धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 22 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 22 मार्च 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शनिवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 05:23 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल 03:23 AM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है.और राशि के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं।
⚜️ योग – व्यातीपात योग 06:36 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
प्रथम करण : बालव – 04:58 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 05:23 ए एम, मार्च 23 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:59:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:01:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:35 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:12 ए एम से 06:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:04 पी एम से 12:52 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:32 पी एम से 06:56 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:33 पी एम से 07:44 पी एम
💧 अमृत काल : 08:33 पी एम से 10:16 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, मार्च 23 से 12:51 ए एम, मार्च 23
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – कालाष्टमी/ वर्षीतपारंभ (जैन)/ शहादते हज़रत अली/ संयुक्त राष्ट्र विश्व जल दिवस, बिहार स्थापना दिवस, भारतीय दार्शनिक उप्पलुरी गोपाल कृष्णमूर्ति स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मृति दिवस, मराठी पत्रकार प्रभाकर आत्माराम पाध्ये पुण्य तिथि, पत्रकार गोविंद तलवलकर पुण्य तिथि, समाज सुधारक मुंशी दयानारायण निगम जन्म दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी सूर्य सेन जयन्ती, केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
आग्नेय कोण से जुड़ी गलती दक्षिण-पूर्व दिशा को आग्नेय कोण कहा जाता है। इस दिशा का स्वामी अग्नि देव को माना जाता है। इसलिए कभी भी आपको आग्नेय कोण में पानी की टंकी या पानी से भरे बर्तन नहीं रखने चाहिए। कई बार लोग घर की छत पर टंकी इस दिशा में रख देते हैं, ऐसा करना वास्तु के अनुसार अशुभ माना जाता है। इसकी वजह से आपके घर में कंगाली आ सकती है। आग्नेय कोण में जल, जल से भरे बर्तन रखने से आपको कानूनी पचड़ों में भी फंसना पड़ सकता है। साथ ही घर में लड़ाई झगड़े का कारण भी आग्नेय कोण से जुड़ा वास्तु दोष हो सकता है। इसलिए गलती से भी इस दिशा में पानी न रखें। इस दिशा में दीपक जलाना या लाइट जलाकर रखने से आपको शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शारीरिक दर्द और जकड़न वायु दोष बढ़ने पर संधियों (जोड़ों) में दर्द, अकड़न, मांसपेशियों में ऐंठन और नसों में खिंचाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वात के असंतुलन के कारण गठिया (आर्थराइटिस), सायटिका (sciatica) और पीठ दर्द जैसी समस्याएं भी उभर सकती हैं।
पाचन तंत्र की गड़बड़ी वात दोष का असंतुलन होने से गैस, कब्ज, पेट फूलना, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। पेट में वायु के अत्यधिक संचय के कारण भोजन का ठीक से पाचन नहीं हो पाता, जिससे भोजन से मिलने वाले पोषक तत्व भी अवशोषित नहीं हो पाते।
मानसिक अस्थिरता और तनाव वात दोष मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है, जिससे चिंता, तनाव, अनिद्रा, बेचैनी, अवसाद और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। अत्यधिक वात असंतुलन के कारण व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई होती है और विचारों में अस्थिरता बनी रहती है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
गुलतुरा के प्रमुख उपयोग
गुलतुरा का सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटी) और कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
यह पेट की गैस और अपच को कम करने में मदद करता है।
आँतों की सफाई करता है और पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है।
रक्त को शुद्ध करता है गुलतुरा रक्त को साफ करके शरीर में टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।
इससे त्वचा पर प्राकृतिक चमक आती है।
खून की गंदगी के कारण होने वाले फोड़े-फुंसी और खुजली में राहत मिलती है।
सूजन और दर्द में राहत गुलतुरा के सेवन से शरीर की सूजन और संधि (जोड़ों) के दर्द में आराम मिलता है।
इसे तेल में मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाने से मांसपेशियों का दर्द कम होता है।
गठिया (Arthritis) में बहुत फायदेमंद है।
📖 गुरु भक्ति योग
🕯️
शम्बरासुर नामक एक असुर था जिसने स्वर्गलोक पर आक्रमण कर दिया। इन्द्र और सभी देवता युद्ध में उससे हार के छिप गये। कुछ दिन बाद देवराज इन्द्र ने अयोध्या राजा दशरथ के पास सहायता प्राप्त करने के लिए संदेश पहुँचवाया। इन्द्र की ओर से राजा दशरथ कैकेई के साथ शम्बरासुर से युद्ध करने के लिए स्वर्ग आये और युद्ध में शम्बरासुर राजा दशरथ के हाथों मारा गया।
युद्ध जीतने की प्रसन्नता में इन्द्र देव तथा इन्द्राणी ने दशरथ तथा कैकेई का भव्य स्वागत किया और उपहार भेंट किये। इन्द्र देव ने दशरथ जी को ” स्वर्ग गंगा मन्दाकिनी के दिव्य हंसों के चार पंख प्रदान किये। इन्द्राणी ने कैकेई को वही दिव्य चूडामणि भेंट की और वरदान दिया जिस नारी के केशपास में ये चूड़ामणि रहेगी उसका सौभाग्य अक्षत–अक्षय तथा अखण्ड रहेगा , और जिस राज्य में वो नारी रहे गी उस राज्य को कोई भी शत्रु पराजित नही कर पायेगा।
उपहार प्राप्त कर राजा दशरथ और कैकेई अयोध्या वापस आ गये। रानी सुमित्रा के अदभुत प्रेम को देख कर कैकेई ने वह चूड़ामणि सुमित्रा को भेंट कर दिया। इस चूड़ामणि की समानता विश्वभर के किसी भी आभूषण से नही हो सकती।
जब श्री राम जी का व्याह माता सीता के साथ सम्पन्न हुआ । सीता जी को व्याह कर श्री राम जी अयोध्या धाम आये सारे रीति- रिवाज सम्पन्न हुए। तीनों माताओं ने मुह दिखाई की प्रथा निभाई।
सर्वप्रथम रानी सुमित्रा ने मुँहदिखाई में सीता जी को वही चूड़ामणि प्रदान कर दी। कैकेई ने सीता जी को मुँह दिखाई में कनक भवन प्रदान किया। अंत में कौशिल्या जी ने सीता जी को मुँह दिखाई में प्रभु श्री राम जी का हाथ सीता जी के हाथ में सौंप दिया। संसार में इससे बडी मुँह दिखाई और क्या होगी। जनक जीने सीता जी का हाथ राम को सौंपा और कौशिल्या जीने राम का हाथ सीता जी को सौंप दिया।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

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