ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 02 जून 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾        
*मंगलवार  02 जून  2026_*
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *_दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*_मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*_मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – शुद्ध ज्यैष्ठ मासरंभ_*
🌔 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – मंगलवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 07:01 PM तक उपरांत तृतीया_*
✏️ *_तिथि स्वामी – द्वितीय तिथि (दूज) के स्वामी ब्रह्मा जी हैं, जिन्हें विधाता भी कहा जाता हैं, इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र मूल 10:06 PM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र के स्वामी ग्रह केतु हैं। मूल नक्षत्र के मुख्य देवता निरृति है। निरृति को विनाश, विध्वंस या आलस्य की देवी माना जाता है।_*
⚜️ *_योग – साध्य योग 07:15 AM तक, उसके बाद शुभ योग_*
⚡ *_प्रथम करण : तैतिल 05:49 AM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : गर 07:01 PM तक, बाद वणिज_*
🔥 *_गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।_*
🤖 *_राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।_*
⚜️ *_दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:22:35_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:15:06_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:02 ए एम से 04:43 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:23 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:52 ए एम से 12:47 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:38 पी एम से 03:33 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:14 पी एम से 07:34 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : सायं काल 07:15 पी एम से 08:16 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : दोपहर 02:55 पी एम से 04:43 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 11:59 पी एम से 12:39 ए एम, जून 03_*
🚓 *_यात्रा शकुन- मंगलवार को दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।_*
💁🏻‍♀️ *_आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।_*
🌴 *_वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – शुद्ध ज्यैष्ठ मासारंभ/ पुरुषोत्तम मास का 17वाँ दिन/ गण्ड मूल/ आडल योग/ विडाल योग/ नारद जयन्ती/ तेलंगाना स्थापना दिवस, फिल्म निर्देशक मणि रत्नम जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय यौनकर्मी दिवस, भारतीय व्यवसायी नटराजन चंद्रशेखर जयन्ती, मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर जन्म दिवस,  ‘पद्मभूषण’ से सम्मनित वैज्ञानिक प्राण कृष्ण पारिजा स्मृति दिवस, पृथ्वी राज चौहान जयन्ती, रानी अहिल्याबाई होल्करी पुण्य तिथि, अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा जन्म दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – द्वितीय तिथि को कटोरी फल का तथा तृतीया तिथि है नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। द्वितीय तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीय तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी को बताया गया है। यह द्वितीय की तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीय तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।          
🌷*_Vastu tips_* 🌹
मुख्य द्वार पर स्वस्तिक चिन्ह वास्तु में सबसे आवश्यक और शुभ मानी जाने वाली वस्तु स्वस्तिक है। स्वस्तिक को सूर्य, गणपति और मंगल का प्रतीक माना गया है।प्राचीन मान्यता है-
*_“स्वस्तिकं मंगलं चैव सर्वदोषनिवारणम्।”
*_अर्थात स्वस्तिक सभी प्रकार की नकारात्मकता को दूर कर मंगलकारी ऊर्जा को आकर्षित करता है।
*_नियम:- मुख्य द्वार के दोनों ओर या ऊपर लाल/कुमकुम से स्वस्तिक बनाना शुभ। ताम्र (कॉपर) का स्वस्तिक अधिक प्रभावी माना गया। टूटा या धुंधला स्वस्तिक अशुभ माना जाता है।
*_आम या अशोक के पत्तों का तोरण वास्तु शास्त्र में द्वार पर तोरण लगाना अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
*_विशेषत: आम के पत्ते, अशोक पत्र
*_गेंदे के फूलों का तोरण इनको सकारात्मक प्राण ऊर्जा का वाहक माना गया है।
