धार्मिक

संस्कारयुक्त शिक्षा ही सबसे बड़ी संपत्ति

ब्यूरो चीफ: भगवत सिंह लोधी
पथरिया । नगर में विराजित पूज्य जैन संत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महराज जी के मंगल सानिध्य में महारानी लक्ष्मी बाई शासकीय कन्या शाला में एवं सरस्वती शिशु मंदिर के प्रांगण में विद्यार्थी जीवन को कैसे उन्नत बनाए और राष्ट्रनिर्माण नैतिकता के साथ कैसे करे इस विषय पर मंगल प्रवचन हुई।जिसमे विद्यालय की प्राचार्य, शिक्षक, पालक, उपस्थित रहे।दोनों विद्यालयों के स्टाफ ने जैन संत जी को श्रीफल भेंटकर स्वागत किया एवं पाद प्रक्षालन कराए।
इसके बाद पूज्य उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे देशभक्त, संस्कारवाद, आज्ञाकारी, स्वस्थ विद्यार्थी बनें। समाज में फैली कुरीतियों से बचें। उनके अंदर बुराइयों का समावेश न हो। वे अपने अन्दर दुर्व्यसनों को अपने अन्दर न पनपने दें। अपने माता-पिता, गुरुओं की सेवा और आदर करें। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मा की महत्ता के बारे में बताया कि आत्मा अजर और अमर है इसे कोई नहीं मार सकता। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंसा न करना, चोरी न करना, आवश्यकता से अधिक धन संग्रह न करना, विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करना आदि शिक्षाएं दी। उन्होंने गर्ल्स स्कूल में सभी बालिकाओं को समर्थ और साहसी कैसे बने और कितनी भी विपरीत परिस्थिति और असफलता देखनी पड़े उसमें अपनी सद्बुद्धि से सही निर्णय लेने और कभी आत्मघात (खुदकुशी) न करने का संकल्प भी कराया । पूज्य गुरुदेव ने सरस्वती शिशु मंदिर के विशाल प्रांगण में बालक बालिकाओं को कुंभकार का प्रसंग सुनाया जिसमें विद्यार्थी अपनी उम्र में कच्ची मिट्टी की भांति होता है जिसे शिक्षक कुंभकार की भांति अच्छे आकार में ढालकर सुंदर पात्र बना देता है।साथ ही सभी विद्यार्थियों से नशामुक्ति, गुरुजन, माता पिता की सेवा की भी शपथ दिलाई। प्रवचन उपरांत प्रश्नोत्तरी भी हुई जिसमें मुनिश्री ने बच्चों से प्रश्न पूछे और पुरस्कार भी गोलू बड़कुल के सौजन्य से वितरित हुए।आयोजन में प्राचार्य सुभाष जैन, योगिता तिवारी, राजेश गर्ग, पुष्पेंद्र सर, राहुल जैन, प्राचार्य बाबूलाल सेन, व्यवस्थापक संदीप जैन, नंदकिशोर चौरसिया, आदेश मम्मा, रवि, गोलू, दीपक, सजल, उमेश जैन सहित कई व्यक्ति मौजूद रहे।
सभी विद्यार्थियों ने मुनिश्री की बातों को ध्यान से सुना।

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