ज्योतिष

23 अप्रैल 2026 गंगा सप्तमी जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और इसका महत्व पूजा विधि एवं कथा

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

🌊 23 अप्रैल 2026 गंगा सप्तमी जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और इसका महत्व पूजा विधि एवं कथाहिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा के कमंडल से माँ गंगा का अवतरण हुआ था, इसलिए इस तिथि को गंगा जी के प्राकट्य दिवस के रूप में भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। ऐसा विश्वास है कि गंगा सप्तमी के दिन श्रद्धा भाव से गंगा स्नान करने या गंगा जल से आचमन करने से व्यक्ति के अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है। गंगा स्नान को केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से रोग, दोष और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से गंगा सप्तमी के शुभ मुहूर्त में की गई पूजा और साधना को मोक्षदायी बताया गया है। इसलिए भक्त इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से माँ गंगा की आराधना करते हैं। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से वर्ष 2026 में गंगा सप्तमी कब मनाई जाएगी, इसकी सही तिथि क्या है, पूजा विधि कैसे करें और इस पावन दिन क्या करना शुभ माना गया है।⚛️ *_गंगा सप्तमी 2026 मुहूर्त_*पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का प्रारंभ 22 अप्रैल 2026 को रात 10 बजकर 49 मिनट पर होगा और इसका समापन 23 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 49 मिनट पर होगा।यह पर्व उदयातिथि के अनुसार माना जाता है, इसलिए गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।🏙️ *गंगा सप्तमी मध्याह्न मुहूर्त:_*सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक पूजा का शुभ समय रहेगा।🤽🏼 *स्नान का शुभ समय:_*सुबह 5 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 26 मिनट तक गंगा स्नान का विशेष पुण्यकाल माना गया है।इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और माँ गंगा की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।✡️ *गंगा सप्तमी 2026 की तिथि और शुभ योग_*इस बार गंगा सप्तमी पर गुरु पुष्य योग का संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जाता है। शास्त्र के अनुसार, ऐसे शुभ योग में किए गए धार्मिक कार्य और दान-पुण्य का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।📖 *गंगा सप्तमी की सरल पूजा विधि_*गंगा सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करें। गंगा नदी में स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।_*अगर यह संभव नहीं है तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।_*घर पर पूजा करते समय तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें गंगाजल मिलाकर अर्घ्य अर्पित करें।_*गंगा मां को फूल, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।_*शाम के समय गंगा तट पर दीपदान करना शुभ माना जाता है।_*घर में गंगाजल से शुद्धिकरण करें और मां गंगा की आरती करें।_*इसके बाद ‘ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिणी नारायणी नमो नमः’ मंत्र का जाप करें।_*साथ ही इस दिन जरूरतमंद लोगों को फल या अन्य वस्तुओं का दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है।🤷🏻‍♀️ *गंगा सप्तमी पर क्या करें_*गंगा सप्तमी का दिन आत्मशुद्धि और पुण्य अर्जित करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे नियम और सत्कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का मार्ग खोल सकते हैं।_*गंगा स्नान करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखें। स्नान करते समय मुख नदी की धारा या सूर्य की ओर रखना शुभ माना जाता है। इससे आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है।_*इस पावन दिन भगवान सूर्यदेव को गंगाजल से अर्घ्य दें और माता गंगा को श्रद्धा भाव से दूध अर्पित करें। ऐसा करना पवित्रता और शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है।_*स्नान के दौरान मन को शांत और सकारात्मक रखें। नकारात्मक विचारों से दूर रहकर पूर्ण श्रद्धा के साथ स्नान करने से अधिक पुण्य फल मिलता है।_*गंगा तट या स्नान स्थल पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। पवित्र स्थान की सफाई बनाए रखना भी एक प्रकार की सेवा मानी जाती है।_*स्नान के पश्चात गंगा लहरी या गंगा स्तोत्र का पाठ करें। मान्यता है कि इससे गंगा स्नान का पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।_*अंत में, अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना इस दिन अत्यंत शुभ माना गया है।👉🏼 गंगा सप्तमी के दिन क्या उपाय करें?_*_धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,गंगा सप्तमी के दिन गंगाजल में काला तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा करने से आर्थिक दिक्कतें कम हो सकती हैं।*_गंगा सप्तमी के दिन गंगाजल में कपूर मिलाकर पूरे घर में छिड़काव करें। इससे घर की नजर और नेगेटिव एनर्जी दूर की जा सकती है।*_गंगा सप्तमी पितृ दोष से राहत के लिए गंगा तट पर पितरों के नाम से तर्पण करें।*_गंगा सप्तमी के दिन अनाज, तिल और वस्त्र किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें। इससे करियर में प्रमोशन के योग बनेंगे और नए मौके खुलेंगे।💁🏻‍♀️ *गंगा सप्तमी का महत्व_*पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। लेकिन, मां गंगा का वेग इतना तेज था कि अगर वह सीधे पृथ्वी पर आती तो काफी परेशानी हो सकती थी। तब मां गंगा के वेग को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में समाहित कर लिया था। मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा में स्नान करने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही पितरों की शांति और तर्पण के लिए भी यह दिन अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।🗣️ *_पौराणिक कथाएँ (उत्पत्ति और पुनर्जन्म)      *गंगा सप्तमी से जुड़ी दो प्रमुख कथाएँ हैं:_*        भगीरथ का प्रयास और शिव का जटाओं में धारण (गंगा का प्रथम अवतरण)*_इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र महर्षि कपिल के क्रोध से जलकर भस्म हो गए थे। उनकी आत्माओं को तब तक मोक्ष नहीं मिल सकता था जब तक स्वर्ग की नदी गंगा का पवित्र जल उन्हें स्पर्श न करे। राजा सगर की कई पीढ़ियों के बाद, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए घोर तपस्या की और माँ गंगा को स्वर्ग से धरती पर आने के लिए मना लिया। जब माँ गंगा अत्यंत तीव्र वेग से पृथ्वी पर उतरने लगीं, तो उनके प्रचंड वेग को धारण करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समाहित कर लिया। माना जाता है कि ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा शिव की जटाओं से धरती पर प्रवाहित हुईं, जिसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।         *_जह्नु ऋषि द्वारा गंगा को पीना और मुक्त करना (गंगा का पुनर्जन्म/जाह्नवी सप्तमी)*_जब गंगा नदी भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं, तो उनके प्रचंड वेग से जह्नु ऋषि का आश्रम, जहाँ वे तपस्या कर रहे थे, नष्ट हो गया। इस घटना से क्रोधित होकर, ऋषि जह्नु ने अपनी तपस्या की शक्ति से गंगा के पूरे जल को पी लिया। राजा भगीरथ, गंगा के पुनः रुक जाने से दुखी हुए और उन्होंने ऋषि जह्नु से गंगा को मुक्त करने के लिए प्रार्थना की। भगीरथ की विनती और देवताओं के आग्रह पर, ऋषि जह्नु का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन गंगा को अपने कान से बाहर निकाला। ऋषि जह्नु द्वारा पुत्री रूप में गंगा को मुक्त करने के कारण, इस तिथि को जाह्नवी सप्तमी भी कहा जाता है और माँ गंगा को जाह्नवी नाम मिला।

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