*_वास्तु कारण – यह वातावरण की स्थिर एवं भारी ऊर्जा को संतुलित करता है।
*_अतिथि और देवशक्ति के स्वागत का प्रतीक माना गया है। नकारात्मक स्पंदनों को रोकने वाला माना जाता है। शास्त्रीय मत में कहा गया है कि जहाँ तोरण होता है वहाँ लक्ष्मी का स्थायित्व बढ़ता है।      
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*बेल फल के औषधीय गुण, स्वास्थ्य लाभ और उपयोग के तरीके:
🔸बेल (Bael) एक आयुर्वेदिक सुपर-फल है जो अपने उत्कृष्ट पाचन और शीतलता गुणों के लिए जाना जाता है। यह त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करता है और दस्त, कब्ज, तथा डायबिटीज जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद है।
🔹बेल फल के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ:*
*◼️1. पाचन तंत्र के लिए रामबाण:*
*बेल में मौजूद पेक्टिन और टैनिन आंतों को मजबूत करते हैं और पेचिश व दस्त (Diarrhea) में राहत देते हैं।
*◼️2. कब्ज से राहत:*
*पके हुए बेल का गूदा लैक्सेटिव (मल नरम करने वाला) का काम करता है, जो कब्ज को दूर करता है।
*◼️3. डायबिटीज नियंत्रण:* *बेल के फल और पत्तियों में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
*◼️4. लू और डिहाइड्रेशन से बचाव:*
*गर्मियों में इसका सेवन शरीर को हाइड्रेट रखता है और लू (Heatstroke) के प्रभाव को कम करता है।
*◼️5. इम्युनिटी बढ़ाता है:* *इसमें विटामिन सी, कैल्शियम, और आयरन भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।       
🍀 *आरोग्य संजीवनी* ☘️
शीशम के पत्तों के प्रमुख लाभ और उनका उपयोग निम्नलिखित है:
*_त्वचा और घाव में सुधार मुंहासे और एक्जिमा: शीशम के पत्तों में सूजनरोधी गुण होते हैं, जो एक्जिमा, मुंहासे और चकत्तों को ठीक करने में मदद करते हैं।
*_घाव भरना: पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव जल्दी भरते हैं और त्वचा की जलन कम होती है।
*_पाचन और पेट की समस्या दस्त और पेचिश: यह पेट को आराम देता है और दस्त जैसी समस्याओं में लाभकारी है।
*_पाचन शक्ति: इसके पत्तों का नियमित सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और पेट की गर्मी शांत करता है।
मूत्र संबंधी समस्याएं पेशाब में रुकावट: शीशम की पत्तियों का रस या काढ़ा पीने से रुक-रुक कर पेशाब आने की समस्या ठीक होती है।_*
*_आंखों की देखभाल आंखों में जलन: शीशम के पत्तों के रस में थोड़ा शहद मिलाकर (1-2 बूंद) आंखों में डालने से जलन और लालिमा से तुरंत राहत मिलती है।1mg
*_अन्य औषधीय उपयोग खून की कमी (एनीमिया): इसके पत्ते शरीर में खून बढ़ाने और कमजोरी दूर करने में सहायता करते है
*_जोड़ों के दर्द: शीशम के पत्तों का लेप जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत दिलाने में मदद करता है।            
📚 *_गुरु भक्ति योग_* 🪙
     02 जून 2026: गुरु का कर्क राशि में उच्च गोचर: केवल भाग्य नहीं, अन्तर्जागरण का समय
         *_एक बात बिलकुल साफ़ है, यह गोचर कोई साधारण ग्रह परिवर्तन नहीं है। 02 जून 2026 की रात 02 बजकर 25 मिनट पर, देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं। कर्क, चन्द्रमा का घर है, मन और भावनाओं का क्षेत्र। और बृहस्पति हैं ज्ञान, चेतना का विस्तार और धर्म। इन दोनों का मिलन बाहरी उपलब्धियों से अधिक, भीतर की समृद्धि का योग लेकर आता है। इस बार का गोचर इसलिए और भी विशेष है क्योंकि इस पर राहु और मंगल की सीधी दृष्टि पड़ रही है। यह कोई साधारण संयोग नहीं, बल्कि एक गहन परीक्षा और उत्कर्ष का सूचक है। यह दृष्टि आपकी नीयत, आपकी सच्चाई और आपके कर्मों की कसौटी करेगी।
       *_नक्षत्रों की चाल: गोचर की असली गहराई यह गोचर तीन नक्षत्रों में भ्रमण करेगा, जो इसकी ऊर्जा को पूरी तरह बदल देंगे:
       *_पुनर्वसु (02 जून से 18 जून 2026 तक): ‘वापसी और नवीनीकरण’। इसका स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं और देवता अदिति, असीम ब्रह्माण्डीय माता। यह अवधि खोए हुए अवसरों, रिश्तों और आध्यात्मिक पथ पर वापसी का संकेत है।
      *_पुष्य (18 जून से 10 अगस्त 2026 तक): ‘पोषण और विकास’। इसका स्वामी शनि है और देवता बृहस्पति। यह गोचर का सबसे शक्तिशाली समय है। पुरानी मेहनत का फल मिलता है और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है।
