दमोह जिले की जबेरा में गर्मियों में धान की खेती की अनोखी पहल

किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी जनपद सीईओ रामेश्वर पटेल की यह पहल
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
जबेरा । दमोह जिले जनपद पंचायत जबेरा क्षेत्रीय धान अनुसंधान के केंद्र बनाने कृषि महाविद्यालय की स्थापना के लिए दमोह कलेक्टर राज्य शासन के कृषि सचिव को लिख चुके हैं पत्र दमोह जिले की जनपद जबेरा के ग्राम कौरता में धान की खेती की एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जिसमें दो एकड़ में धान की रोपाई करके खेतों में लहलहा रही फसल देखने को मिल रही है। यह सांकेतिक पहल धान कृषि में पीएचडी कर चुके जबेरा जंप सीईओ डॉ रामेश्वर पटेल ने की है, जो किसानों के लिए आगे चलकर काफी लाभकारी साबित होने वाली है ।
इस पहल से किसान मानसून से पहले या बाद में भी धान की खेती कर सकते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त फसल प्राप्त हो सकती है। सिंचाई के सहारे 35 से 40 क्विंटल प्रति एकड़ धान उत्पादन किया जा सकता है, जनपद सीईओ डॉ रामेश्वर पटेल ने अपनी निरीक्षण के दौरान चौपरा अंचल के महुआखेड़ा जलाशय के नीचे देखा की यहां के दर्जनों 15 से 20 एकड़ भूमि ने किसान गेहूं की खेती नमी के चलते नहीं कर पाए और इन किसानों के लिए इस भूमि का गर्मियों में धान की खेती के लिए उपयोग किया जा सकता है जबेरा को क्षेत्रीय धान अनुसंधान केंद्र बनाए जाने की दृष्टि से जनपद सीईओ की यह पहल वरदान साबित होगी किसानों के लिए जंप सीईओ द्वारा किसानों की मिट्टी पी एच मान के बारे में मिट्टी परीक्षण उपयुक्त खाद्य पौधा का विकास को लेकर आगे चलकर गर्मियों में धान की खेती की कार्यशाला आयोजित की जाएगी समतल भूमि चयन खरपतवार पानी जैसी बिंदुओं पर किसान से चर्चा कर की जाएगी जिसके लिए आगे बैठक में जनपद की 70 ग्राम पंचायत के सचिवों के मिट्टी परीक्षण के लिए मंगाई गई जिसमें पी एच पेपर से मिट्टी का टेस्ट करके मिट्टी की जानकारी मिट्टी उपचार किया जाएगा सदस्य चौपरा चंडी इंद्रजीत सिंह का कहना है कि जनपद सीईओ की इस पहल ने गर्मी के मौसम में धान की खेती करने की ओर किसानों को प्रेरित किया है।
जिससे बरसात के अलावा गर्मी में धान की खेती कर सकते हैं। गर्मी के दिनों में बारिश के मौसम से अच्छी फसल पैदा हो सकती है और इस समय कीड़ा नहीं लगता है। सिंचाई व्यवस्था होने पर किसानों का खेत सालों भर लहलहाते रहेंगे। क्योंकि दमोह जिला कृषि प्रधान चला है तथा जिले की लगभग 90% आबादी कृषि व्यवसाय से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है और धान उत्पादन की नवीन तकनीकियों एवं किस्म के विकास हेतु क्षेत्रीय धान अनुसंधान केंद्र बनाए जाने को की दिशा में जबेरा जंप क्षेत्र के किसानों को सीईओ की यह पहल वरदान साबित होगी।



