आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 19 सितम्बर 2024
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्विन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 12:40 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ _ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 08:04 AM तक उपरांत रेवती 05:15 AM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र का स्वामी उत्तराभाद्रपद है। इस नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
🔱 योग – वृद्धि योग 07:18 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 02:28 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 12:39 ए एम, सितम्बर 20 तक वणिज
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:56:00_
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:04:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:34 ए एम से 05:21 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:57 ए एम से 06:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:39 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:17 पी एम से 03:06 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:21 पी एम से 06:45 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:21 पी एम से 07:32 पी एम
💧 अमृत काल : 03:08 ए एम, सितम्बर 20 से 04:32 ए एम, सितम्बर 20
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:38 ए एम, सितम्बर 20
❄️ सर्वार्थ सिद्धि योग : 08:04 ए एम से 06:09 ए एम, सितम्बर 20
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को स्वर्ण भेंट करें।* 🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/मूल प्रारंभ/ द्वितीय श्राद्ध/ पंचक समाप्ति 29.14/ महाराजा अग्रसेन जयंती महोत्सव, सिंधु नदी जल बंटवारा समझौता दिवस, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री डाकू दिवस, प्रसिद्ध सम्मानित कवि कुंवर नारायण जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा जन्म दिवस, सिक्खों के चौथे गुरु सिख गुरु राम दास स्मृति दिवस, वेल्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, नेशनल बटरस्कॉच पुडिंग डे, सेमाना डे ला चिलेनिडाड, नेशनल जींस फॉर जीन्स डे, NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स जन्म दिवस, आर्म्ड फोर्सेज डे (Armed Forces Day), राष्ट्रीय हिन्दी दिवस (सप्ताह) ✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है। 🗼 Vastu tips 🗽
पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर को सही दिशा में स्थापित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अगर आप पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करते हैं तो घर के अंदर पूजा स्थल में इनकी तस्वीर को उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में तस्वीर लगाने से वास्तु दोष दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का संचार होता है। पूजा स्थल के इतर अगर आप घर में वास्तु दोष निवारण के लिए आप पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर को लगाना चाहते हैं तो इसके लिए दक्षिण दिशा उत्तम मानी जाती है। तस्वीर में हनुमान जी बैठे हुए हों इस बात विशेष ख्याल रखें। माना जाता है कि दक्षिण दिशा से नकारात्मक शक्तियों का संचार होता है, ऐसे में अगर आप पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर इस दिशा में लगा देते हैं तो हर प्रकार की नकारात्मकता से आपको छुटकारा मिल जाता है। वहीं जिन लोगों के घर का मुख्य दरवाजा सही दिशा में नहीं है वो मुख्य दरवाजे पर पांच मुख वाले हनुमान जी की तस्वीर लगा सकते हैं, इससे घर का वास्तु ठीक होता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
क्या आपने कभी सुना था कि प्याज को मोजे में रखकर सोने से भी बहुत फायदा होता है, जी हां यह सच है, वाकई प्याज को मोजे में रखकर सोने से बहुत फायदा मिलता है, ब्लड, हार्ट, बैक्टीरिया से संबंधित बहुत से फायदे हैं जो प्याज से मिल सकते हैं एक शोध के मुताबिक पैरों के नीचे सीधे अलग-अलग तंत्रिका तंत्र होते हैं, जो कि शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़ी हुई होती हैं.
ये शरीर के भीतर एक शक्तिशाली बिजली के सर्किट की तरह से काम करते हैं, मगर ये अक्सर ही जूते और चप्पल पहनने की वजह से निष्क्रिय हो जाते हैं, ऐसे में प्याज काम आता है इसी के साथ अगर हम मोजो में प्याज रखकर सोते हैं तो इससे पैस से आने वाली बदबू भी दूर हो जाती हैं.
मोजे में प्याज रखकर सोने से अंगों को भी स्वस्थ रखा जा सकता है, शोधकर्ताओं का कहना है कि प्याज में मौजूद फॉस्फोरिक एसिड, खून की धमनियों में घुस कर खून को शुद्ध बनाता है.
आपको ज्यादा कुछ नहीं कर करना है, बस दो स्लाइस लेना है और एक-एक को दोनों पैर के मोजों में डालकर सो जाना है लेकिन प्याज मोजों में डालते वक्त ध्यान रखें कि प्याज की स्लाइस तलवों से चिपकी रहे.
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
आयुर्वेद में ‘बलाचतुष्टय’ किसे कहते हैं?