       आश्लेषा (10 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक): ‘गहराई और रूपान्तरण’। आश्लेषा नाग देवता का नक्षत्र है, जो गूढ़ विद्या और मनोविज्ञान से जुड़ा है। यह समय छिपी क्षमताओं को जगाने और भीतर की गहराइयों में उतरने का है।
        *_वक्री चाल: एक ज़रूरी सावधानी बृहस्पति इस वर्ष 12 दिसम्बर 2026 से 12 अप्रैल 2027 तक वक्री भी होंगे। इस दौरान नई शुरुआत से अधिक, पुरानी गलतियों को सुधारने और अपनी रणनीति को परिष्कृत करने पर बल देना होगा।
       *_मेष राशि के लिए: आपके लिए गुरु, तुम्हारे चतुर्थ भाव (सुख, माता, वाहन, जड़) में गोचर कर रहे हैं। यह गोचर सीधे तुम्हारे भीतर की जड़ों को सींचने का समय है। क्योंकि यह गुरु की सबसे बलशाली स्थिति है, इसलिए घर में शांति, नई गाड़ी या संपत्ति के योग बन सकते हैं। लेकिन मेष, सावधान रहना। यहाँ से गुरु की पंचम दृष्टि सीधे तुम्हारे अष्टम भाव (रहस्य, उतार-चढ़ाव, अनुसंधान) पर पड़ रही है। इसका मतलब, जो नया काम या संतान सुख का योग बनता दिखेगा, उसमें कोई गुप्त बाधा या गहन शोध की ज़रूरत छिपी होगी। इसे सतही तौर पर मत लेना। यही गुरु अपनी नवम दृष्टि से तुम्हारे बारहवें भाव (विदेश, मोक्ष, व्यय) को भी देख रहे हैं। विदेश यात्रा के ज़बरदस्त योग हैं, लेकिन खर्चों पर लगाम रखना, वरना जेब ढीली हो सकती है। इस गोचर का सबसे बड़ा सबक है, भावनात्मक सुरक्षा को बाहर नहीं, भीतर ढूँढ़ना।
        *_मकर राशि के लिए: आपके लिए गुरु, सप्तम भाव (जीवनसाथी, साझेदारी, जनता) में गोचर कर रहे हैं। यह वैवाहिक जीवन और बिज़नेस पार्टनरशिप के लिए स्वर्णिम समय है। लेकिन मकर, थोड़ा ठहर जाना। यहाँ से गुरु की सप्तम दृष्टि सीधे तुम्हारे लग्न (स्वयं) पर और नवम दृष्टि तुम्हारे तीसरे भाव (साहस, संचार) पर है। इसका अर्थ हुआ, पार्टनर तुम्हारे ऊपर पूरी तरह हावी हो सकता है या तुम्हारे व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल सकता है। यह अच्छा भी है और खतरनाक भी। तीसरे भाव पर दृष्टि से तुम्हारी वाणी और लेखन को अपार बल मिलेगा, लेकिन जल्दबाजी में किए गए वादे और छोटी यात्राएँ भारी पड़ सकती हैं। और सबसे बड़ी बात, राहु और मंगल की दृष्टि का प्रभाव। तुम्हारे लिए यह गोचर ‘अपने को साबित करने’ की जबरदस्त आग लेकर आएगा। रिश्तों में अहंकार की टकराहट से बचना और सामने वाले को सम्मान देना, यही तुम्हारा सबसे बड़ा उपाय है।
*व्यावहारिक उपाय: 💯% प्रैक्टिकल*
      *_पशु सेवा: गुरुवार के दिन किसी गौशाला में जाकर गाय को हरी घास और गुड़ खिलाएँ। यदि सम्भव न हो, तो किसी पशु चिकित्सालय में सहयोग करें या बेज़ुबान पक्षियों के लिए जल का पात्र रखें। यह क्रिया चन्द्रमा और गुरु दोनों को बल देती है।
       *_बीज मन्त्र जाप: गुरु का बीज मन्त्र “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” का जाप किसी पीले पुष्प के सामने बैठकर, उसकी सुन्दरता को निहारते हुए करें।
      *_नाम जाप: यदि मन्त्र जटिल लगे, तो बस “हरि या नारायण” शब्द का मानसिक जाप करें। किसी कार्य को करते हुए, चलते-फिरते, बस भीतर-ही-भीतर “नाम” ध्वनि को महसूस करें।
       *_पेड़-पौधों की सेवा: एक गमले में तुलसी या कोई भी औषधीय पौधा लगाइए और उसके बढ़ने तक स्वयं उसकी देखभाल कीजिए। उस पौधे को अपने परिवार का भाग मानिए।
        *_अन्त में, वही एक गहरी बात: यह गोचर केवल भाग्योदय के लिए नहीं है। यह इस बात की परीक्षा है कि तुम जो माँग रहे हो, उसके योग्य बने हो या नहीं। बृहस्पति कर्क में आकर तुम्हारी मुट्ठी में वह सब कुछ देने को तैयार हैं जो तुमने कभी चाहा था, लेकिन शर्त यह है कि पहले तुम्हारे भीतर का खालीपन भरना होगा। बाहर की हर चीज़ जड़ से हिलेगी, ताकि तुम्हें पता चले कि तुम्हारी असली नींव क्या है। जब गुरु और चन्द्रमा मिलते हैं, तब किस्मत नहीं बदलती, तुम्हारे देखने का नज़रिया बदलता है। और नज़रिया बदलते ही, दुनिया बदल जाती है।
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⚜️ *_प्रजापति व्रत दूज को ही मनाया जाता है तथा किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्मा जी का पूजन आवश्यक करना चाहिए। वैसे तो मूहूर्त चिंतामणि आदि ग्रंथों के अनुसार द्वितीय तिथि अत्यंत शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परंतु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए श्रावण और भद्रपद की द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

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