मध्य प्रदेश

मजदूर दिवस पर पत्रकारों ने रैली निकालकर, कलेक्टर को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

पत्रकार सुरक्षा कानून सहित 21 सूत्रीय मांगों को लेकर पत्रकारों ने उठाई आवाज, सरकार का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । 1 मई मजदूर दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला इकाई कटनी ने रैली का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पत्रकारों ने भाग लेकर अपनी एकता और अधिकारों की आवाज बुलंद की। रैली के माध्यम से पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 21 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा । कार्यक्रम का आयोजन प्रांतीय अध्यक्ष शलभ भदौरिया के निर्देशन में हुआ, जबकि नेतृत्व जिला इकाई के अध्यक्ष पंडित राकेश तिवारी एवं प्रांतीय सचिव डॉ. सुरेंद्र राजपूत ने किया। रैली का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकारों, रोजगार की स्थिरता, और सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार से संबंधित मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। ज्ञापन में जिन 21 सूत्रीय मांगों को शामिल किया गया, उनमें प्रमुख रूप से पत्रकार सुरक्षा कानून को तत्काल प्रभाव से लागू करने, अधिमान्य पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में प्राथमिकता देने, न्यूनतम वेतनमान तय करने, पत्रकारों के लिए बीमा योजनाओं का विस्तार करने, ग्रामीण एवं फ्रीलांस पत्रकारों को मान्यता और सहयोग प्रदान करने, मीडिया संस्थानों द्वारा पत्रकारों के शोषण पर रोक लगाने जैसे बिंदु शामिल हैं।
ज्ञापन में इस बात पर बल दिया गया कि पत्रकार आज के दौर में मजदूरों की तरह बिना निश्चित समय और संसाधनों के कार्य कर रहे हैं। वे समाचार संकलन, विज्ञापन, वितरण, रिपोर्टिंग, संपादन से लेकर सोशल मीडिया प्रबंधन तक में संलग्न हैं। फिर भी उन्हें न तो स्थायी सेवा सुरक्षा मिलती है और न ही सामाजिक कल्याण की कोई व्यवस्था। विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों की स्थिति अत्यंत दयनीय है।
पत्रकार ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान वे हर दिन खतरों से जूझते हैं। कई बार आपराधिक तत्वों, असामाजिक और राजनैतिक दबाव समूहों के विरुद्ध खबर प्रकाशित करने के कारण उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में पत्रकारों पर हमले हुए हैं, यहां तक कि हत्या तक की घटनाएं सामने आई हैं । इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी, मजबूत और प्रभावी सुरक्षा कानून लागू नहीं हो पाया है ।
वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है । लेकिन विडंबना यह है कि पत्रकारों को आज भी अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार को पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू करना होगा, जिससे पत्रकार स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें और जनहित से जुड़ी खबरें सामने ला सकें ।
ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि सरकार शीघ्र ही पत्रकारों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले समय में पत्रकारिता के मूल उद्देश्यों पर संकट गहराएगा। जनता की आवाज दब जाएगी और मीडिया का संचालन माफिया और कॉर्पोरेट हितों के अधीन हो जाएगा । इससे न केवल लोकतंत्र कमजोर होगा, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच संवाद का पुल भी ध्वस्त हो जाएगा ।
ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख पदाधिकारियों में जिलाध्यक्ष पंडित राकेश तिवारी, प्रांतीय सचिव डॉ. सुरेंद्र राजपूत, कार्यकारी अध्यक्ष नवनीत गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष अनंत राम गुप्ता, जनसम्पर्क अधिकारी श्यामलाल तिवारी, महासचिव अज्जू सोनी, मीडिया प्रभारी अजय उपाध्याय, डॉ. ज्योति राजपूत, मंजूषा गौतम, रश्मि राय, कंचन साहू, डॉ. नारायण पटेल, गोकुल पटेल, पप्पू उपाध्याय, दीनदयाल रजक, गोकुल दीक्षित, सुशील मिश्रा, सतीश चौरसिया, लोनेश्वर पूरी, सुखचैन पटेल, रविन्द्र चौदहा, रामेश्वर त्रिपाठी, गोविन्द गिरी, बबलू पटेल, सोमनाथ पटेल, शुभम राय सहित बड़ी संख्या में पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी पत्रकारों ने एकमत से सरकार से मांग की कि पत्रकार सुरक्षा कानून को राष्ट्रीय प्राथमिकता की सूची में शामिल कर, पत्रकारों की गरिमा, आज़ादी और सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जाए । साथ ही यह भी आग्रह किया गया कि पत्रकारों के हित में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर समग्र नीति बनाएँ और उसका क्रियान्वयन करें।

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