिन फिर भी वह ठग पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर पाया।
एक दिन साधु को किसी दूसरे गांव से निमंत्रण आया और वह शिष्य के साथ जाने के लिए तैयार हो गया। साधु ने अपने धन को भी अपनी पोटली में बांध लिया। रास्ते में उन्हें एक नदी मिली। साधु ने सोचा कि क्यों न गांव में प्रवेश करने के पहले नदी में स्नान कर लिया जाए। साधु ने अपने धन को एक कंबल में छुपाकर रख दिया और ठग से उसकी देखभाल करने का बोलकर नदी की ओर चले गए।
ठग की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे जिस मौके की तलाश थी, वो मिल गया। जैसे ही साधु ने नदी में डुबकी लगाई ठग सारा सामान लेकर भाग खड़ा हुआ। जैसे ही साधु वापस आया, उसे न तो शिष्य मिला और न ही अपना सामान। साधु ने ये सब देखकर अपना सिर पकड़ लिया।
कहानी से सीख
हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कभी भी लालच नहीं करना चाहिए और न ही किसी की चिकनी चुपड़ी बातों पर विश्वास करना चाहिए।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।



