ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 03 मार्च 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 03 मार्च 2026
03 मार्च 2026 दिन मंगलवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा तिथि है। आप स्नान – दान आदि की पुन्यतमा पूर्णिमा है। शास्त्राअनुसार आज होलिका दहन होना चाहिए परंतु आज रात्रि में पूर्णिमा तिथि का अभाव एवं चंद्र ग्रहण लगने के कारण एक दिन पहले ही यह उत्सव मान लिया गया है। तो लिए ग्रहण के विवरण को जान लेते हैं। खंडग्रास चंद्र ग्रहण- फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार (दिनांक 3 मार्च 2026) भारत में ग्रस्तोदित खंग्रासचंद्रग्रहण के रूप में दृश्य होगा तथा चंद्रोदय के समय केवल उसका मोक्ष दृश्य होगा। भारतीय समय अनुसार खंग्रासचंद्रग्रहण का प्रारंभ घं 16 मि. 34 पर होगा तथा उसका मोक्ष घं 3 मि. 28 की है। ग्रहण का मध्य घं. 17 मि. 04 पर होगा। इसका ग्रासमान 1.1526 होगा। आज श्री चैतन्य महाप्रभु जी की जन्म जयन्ती भी है। आप सभी सेनानियों को “श्रीचैतन्यमहाप्रभु जी के जन्म जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 05:07 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि मानी जाती है. इस तिथि के स्वामी स्वयं चन्द्र देव हैं. इस दिन सूर्य और चन्द्रमा समसप्तक होते हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र मघा 07:31 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। देवता इस नक्षत्र के देवता पितृ (पूर्वज) हैं।
⚜️ योग – सुकर्मा योग 10:24 AM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण : बव 05:07 PM तक
द्वितीय करण: बालव 04:54 AM तक, बाद कौलव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:28:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:00:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : शाम को 29:05 मिनट से शाम को 29:55 बजे तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : शाम को 29:30 मिनट से सुबह 06:44 बजे तक
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर को 12:10 मिनट से दोपहर 12:56 बजे तक
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर में 14:29 मिनट से दोपहर 15:16 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:20 मिनट से शाम 18:44 बजे तक
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:22 मिनट से शाम 19:36 बजें तक
💧 अमृत काल : शाम को 25:13 मिनट से रात्रि 26:49 बजे तक
🗣️ निशिता मुहूर्त 24:08 मिनट से रात्रि 24:57 बजे तक
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – छोटी होली/ होलिका दहन/ वसन्त पूर्णिमा/ दोल पूर्णिमा/ लक्ष्मी जयन्ती, मासी मागम, अट्टुकल पोंगल/ पूर्ण, फाल्गुन अष्टाह्निका विधान पूर्ण, फाल्गुन पूर्णिमा व्रत/ फाल्गुन पूर्णिमा/ अन्वाधान/ सावर्णि मन्वादि/ आडल योग/ मन्वादि/ सत्यव्रत/ धूलण्डी/ सत्यव्रत/ छारेण्डी गणगौर पूजा प्रारंभ/ श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्ती/ भारत में दृश्य चंद्रग्रहण/ गंडमूल 07.32/ प्रसिद्ध हास्य अभिनेता जसपाल भट्टी जन्म दिवस, भारतीय उद्योगपति जमशेद जी टाटा जन्म दिवस, उपन्यासकार हरि नारायण आप्टे स्मृति दिवस, राष्ट्रीय ‘मैं चाहता हूँ कि आप खुश रहें’ दिवस, विश्व वन्यजीव दिवस, संगीतकार रविशंकर शर्मा जन्म दिवस, विश्व श्रवण दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips_ 🏚️
