मध्य प्रदेश

उमरियापान पंचायत में विकास नहीं, विनाश का मॉडलसड़क के ऊपर सड़क डालकर शासकीय राशि की खुली लूट

सरपंच–सचिव–उपयंत्री की तिकड़ी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान ।  ढीमरखेड़ा जनपद की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत उमरियापान में विकास के नाम पर शासकीय धन की खुली लूट का गंभीर मामला सामने आया है।  यहां वार्ड क्रमांक 11 एवं 12 में पहले से बनी सड़क के ऊपर ही नई सड़क का निर्माण कराकर लाखों रुपये की राशि को ठिकाने लगाया जा रहा है, जबकि पंचायत के कई ऐसे मोहल्ले और बस्तियां हैं जहां आज भी ग्रामीण कीचड़, गड्ढों और कच्चे रास्तों से होकर गुजरने को मजबूर हैं ।  यह पूरा मामला ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और उपयंत्री की कथित मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जिसमें शासन के नियम-निर्देशों को ताक पर रखकर कार्य कराया जा रहा है  ।
*जहां जरूरत नहीं, वहीं निर्माण जहां जरूरत है, वहां उपेक्षा*
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में कई ऐसे मार्ग हैं जहां आज तक पक्की सड़क का नामोनिशान नहीं है।  बरसात के दिनों में बच्चों का स्कूल जाना, मरीजों का अस्पताल पहुंचना और किसानों का आवागमन किसी चुनौती से कम नहीं होता ।  बावजूद इसके पंचायत प्रशासन ने उन स्थानों को प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि वहां सड़क का निर्माण कराया जा रहा है जहां सड़क पहले से मौजूद है। यह स्थिति सीधे-सीधे योजना के उद्देश्य, आवश्यकता-आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
*मशीनों से कराया जा रहा श्रम आधारित कार्य*
ग्रामवासियों ने बताया कि सड़क निर्माण कार्य मशीन फ्लोरी से कराया जा रहा है, जबकि जिस योजना के अंतर्गत यह कार्य स्वीकृत हुआ है, उसके नियमों में श्रम-प्रधान कार्य कराना अनिवार्य है । मौके पर महज 4–5 मजदूर दिखावे के लिए लगाए गए हैं, जबकि वास्तविक कार्य मशीनों से कराया जा रहा है ।  इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि स्थानीय मजदूरों के रोजगार अधिकार पर भी सीधा हमला किया जा रहा है।
*ग्रामीणों का आरोप रोजगार छीना जा रहा, पलायन को मजबूर*
ग्रामीण मजदूरों का कहना है कि मशीनों के उपयोग के कारण उन्हें काम नहीं मिल पा रहा ।  पंचायत स्तर पर रोजगार देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं । परिणामस्वरूप गरीब मजदूर परिवारों को पलायन करना पड़ रहा है ।  यह स्थिति संविधान के सामाजिक न्याय और आजीविका के अधिकार की भावना के भी विपरीत है ।
*क्या कहते है नियम व प्रावधान*
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ( मनरेगा ), 2005 धारा 3 ( 1 ) ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष न्यूनतम 100 दिन का मजदूरी रोजगार देने की गारंटी । मनरेगा के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्य श्रम-प्रधान होंगे, मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है ।  उल्लंघन मशीनों से कार्य कराकर मजदूरी घटाई गई, रोजगार छीना गया ।  मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 धारा 49 एवं 92 पंचायत प्रतिनिधि और कर्मचारी शासकीय धन के संरक्षण और सही उपयोग के लिए जिम्मेदार ।  आवश्यकता के विपरीत कार्य स्वीकृत कर शासकीय धन का दुरुपयोग।वित्तीय नियम एवं सामान्य वित्तीय नियम Rule 21, 149, 173 सार्वजनिक धन का उपयोग उद्देश्य, पारदर्शिता और मितव्ययिता के सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए। पहले से बनी सड़क पर पुनः निर्माण कर अनावश्यक व्यय ।  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 ( संशोधित 2018 ) धारा 7 एवं 13(1)(d) लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग कर स्वयं या किसी अन्य को अनुचित लाभ पहुंचाना अपराध ।  संभावना बिल भुगतान, कमीशनखोरी और फर्जी मस्टर रोल के माध्यम से लाभ ।  भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 409 लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग ।  धारा 420 धोखाधड़ी ।  धारा 120-B आपराधिक षड्यंत्र ।  निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति, माप-पुस्तिका (एमबी) और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी उपयंत्री की होती है ।  बावजूद इसके मशीनों से कार्य, मानक से अधिक मोटाई कम मोटाई, और अनावश्यक पुनर्निर्माण पर आंख मूंदे रहना मिलीभगत की ओर संकेत करता है ।  बिल, मस्टर रोल की यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति दर्ज नहीं ।  ग्रामवासियों ने कलेक्टर आशीष तिवारी से आग्रह किया है कि उमरियापान सरपंच सचिव द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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