नेत्रदान और देहदान कर पीड़ित मानवता को समर्पित हो गए अमय

विदिशा । अरिहंत विहार विदिशा में रहने वाले 22 बर्ष के अमय जैन का बीती रात एक निजी अस्पताल में निधन हो गया वह बीते लगभग 8 बर्षो से मसकुलर डिसाडर रोग से पीड़ित थे. देहदान और नेत्रदान की जागृति के लिए अंतिम सेवक विकास पचौरी ने बीते अक्टूबर 2018 को विदिशा के जालोरी गार्डन में
एक कैंप आयोजित किया था
जिसमें अमय और इनकी माँ इरा जैन ने मृत्यु उपरांत देहदान का संकल्प पत्र भरा था जिसमें जिक्र था कि मेरी मृत्यु के उपरांत पार्थिव शरीर को किसी भी मेडिकल कॉलेज में दान कर दिया जावे तो उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए अंतिम सेवक विकास पचौरी के सहयोग से परिवार जनों ने अमय के पार्थिव शरीर को अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज में दान कर दिया, अब यह पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज के छात्रों को शोध के लिए काम आवेगा।
देहदान के पूर्व हुआ नेत्रदान
अमय जैन के निधन के बाद
उनके पार्थिव शरीर से देहदान के पूर्व उनके दोनों नेत्रों के दान की प्रक्रिया उनके निवास पर विदिशा के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ विनोद भट्ट द्वारा पूरी की गई. जिसमें डॉक्टर रुपाली जैन एवं डॉ अनुज दुबे का विशेष सहयोग रहा. नेत्रदान के बाद नेत्रों को अमय के परिवार के सदस्य निलेश जैन द्वारा एम्स हॉस्पिटल भोपाल में जाकर दान कर दिया गया जो कि अब किन्हीं दो नेत्र हीनो को रोशनी दे सकेगा।
मेडिकल कॉलेज विदिशा में अमय जैन के देहदान के समय उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देकर इनकी मोक्ष की कामना करने शोक सभा हुई जिसमें डीन डॉ मनीष निगम, एनाटॉमी विभाग अध्यक्ष डॉ रश्मि देव पुजारी, डॉ नैना बकोड़े, डॉ मनीषा विजयबर्गीय, डॉ सुजाता नेताम, डॉ गरिमा पारदी, डॉ ओमप्रकाश गौड सहित अमय के परिवारजन देहदानी इरा जैन, अमि जैन, आदित्य जैन, सारिका पोरवाल, मनीषा पोरवाल, मिलेश जैन, विकास पचौरी सहित अनेक व्यक्ति मौजूद थे।



