
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग
🧾शुक्रवार 24 अप्रैल 2026
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । *शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – बैशाख मास प्रारम्भ🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष📅 तिथि – शुक्रवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 07:22 PM तक उपरांत नवमी📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।💫 नक्षत्र- नक्षत्र पुष्य 08:14 PM तक उपरांत आश्लेषा🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं। पुष्य नक्षत्र के मुख्य देवता देवगुरु बृहस्पति (गुरु) हैं।⚜️ योग : शूल योग 01:24 AM तक, उसके बाद गण्ड योग⚡ प्रथम करण : विष्टि 08:01 AM तक✨ द्वितीय करण : बव 07:22 PM तक, बाद बालव🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:40:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:29:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:19 ए एम से 05:03 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:41 ए एम से 05:47 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:53 ए एम से 12:46 पी एम✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:23 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:51 पी एम से 07:13 पी एम🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:52 पी एम से 07:57 पी एम💧 अमृत काल : दोपहर 02:01 पी एम से 03:35 पी एम🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:57 पी एम से 12:41 ए एम, अप्रैल 25❄️ रवि योग : शाम 08:14 पी एम से 05:46 ए एम, अप्रैल 25🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ पर्व एवं त्यौहार – बगलामुखी जयन्ती/ मासिक दुर्गाष्टमी/ भद्रा/ गण्ड मूल/ रवि योग/ आडल योग/ रुद्र अवतार माँ पीताम्बरा बगलामुखी जी प्राकट्योत्सव/ अभिनेता वरुण धवन जन्म दिवस, राष्ट्रीय बकेट लिस्ट दिवस, अन्तर्राष्ट्रीय किक्रेटर सचिन रमेश तेंदुलकर जन्म दिवस, फैशन क्रांति दिवस, हेयरबॉल जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय पिग्स-इन-ए-ब्लैंकेट दिवस, न्यू किड्स ऑन द ब्लॉक दिवस, अभिनेता मैक मोहन जन्म दिवस, राजस्थान के भूरपूर्व मुख्यमंत्री टीका राम पालीवाल जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी विष्णु राम मेधी जयन्ती, आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा स्मृति दिवस, मानव एकता दिवस, विश्व प्रयोगशाला-पशु दिवस, भारतीय जल संसाधन दिवस, विश्व मूर्तिकला दिवस, राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (National Panchayati Raj Day)✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।🌷 Vastu tips 🌸बेडरूम में टीवी, लैपटॉप या बहुत सारे मोबाइल फोन नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार, इन चीजों को बेडरूम में रखने से राहु का प्रभाव बढ़ सकता है। इन उपकरणों से नकारात्मक ऊर्जा और रेडिएशन निकलती है, जो नींद की कमी और मानसिक अशांति पैदा करती है। साथ गी पति-पत्नी की आपसी संवाद को भी प्रभावित कर देती है।तस्वीरें बेडरूम में कभी भी ताजमहल या अन्य प्रकार के मकबरा को न रखें। इसके अलावा बेडरूम में पूर्वजों की तस्वीरें भी कभी नहीं रखनी चाहिए। इसके नकारात्मक असर पड़ता है। दीवारों पर महाभारत के युद्ध, जंगली जानवरों के शिकार या रोते हुए बच्चे की तस्वीरें भी न लगाएं। ऐसी तस्वीरें रखने से दंपति के बीच छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगते हैं।*ये चीजें भी बेडरूम में न रखें बहते हुए पानी की तस्वीर, शो पीस या फव्वारा, बेड के नीचे पुराना सामान, जूते चप्पल, टूटे बर्तन, फटे-पुराने कपड़े, कबाड़, बंद घड़ियां या टूटी चीजें भी बेडरूम में न रखें। इन चीजों को रखने से भी बेडरूम में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ सुबह खाली पेट किशमिश खाएं। भीगी हुए किशमिश खाएंगे तो ज्यादा फायदेमंद होती है। किशमिश में मौजूद पोषक तत्व, स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। *गुड़ को बेहद लाभदायक माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, बासी मुंह गुड़ खाना चाहिए। अगर गुड़ के साथ गुनगुना पानी भी हो तो बहुत अच्छा है। शरीर को काफी ऊर्जा मिलती है। इससे खून साफ होता है व कई तरह की बीमारी दूर होती है। इससे पूरे दिन एसिडिटी नहीं होती है।