मध्य प्रदेश

सुदामा चक्रवर्ती के घर आ पहुंची जर्मनी की टीम, कटनी जिले की बनी एक दिन की कलेक्टर

हौसले को मिले चार चांद , पुनः आ पहुंची जर्मनी की टीम
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र अन्तर्गत आने वाले ग्राम दशरमन निवासी ब्लाइंड सुदामा चक्रवर्ती के घर आ पहुंची जर्मनी की टीम। एक दिन की बनी कलेक्टर के लिए बनाई जा रही है ग्रामीण फिल्म उत्साह उमंग से परिवार को मिली सफलता। स्थानीय लोगों ने एक गरीब परिवार के हौसले को नकारा पुनः आज पहुंची जर्मनी की टीम। ले जाएगी उसको ऊंचाइयों पर संघर्ष करने वाले कभी हारते नहीं ,चाहे ले अगर तो ऊंचाइयों को भी पाना उसके बस में है। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश में देखने को मिला जो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कटनी जिले की नेत्र दिव्यांग सुदामा चक्रवर्ती को एक दिन के लिए सांकेतिक कलेक्टर बनी गई थी। आप सभी को बता दे कि बीते वर्ष सुदामा चक्रवर्ती को दिव्यांगता की वजह से उसे कभी स्कूल में दाखिला नहीं मिला था। अपनी जिद की वजह से उसने आगे की पढ़ाई भी की और राष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी के रूप में अलग पहचान भी बनाई है।
मध्यप्रदेश के कटनी में एक दिव्यांग बालिका को एक दिन का कलेक्टर (inspiring success story of Sudama Chakraborty) बनाया गया है। एक दिन की सांकेतिक कलेक्टर बनी नेत्र दिव्यांग बालिका महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी। वहीं नेत्रहीन बालिका सुदामा चक्रवर्ती राष्ट्रीय स्तर की नेत्र दिव्यांग जूडो खिलाड़ी (one day katni collector sudama chakraborty) हैं। जिले के कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सुदामा चक्रवर्ती को महिला दिवस पर सांकेतिक कलेक्टर के रूप में प्रभार सौंपा था। कलेक्टर बनी सुदामा विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि भी रहीं। इस दौरान उन्होंने शासकीय विभागों का भी निरीक्षण किया।
एक दिन के लिए बनी सांकेतिक कलेक्टर सुदामा चक्रवर्ती जिले के ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम दशरमन की रहने वाली है। राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने वाली नेत्र दिव्यांग सुदामा चक्रवर्ती के हौसले को सभी आज भी सलाम करते हैं। मीडिया को जानकारी देते हुए बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा सुदामा चक्रवर्ती ने बताया कि तीन भाई और दो बहनों में वह सबसे छोटी है। पिता छोटेलाल ने मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण किया है। मां सुम्मी बाई घर का काम करती है।
सुदामा ने बताया कि जब पहली कक्षा में भाई के साथ प्रवेश लेने गई तो शिक्षक ने उसे यह कहकर लौटा दिया था ? कि वह देख नहीं पाती तो पढ़ेगी कैसे। फिर भी सुदामा ने पढ़ने की जिद नहीं छोड़ी और अगले साल स्कूल में प्रवेश लिया। सुदामा चक्रवर्ती शासकीय उच्चतर माध्यमिक महात्मा गांधी स्कूल से कक्षा 12वीं पास कर वर्तमान में श्याम सुंदर अग्रवाल महाविद्यालय सिहोरा में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा के साथ पढ़ाई की। इसके साथ साथ सुदामा ने जूडो का प्रशिक्षण तरुण संस्कार संस्था से प्राप्त किया है। वहीं सुदामा चक्रवती ने अपनी स्नातक की पढ़ाई के साथ जूडो का निरंतर अभ्यास पड़वार स्टेडियम स्लीमनाबाद स्थित प्रशिक्षण केंद्र में करती रही। एक दिन के लिए कटनी कलेक्टर बनीं सुदामा चक्रवती ने कई जगहों का भी निरीक्षण किया था। जिस पर कर्मियों ने उन्हें कलेक्टर जैसा ही सम्मान भी दिया है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुदामा चक्रवर्ती ने महिलाओं से कहा कि कोमल है तू कमजोर नहीं, शक्ति का नाम ही नारी है। इस जज्बे के साथ आज जर्मनी की टीम सुदामा चक्रवर्ती के गांव पहुंच कर उसके हौसले पर एक फिल्म बनाने जा रही हैं। और जल्द ही उसे बड़े पैमाने पर पूर्ण रूप देखा जाएगा।

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