बला या खरैटी बूटी जड़ी है,इसके आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में बलवृद्धि वर्धकउपायों में उपयोग होता है। यह पौधा चार प्रकार का होता है बला, अतिबला, नागबला,महाबला । मेरे विचार से इसको बलाच्टूस्य कहते हैं ।
खरैटी में ड्यूरेटिक गुण होते हैं, जो मूत्र संबंधी बीमारियों को दूर करने में मदद करते हैं।
खरैटी का इस्तेमाल नपुंसकता, धातुक्षीणता, और शारीरिक कमज़ोरी दूर करने के लिए किया जाता है।
खरैटी का एक छोटा टुकड़ा पीसकर पानी में घोलकर पीने से शुक्रमेह में आराम मिलता है।
खरैटी के पत्तों से रस निकालकर दांत दर्द में आराम मिलता है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
17 सितम्बर 2024 से 2 अक्टूबर 2024 तक है पितृ पक्ष जिसमें पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए श्राद्ध किया जाता है जो एक महत्वपूर्ण हिन्दू धार्मिक परंपरा है। श्राद्ध कर्म को विशेष रूप से आत्मिक उन्नति और परिवार की भलाई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
🪶 शास्त्रों में श्राद्ध कर्म का बहुत महत्व है :
☀️ श्राद्ध का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए होता है। इस दिन उनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वपरिजनों को उनका आशीर्वाद मिलता है।
☀️ श्राद्ध के दौरान की गई पूजा और दान से परिवार को समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। इसे परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
☀️ श्राद्ध की विधि में भाग लेने से व्यक्ति की आत्मिक उन्नति होती है। यह कर्म और पुण्य का स्रोत होता है, जो व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक शांति प्रदान करता है।
☀️ यह परंपरा हमें अपने पूर्वजों की याद को बनाए रखने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की प्रेरणा देती है।
👉🏼 श्राद्ध में रखने योग्य सावधानियांँ :
🩸 पितरों को खिलाये बिना नहीं खायें । पराया अन्न भी नहीं खाना चाहिए ।
🩸श्राद्धकर्ता श्राद्ध पक्ष में पान खाना, तेल-मालिश, स्त्री-सम्भोग, संग्रह आदि न करें ।
🩸श्राद्ध का भोक्ता दुबारा भोजन तथा यात्रा आदि न करें । श्राद्ध खाने के बाद परिश्रम और प्रतिग्रह से बचें ।
🩸श्राद्ध करनेवाला व्यक्ति ३ से ज्यादा ब्राह्मणों तथा ज्यादा रिश्तेदारों को न बुलायें ।
🩸श्राद्ध के दिनों में ब्रह्मचर्य व सत्य का पालन करें और ब्राह्मण भी ब्रह्मचर्य का पालन करके श्राद्ध ग्रहण करने आये ।
👉🏼 श्राद्ध में तीन प्रशंसनीय चीजें :
⭐ शुद्धि*
⭐अक्रोध* ⭐अत्वरितता : जल्दबाजी नहीं, धैर्य*
👉🏼 श्राद्ध में तीन पवित्र चीजें :
⭐तिल* ⭐ बेटी का बेटा दौहित्र*
⭐ कुतपकाल
🌹 सुबह 11:36 से लेकर 12:24 तक विशेषकाल माना जाता है । थोड़ा आगे-पीछे हो जाय तो कोई बात नहीं लेकिन इस काल में श्राद्ध की विशेष पवित्रता होती है ।
👉🏼 श्राद्धकाल में ध्यान रखने योग्य सात विशेष शुद्धियाँ :
⚡ नहा-धोकर शरीर शुद्ध हो ।
⚡ श्राद्ध की द्रव्य-वस्तु शुद्ध हो ।
⚡स्त्री शुद्ध हो, मासिक धर्म में न हो ।
⚡जहाँ श्राद्ध करते हैं वह भूमि शुद्ध हो । गोझरण से, देशी गाय के गोबर से लीपन की हुई हो ।
⚡ मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें ।
⚡ब्राह्मण भी शुद्ध भाववाला हो और तम्बाकू, जर्दा आदि का सेवन न करता हो ।
⚡ मन को भी शुद्ध रखें ।
सबसे बढ़िया श्राद्ध श्राद्धपक्ष की तिथियों में होता है । हमारे पूर्वज जिस तिथि में इस संसार से गये हैं, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ होता है।
श्राद्ध पूर्वजों के प्रति सम्मान और उनकी आत्मा की शांति के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो परिवार की सुख-शांति और समृद्धि को बढ़ाता है, और अपने पूर्वजों की याद को हमेशा बनाए रखने और उनके प्रति आभार प्रकट करने की प्रेरणा देती है।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।