वास्तु दोष से बचने के टिप्स रात को सोते समय पर्स, पैसे, मोबाइल, किताबें और जूते-चप्पल पास रखने से वास्तु दोष पैदा होता है, जिससे तनाव और नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है। इस वास्तु टिप्स को अपनाकर मानसिक शांति, बेहतर स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता पाई जा सकती है। चलिए इसके बारे में यहां विस्तार से जानते हैं।
रात को सोते समय सावधानी शास्त्र कहता है कि बेहतर और सुकून भरी नींद के लिए रात को सोते समय व्यक्ति को कुछ चीजों को खुद से दूर रखना चाहिए। ये चीजें सिरहाने या बेड के पास रखकर सोने से से व्यक्ति कई तरह की आर्थिक और मानसिक परेशानियों से घिरा रहता है।
कौन-सी चीजें न रखें पास आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, सोते समय अपने पास कभी भी पर्स या बटुआ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से हर समय पैसों से संबंधित चिंता बनी रहती है और मानसिक उलझन पैदा होता है। आप सोते समय पैसों को किसी अलमारी या अन्य किसी सेफ जगह पर रख सकते हैं। किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसे मोबाईल फोन या घड़ी भी अपने पास रखकर नहीं सोना चाहिए। अपनी पढ़ाई-लिखाई से संबंधित चीज, अखबार या किताब को अपने तकिए के नीचे नहीं रखना चाहिए। इससे विद्या का अपमान होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
🏠 घर लाकर क्या करें
जड़ घर लाने के बाद उसकी पूजा करें –
स्नान कराएं – सबसे पहले जड़ को स्नान कराएं। पहले साफ पानी से, फिर दूध से, फिर गुड़ के पानी से, फिर शहद से। इस तरह जड़ को पवित्र करें।
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पूजा करें – अब जड़ को किसी साफ स्थान पर रखें। उसके सामने दीपक जलाएं। उस पर अक्षत (चावल) चढ़ाएं। उस पर टीका लगाएं। धूप दिखाएं। फूल चढ़ाएं।
प्रार्थना करें – अब हाथ जोड़कर प्रार्थना करें – “हे चिरचिटा देव! मुझे बुद्धि प्रदान करो। मेरी वाणी में तेज लाओ। मेरे व्यापार में वृद्धि करो। मैं आपको अपने पास रखूंगा और नियमित रूप से पूजा करूंगा।”
जड़ को धारण करने की विधि पूजा के बाद जड़ के थोड़े बड़े टुकड़े कर लें। बहुत छोटा न पीसें, थोड़ा बड़ा रखें ताकि उसकी ऊर्जा बनी रहे। इन टुकड़ों को आप दो तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं –
बाहों में धारण करना – जड़ के टुकड़ों को लाल कपड़े में लपेटकर बांध लें। पुरुष दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करें। इसे बाजू में बांध सकते हैं या फिर हाथ में कपड़े से लपेटकर रख सकते हैं। यह आपकी बुद्धि और व्यापार में वृद्धि करेगा।
दातुन के रूप में उपयोग – जड़ के एक टुकड़े को रोज सुबह दातुन की तरह उपयोग करें। इससे दांतों की पूजा तो होगी ही, सबसे बड़ी बात यह है कि आपकी वाणी बहुत तेजी से प्रभावशाली होगी। जो व्यक्ति इस जड़ से दातुन करता है, उसकी बातों में असर आता है। लोग उसकी बात मानने लगते हैं। उसकी वाणी में एक अलग ही तेज और शक्ति आ जाती है।
🎋 *आरोग्य संजीवनी* ☘️
हारसिंगार = पारिजात के 10-15 कोमल पत्ते को कटे फटे न हों तोड़ लाएँ। पत्ते को धो कर मिक्सी मे या कैसे ही थोड़ा सा कूट ले या पीस ले। बहुत अधिक बारीक पीसने कि जरूरत नहीं है। लगभग 200-300 ग्राम पानी (2 कप) मे धीमी आंच पर उबालें। तेज आग पर मत पकाए। चाय की तरह पकाए। चाय कि तरह छान कर गरम गरम पानी (काढ़ा) पी ले। पहली बार मे ही 10% फायदा होगा। प्रतिदिन 2 बार पिए । यदि आप ऑफिस जाते हैं तो दोगुना पानी उबाले। थर्मस मे भरकर ले जाएँ। इस हरसिंगार के पत्तों के काढ़े से 15 मिनट पहले और बाद तक ठंडा पानी न पीए। दही लस्सी और आचार न खाएं। इसके साथ महावात विध्वन्सन रस की 1-2 गोली दिन में 2 बार लेने से जल्द लाभ होता है।
