चौथे दिन भी खितौला–सिहोरा पूर्णतः बंद, जनता का गुस्सा काबू से बाहर

अस्पताल में भर्ती पूर्व प्रचारक द्वारा आज अस्पताल छोड़ देने की चेतावनी
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । सिहोरा जिला की मांग को लेकर चल रहा जनांदोलन लगातार चौथे दिन भी उफान पर रहा। सिहोरा–खितौला बाज़ार पूरी तरह बंद रहे, सड़कों पर सन्नाटा और लोगों में गहरा आक्रोश साफ नज़र आया। सरकार की लगातार बेरुखी और ठोस निर्णय न लेने से आंदोलन और अधिक उग्र होता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ बंद नहीं, बल्कि सिहोरा के सम्मान और हक़ की लड़ाई है ।वही अस्पताल में भर्ती किए गए प्रमोद साहू ने आज अस्पताल छोड़ देने की चेतावनी दी ।
जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे, लेकिन सिहोरा वासियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब किसी भी आश्वासन या टालमटोल की बातचीत नहीं चलेगी—“जिला से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं। सीईओ ने अपनी ओर से कहा कि शनिवार को जबलपुर आ रहे उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से अनशन कारियों की वार्ता करा कोई हल निकालने का प्रयास करेंगे। बैठक के दौरान जनता का गुस्सा साफ झलक रहा था। आंदोलनकारियों ने कहा कि वर्षों से सिहोरा को जिला बनाने की मांग सिर्फ फ़ाइलों में घूमती रही है, अब जनता ने तय कर लिया है कि निर्णायक संघर्ष के बिना पीछे नहीं हटेंगे।
इधर धरना स्थल पर चार लोग रामजी शुक्ला, अमोल चौरसिया, बालगिरी जी महाराज,नितेश खरया, अन्न सत्याग्रह पर बैठे हुए हैं । इनका कहना है कि जब तक सिहोरा जिला घोषित नहीं होता, तब तक एक-एक सांस आंदोलन के लिए समर्पित रहेगी । धरना स्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं। वातावरण पूरी तरह जिला आंदोलन के नारों से गूंज रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति आमरण सत्याग्रह कर रहे प्रमोद साहू की है, जिन्हें तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती किया गया था । बावजूद इसके प्रमोद साहू ने आज घोषणा की है कि वह अस्पताल छोड़ देंगे और किसी प्रकार का स्वास्थ्य लाभ नहीं लेंगे । उनका कहना है—”स्वास्थ्य से बड़ा सिहोरा जिला है । जब तक जिला नहीं बनता, तब तक यह संघर्ष नहीं रुकेगा। इस घोषणा ने आंदोलन को और तीखा कर दिया है।
सिहोरा में जनता का माहौल ऐसा है कि लोग अब पीछे हटने को तैयार नहीं। स्थान–स्थान पर महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, युवाएं और व्यापारी सभी एक ही आवाज़ में कह रहे हैं—“अबकी बार, सिहोरा जिला बनाकर ही दम लेंगे। आंदोलन लगातार तेज़ होता जा रहा है और प्रशासन पर भारी दबाव साफ महसूस होने लगा है।



