मध्य प्रदेश

नकल करके युग के सबसे महान शिक्षक बने आचार्य सोनी

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । वर्तमान समय में सामाजिक व्यवस्था में नकल करने की प्रवृत्ति को दोष समझा जाता है, समाज उन्हें हेय दृष्टि से देखता है। शिक्षा विभाग में तो नकल की प्रवृत्ति को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। शासन द्वारा परीक्षा में नकल रोकने के लिए अनेक नित नए नूतन प्रयास किए जा रहे हैं। अपने दैनिक जीवन में अच्छे कार्य की नकल करने की प्रवृत्ति और शौक ने एक शिक्षक के जीवन में अद्भुत, अद्वितीय, अकल्पनीय, असंभव परिवर्तन कर दिया है । शिक्षक द्वारा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा व विरासत को वैश्विक पटल पर भारत के नाम स्वर्णाक्षरों में एकल अमिट सर्वश्रेष्ठ विश्व रिकॉर्ड के रूप में नामांकित कराया गया है।
उल्लेखनीय है कि भारत में मध्यप्रदेश के कटनी जिलांतर्गत विकासखण्ड बड़वारा के जनशिक्षा केन्द्र भुड़सा की आश्रित प्राथमिक शाला महगवां के शिक्षक आचार्य राजा भैया सोनी ने हर अच्छे प्रेरणास्पद कार्यौं के नकल करने की प्रवृत्ति को सुकर्म में परिवर्तित करके शिक्षा विभाग ही नहीं संपूर्ण शैक्षिक लोकसेवकों को गौरवान्वित किया है। शिक्षक सोनी ने बचपन में घर मोहल्ले में लोगों को विशेष अवसरों पर बेटियों की पूजा करने की परंपरा को देखते हुए उससे प्रेरित होकर अपने संपूर्ण जीवनकाल में दैनिक दिनचर्या में अपनाकर इस शब्द और प्रवृत्ति को महिमा मंडित किया है। आपके द्वारा आजीवन प्रतिदिन कन्याओं का पूजन करके ही अपनी दैनिक दिनचर्या की शुरुआत करने का पवित्र संकल्प लिया गया है। विगत तीन दशकों से भी अधिक समय से आपके द्वारा प्रतिदिन त्रिकाल समय में शाला में अध्ययनरत समस्त जाति की बेटियों का बिना किसी भेदभाव के पवित्र गंगाजल से पाद प्रक्षालन कर अमृत जल का पान कर, उपहार आदि सामग्री प्रदान कर सम्मानित कर देवी स्वरूपा बेटियों से आशीर्वाद लेकर ही अध्यापन कार्य किया जाता है। अवकाश के दिवसों में यही कार्य मोहल्ला की बेटियों का सम्मान कर अपने पवित्र संकल्प को निरंतरता तथा जीवंत रखा गया है। इस कार्य को आपने नमामि जननि सुकर्म यात्रा नाम प्रदान किया है तथा इसे इंडिया, एशिया बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड व अनेक वैश्विक पटल पर भारत के नाम एक अमिट सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड के रूप में नामांकित कराया है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटियों का सम्मान करो के इस अभियान को सही मायने में महिला सशक्तिकरण के संवर्धन और अंधविश्वास, अज्ञानता, अशिक्षा, अस्पृश्यता निवारण जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन की दिशा में एक सार्थक और प्रभावशाली प्रयास के रूप में जनमानस में देखा जाने लगा है। शिक्षक द्वारा इस अनूठे नवाचार कार्य की सत्यता की प्रमाणिकता के लिए एक दैनिक रिकॉर्ड भी संधारित कर बेटियों, पालकों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों से समय समय पर प्रमाणित कराया गया है । इस कार्य को अनेक समाचार पत्रों, सोशल मीडिया, टी.वी. न्यूज चैनलों, मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रचारित-प्रसारित किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अपने हर शासकीय कार्य का शुभारंभ बेटियों के सम्मान के साथ शुरु करने की परंपरा अपनाने के ऐतिहासिक निर्णय का शिक्षक ने स्वागत कर धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है। बेटियों के सम्मान को प्राथमिकता देते हुए शिक्षक आचार्य सोनी को स्थानीय, जिला प्रशासन और राज्य शासन द्वारा अनेक मंचों पर पुरस्कृत किया गया है।
विद्वानों के समूह की ऐसी मान्यता है कि किसी भी युग, धर्म, जाति, सम्प्रदाय, पंथ और ग्रंथों में इस प्रकार के सुकर्म का आदिकाल में उल्लेख नहीं है परिणामस्वरूप भगवत्कृपा से संचालित यह सृष्टि और युग का एक अनोखा कार्यक्रम है जिसे अच्छे लोगों द्वारा सराहा और आत्मसात किया जा रहा है । समाज में बेटियों और नारियों के सम्मान, सुरक्षा, सेवा सुनिश्चित करने और विकृत मानसिकता के लोगों में नैतिकता को जागृत करने की मंशा से संचालित इस कार्य को शिक्षक द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के नैतिक शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वैश्विक जगत में नारी सम्मान और भारत की गौरवशाली संस्कृति को अमिट स्थान प्रदान कर स्वर्णाक्षरों में अंकित करवाने वाले इस युगपुरुष को शुभचिंतकों, शिक्षकों, और विभिन्न संगठनों ने अपना आशीर्वाद प्रदान कर उज्जवल भविष्य की कामना की है।

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