अडिग जज़्बा और अटूट विश्वास की मिसाल: एक पैर पर पथ संचलन करता यह युवक बना प्रेरणा का प्रतीक

सिलवानी। संगठन की शक्ति और आत्मबल की परिभाषा तब साक्षात देखने को मिली, जब सिलवानी तहसील के ग्राम मुआर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भव्य पथ संचलन में एक विशेष दृश्य सबकी आँखों को नम कर गया। यह कोई साधारण दृश्य नहीं था, यह एक जीवंत प्रेरणा थी एक ऐसा युवक, जो शारीरिक रूप से अक्षम होते हुए भी पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ पथ संचलन में शामिल था।
अपने एक पैर के सहारे चल रहा यह युवक किसी लाठी का सहारा नहीं लिए था, बल्कि उसके हौसले ने उसे सहारा दिया था। संघ के घोष की गूंज के बीच उसका हर कदम ‘संघे शक्ति कलौ युगे’ के मंत्र की व्याख्या कर रहा था मानो कह रहा हो कि शक्ति शरीर में नहीं आत्मा और संकल्प में होती है।
जहाँ अन्य स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे, यह युवक जैसे उन्हें राह दिखा रहा था कि देशभक्ति किसी शारीरिक पूर्णता की मोहताज नहीं होती, बल्कि यह तो एक आंतरिक पुकार होती है जो किसी भी बाधा को पार कर जाती है।