पारिजात एक पुष्प देने वाला वृक्ष है। इसे परिजात, हरसिंगार, शेफाली, शिउली आदि नामो से भी जाना जाता है। इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊँचा होता है। इसका वानस्पतिक नाम ‘निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस’ है। पारिजात पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं।यह सब स्थानो पर मिलता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान है सफ़ेद फूल केसरिया डंडी। सुबह सब फूल झड जाते है ।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
नथिया बाई अपने माता-पिता की लाड़ली संतान थीं। लेकिन नियति को उनकी भक्ति का कड़ा इम्तिहान लेना था। विवाह के कुछ ही समय बाद सुहाग छिन गया और अभी यह ज़ख्म भरा भी नहीं था कि उनके इकलौते भाई ने भी संसार छोड़ दिया।
एक साधारण स्त्री शायद इन थपेड़ों से टूट जाती, लेकिन नथिया बाई ने अपने आँसुओं को ठाकुर जी के चरणों का अभिषेक बना लिया। उनके लिए दुनिया सिमटकर संतों की सेवा और भक्ति तक रह गई।
भाई के जाने के बाद चचेरे भाई ने उन्हें संतों की सेवा से रोकने का प्रयास किया। नथिया बाई के लिए यह मात्र रोक नहीं, बल्कि प्राणों पर संकट जैसा था। व्याकुल होकर उन्होंने श्री बाँके बिहारी जी के आगे झोली फैला दी:
“हे सांवरिया! यदि मेरी निष्काम सेवा में सत्य है, तो मार्ग तुम दिखाओ। तुम्हारे बिना मेरा इस जगत में कोई नहीं।”
पुकार सुनी गई। मोह-माया की बेड़ियाँ काटकर नथिया बाई वृंदावन की ओर चल पड़ीं। बिना किसी संसाधन, बिना किसी सहारे के उन्होंने जंगल और शहर की सीमा पर संतों और दीन-दुखियों की सेवा शुरू कर दी।
एक बार रक्षाबंधन के पावन पर्व पर नथिया बाई का हृदय भावुक हो उठा। भाई की कमी खली, तो सीधे बाँके बिहारी के दरबार जा पहुँचीं। उन्होंने किसी मनुष्य को नहीं, बल्कि साक्षात् जगत के स्वामी को अपना भाई माना और प्रेम की राखी अर्पित की। उस दिन से ठाकुर जी न केवल उनके आराध्य रहे, बल्कि उनके ‘भैया’ बन गए।
कहते हैं जब भक्त सब कुछ त्यागकर केवल प्रभु पर निर्भर हो जाता है, तो उसकी चिंता स्वयं नारायण करते हैं। एक समय ऐसा आया जब नथिया बाई के पास संतों को खिलाने के लिए एक दाना भी न बचा। उनकी आँखों में पानी था कि आज संत भूखे रहेंगे।
तभी एक अनजान सेठ आया और ढेर सारा गेहूं पिसवाने के लिए दे गया। जैसे ही नथिया बाई ने ‘राधे-राधे’ जपते हुए पत्थर की चक्की घुमाना शुरू किया, एक अलौकिक चमत्कार हुआ:
चक्की से आटे के साथ सोने के कण झड़ने लगे।
*
यह बाँके बिहारी की गवाही थी कि उनके भक्त के भंडारे कभी खाली नहीं रह सकते।
नथिया बाई की निष्काम भक्ति ऐसी थी कि सांवरिया ने उन्हें कई बार साक्षात् दर्शन दिए। वह केवल प्रार्थना नहीं करती थीं, वह प्रभु से बातें करती थीं, उन्हें दुलारती थीं।
आज की प्रासंगिकता: आज भी वृंदावन के तटीया स्थान के पास उनकी स्मृति जीवंत है। वहाँ होने वाली संत सेवा हमें याद दिलाती है कि:* श्रद्धा में वह बल है जो पत्थर से सोना निकाल सके।*
भगवान केवल मंदिर की मूर्ति नहीं, बल्कि हर उस हाथ में हैं जो सेवा के लिए उठता है।
*_नथिया बाई का जीवन हमें सिखाता है कि जब संसार साथ छोड़ दे, तब भी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि उस मोड़ पर स्वयं बिहारी जी हाथ थामने के लिए खड़े होते हैं।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।।
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।।

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