*सुबह उठकर खाली पेट लहसुन की कली खाएं। पाचन के लिए तो ये रामबाण है। अगर किसी को पेट फूलने की समस्या होती है तो उसके लिये ये काफी फायदेमंद रहेगा। *सुबह उठकर भीगे बादाम खाएं। इसमें प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन ई, कैल्शियम आदि पोषक तत्व होते हैं। बादाम जब भी खाएं इसके छिलके उतारकर खाएं। इससे यह ज्यादा लाभ देती है।🫗 *आरोग्य संजीवनी* 🍶थकान बने रहने के निम्न कारण हो सकते हैं-*डायबिटीज- रक्त में ग्लूकोज की अधिक मात्रा थकान बने रहने का कारण बनती है। *थाइराइड- यदि थायराइड जनक बीमारी है तो भी थकान बनी रहती है।*हीमोग्लोबिन- रक्त में हीमोग्लोबिन कम होने पर शरीर को ऊर्जा एवं ऑक्सीजन की पूर्ति ठीक से न होने के कारण थकान बनी रहती है। *पानी की कमी- यदि पानी उचित मात्रा में न पिया जाए तो भी कमजोरी महसूस होती है।कमजोर पाचनतंत्र- पाचन सम्वन्धी समस्या के कारण भी थकान व कमजोरी बनी रहती है।*हृदय सम्बन्धी रोग- हार्ट में ब्लॉकेज शुरू होने पर हार्ट को खून बराबर नहीं मिल पाता है। इससे थकान बनी रहती है। *उपरोक्त समस्याओं के जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। यदि उपरोक्त में कोई समस्या नहीं है तो अपने भोजन में मौसम की सभी उपलब्ध सब्जियां, फल, अनाज अदल बदल कर शामिल करें। थोड़ा व्यायाम करें।📖 गुरु भक्ति योग 🕯️गरुड़ पुराण में मृत्यु, आत्मा और पुनर्जन्म के संबंध में विस्तार से बताया गया है। भगवान विष्णु ने अपने पक्षी गरुड़ राज को जन्म-मृत्यु का जो ज्ञान दिया था उसे ही गरुड़ पुराण में संग्रहित किया गया है। गरुड़ पुराण में यह भी जानकारी दी गई है कि मृत्यु के ठीक बात आत्मा के साथ क्या होता है। खासकर मृत्यु के बाद के 13 दिन आत्मा के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि मृत्यु के 13 दिनों के भीतर आत्मा कहां रहती है, किन परिस्थितियों का सामना आत्मा को करना पड़ता है और 13 दिन के बाद कहां जाती है।*मृत्यु के बाद 13 दिनों तक आत्मा का प्रवास गरुड़ पुराण में वर्णित है कि मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा यमलोक के लिए प्रस्थान नहीं करती। 13 दिनों तक आत्मा अपने घर के लोगों के बीच ही रहती है और आत्मा को मोह, अनिश्चितता का अनुभव होता रहता है। आत्मा ने जीवित होते हुए जो अच्छे-बुरे कर्म किए होते हैं उन पर विचार करती है। इन 13 दिनों के भीतर घर के लोगों को मृतक की उपस्थिति का अहसास होता रहता है। *यमदूत आत्मा को छोड़ते हैं परिजनों के पास गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद यमदूत आत्मा को ले जाते हैं और कुछ समय बाद वापस उसे उसके घर पर छोड़ देते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि आत्मा अंतिम संस्कार और पिंडदान की आहुति को ग्रहण कर सके।*पिंडदान और पाथेय मृत्यु के 13 दिनों के भीतर घर के लोग मृत व्यक्ति का पिंडदान और उसके निमित्त तर्पण करते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार पिंडदान करने से आत्मा को यमलोक की लंबी यात्रा तय करने के लिए पाथेय मिलता है। पाथेय यानि यात्रा करने के लिए पर्याप्त भोजन और शक्ति। जो लोग अपने परिजनों का पिंडदान और तर्पण नहीं करते उने पूर्वजों की आत्मा भटकती रहती है, इसलिए 13 दिनों के भीतर पिंडदान करना बेहद आवश्यक माना गया है। *तेरहवीं क्यों है आवश्यक? गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के 13वें दिन पर संपिंडीकरण और अन्य संस्कार अवश्य पूरे किए जाने चाहिए। संपिडीकरण के बाद ही आत्मा को यमलोक की यात्रा के लिए अनुमति मिलती है और आत्मा परिजनों के मोह से मुक्त होकर आगे बढ़ जाती है।गरुड़ पुराण का पाठ अब आप जान गए होंगे कि मृत्यु के 13 दिनों तक आत्मा घर के लोगों के बीच ही रहती है। इसलिए इन 13 दिनों के भीतर गरुड़ पुराण का पाठ घर में करना शुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण का पाठ करके आत्मा को मोक्ष प्राप्त करने और मोह के बंधन तोड़ने में मदद मिलती है। ••••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••• ⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।


