गजाधर तालाब में गणेश विसर्जन, गणपति बप्पा को नम आंखों से दी गई विदाई

रिपोर्टर : मनीष यादव
पलेरा । गणेश विसर्जन से पहले होगी बप्पा की विशेष पूजा, विधि और मुहूर्त हर साल अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है और उनसे अगले बरस जल्दी आने का आग्रह किया जाता है. शास्त्रों में गणपति विसर्जन से पहले उत्तर पूजा का महत्व बताया गया है
इस साल 27 अगस्त से गणेश उत्सव की शुरुआत हुई थी और अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन हुआ है. हर साल इसी दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है और उनका विधिवत विसर्जन किया जाता है. गणेश महोत्सव के इस अंतिम दिन गणपति की आखिरी पूजा हुई, जिसे उत्तर पूजा कहा जाता हैं।
विसर्जन से पहले होगी उत्तर पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन से पहले उत्तर पूजा का विधान है. यह बप्पा को सम्मानपूर्वक विदाई देने और उनसे अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगने का विशेष अनुष्ठान है. इसमें पंचोपचार पूजा की जाती है, जिसमें गणपती जी को गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, मोदक और दूर्वा अर्पित किए जाते हैं गणेश महोत्सव में नगर में जगह-जगह पंडाल सजाकर गणपति बप्पा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थी गणेश महोत्सव 10 दिवस के इस महोत्सव में श्रद्धालुओं के द्वारा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर विधि विधान से गणपति बप्पा की पूजा अर्चना की धार्मिक अनुष्ठान पूजा पाठ विधि विधान से नाना प्रकार के पकवान मिठाइयां समर्पित की गई 10 दिनों तक गणेश झांकियां में श्रद्धालुओं का तांता लगता रहा है आज गणेश अनंत चतुर्दशी पर नगर के चिन्हित स्थानों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं को गाजे-बाजे के साथ विसर्जन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा गणपति बप्पा मोरिया के जयकारों से नगर गुंजा श्रद्धालुओं के द्वारा गजाधर तालाब के पास विधि विधान से गणपति बप्पा की आरती उतारी गई श्रद्धालुओं के द्वारा नगर की सुख समृद्धि की कामना की गई साथ ही गणपति बप्पा से अगले बरस जल्दी आने की प्रार्थना की गई पुलिस प्रशासन की चाक चौबंद व्यवस्था देखने को मिली नगर परिषद और प्रशासन की गणेश विसर्जन में महत्वपूर्ण भूमिका देखने को मिली।
पंचांग के अनुसार, इस बार गणेश विसर्जन के लिए सुबह से लेकर रात तक अलग-अलग प्रहर में कई अबूझ मुहूर्त हैं. विसर्जन से मुहूर्त से पहले आप उत्तर पूजा कर सकते हैं।
गणेश विसर्जन का महत्व
गणेश विसर्जन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन के गहरे संदेश को दर्शाता है. भक्त ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के साथ बप्पा से पुनः आने की प्रार्थना करते हैं. मान्यता है कि विसर्जन के साथ ही भगवान गणेश अपने भक्तों के दुख और विघ्न हर लेते हैं. गणेश चतुर्थी पर हम भगवान गणेश को प्राण-प्रतिष्ठा के साथ आमंत्रित करते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित कर प्रकृति को वापस लौटा देते हैं।
गणपति विसर्जन से पहले भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना करना आवश्यक है. उनसे अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और उनके आशीर्वाद से सुख-समृद्धि की कामना करें. इतना ही नहीं, अपनी मनोकामना कहने के बाद बप्पा से अगले बरस आने की प्रार्थना भी करें।



