ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 08 जून 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *आज का पंचाग* 🧾                     
*सोमवार  08 जून 2026_*
*महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।_*
☄️ *_दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*_सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
*_सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*_जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
*_सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – शुद्ध ज्यैष्ठ मास_*
🌓 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – सोमवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 03:23 AM तक उपरांत नवमी_*
📝 *_तिथि स्वामी – अष्टमी  के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र शतभिषा 09:09 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है। इस नक्षत्र के प्रमुख देवता वरुण देव (जल और आकाश के देवता) हैं ।_*
⚜️ *_योग – विष्कुम्भ योग 09:27 AM तक, उसके बाद प्रीति योग_*
⚡ *_प्रथम करण : बालव 03:30 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : कौलव 03:24 AM तक, बाद तैतिल_*
🔥 *_सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक_*
⚜️ *_दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।_*
🤖 *_राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:21:51_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:17:55_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:02 ए एम से 04:42 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:22 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:52 ए एम से 12:48 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:39 पी एम से 03:35 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : संध्या काल 07:16 पी एम से 07:37 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : संध्या काल 07:18 पी एम से 08:18 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : रात्रि काल 01:29 ए एम, जून 09 से 03:07 ए एम, जून 09_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 12:00 ए एम, जून 09 से 12:40 ए एम, जून 09_*
🚓 *_यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 23वाँ दिन, अधिक कालाष्टमी, अधिक मासिक कृष्ण जन्माष्टमी/ पञ्चक जारी/ आडल योग/ कालाष्टमी/ सूर्य का मृगशीर्ष नक्षत्र प्रवेश/ विश्व महासागर दिवस, ऑल इंडिया रेडियो दिवस, विश्व मस्तिष्क ट्यूमर दिवस, राष्ट्रीय मित्र दिवस, राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ मित्र दिवस, थॉमस पेन दिवस, ईट फ्लेक्सिटेरियन दिवस, भारतीय एथलीट एम. पी. जबीर जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर सैयद नज़ीर अली जन्म दिवस, अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया जन्म दिवस, अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी जन्म दिवस, इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मुहम्मद स्मृति दिवस, विश्व मस्तिष्क अर्बुद दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।         
🏘️ *_Vastu tips_* 🏚️
वास्तु की माने तो घर में मौजूद हर दिशा विशेष प्रकार की ऊर्जा को प्रभावित करती है। पूजा कक्ष घर का वह स्थान माना जाता है, जहां की आध्यात्मिक ऊर्जा पूरे घर में फैलती है। सही दिशा में बना मंदिर सुख, शांति और समृद्धि का कारण बन सकता है, जबकि गलत दिशा में बना पूजा स्थल कई तरह की दिक्कतें बढ़ा सकता है। इसलिए मंदिर की दिशा का सही चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
*_पूजा घर के लिए सबसे शुभ दिशा पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में देवी-देवताओं का वास बताया है। सुबह के समय इस दिशा में सूर्य की किरणों और प्राकृतिक ऊर्जाओं का विशेष प्रभाव पड़ता है, जिससे घर में पॉजिटिविटी आती है। वास्तु विशेषज्ञ भी सबसे पहले इसी दिशा में मंदिर स्थापना करने की सलाह देते हैं।
*_ईशान कोण के लाभ ऐसा माना जाता है कि उत्तर-पूर्व दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों का मन शांत रहता है। इसके अलावा सभी का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और आपसी प्रेम बना रहता है। वहीं, परिवार के लोगों में आध्यात्मिक रुचि बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होती है।
*_पूर्व दिशा भी है शुभ अगर घर की संरचना के कारण ईशान कोण में मंदिर बनाना संभव न हो तो पूर्व दिशा भी बेहतर विकल्प माना जाता है। इस दिशा का संबंध सूर्य देव से बताया है, जो नई शुरुआत, उन्नति और सफलता का प्रतीक है। यहां बना पूजा घर व्यक्ति को सकारात्मक सोच देने वाला माना जाता है।        
❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*_अगर आपको उन्नति के मार्ग में आये दिन मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है तो शनिवार के दिन आपको स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनकर एक कच्चे सूत के धागे का गोला लेना चाहिए। इसके बाद पीपल के पेड़ के पास जाना चाहिए और उसके तने पर सात बार वो कच्चा सूत लपेटना चाहिए। फिर दोनों हाथ जोड़कर शनिदेव का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का जप करना चाहिए। मंत्र है-‘ऊँ ऐं श्रीं ह्रीं शनैश्चराय नमः।’ ऐसा करने से आपको अपने उन्नति के मार्ग में आये दिन मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
*_अगर आपके दाम्पत्य जीवन से खुशियां कहीं गायब हो गई हैं तो दाम्पत्य जीवन में फिर से खुशियां भरने के लिये शनिवार के दिन आपको थोड़े-से काले तिल लेने चाहिए और पीपल के पेड़ के पास चढ़ाने चाहिए। साथ ही पीपल की जड़ में पानी चढ़ाना चाहिए और शनिदेव के इस मंत्र का जप करना चाहिए। मन्त्र है- ‘ऊँ श्रीं शं श्रीं शनैश्चराय नमः।’ ये उपाय करने से आपके दाम्पत्य जीवन में फिर से खुशियां भरने लगेगी।          
🍵 *आरोग्य संजीवनी* 🍶
*_अगर आप पित्त दोष का संतुलन बनाकर रखते हैं तो आप कई बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। इसके लिए आपको अपने खान पान को नियंत्रित रखना होगा। आपको अपने खाने में पौष्टिक चीजें जैसे- नारियल पानी, तरबूज, खीरा हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा शामिल करनी चाहिए। पित्त दोष वालों को तेल या ज्यादा मसाले वाली चीजों से परहेज करना चाहिए। जितना ज्यादा हो सके घर में बना हुआ खाना ही खाएं और बाहर के जंक फूड से दूरी बनाए रखें। ऐसे लोगों को खट्टी चीजें खाने से भी बचना चाहिए।
*_पित्त प्रकृति का आयुर्वेदिक इलाज क्या है: पित्त दोष को कंट्रोल करने के लिए खाने के साथ पीने पर भी ध्यान देना जरूरी है। गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं। ज्यादा तेज धूप में बाहर न निकलें। रोजाना योग और प्रणायम करें। इससे तनाव कम होगा और शरीर में दोषों का संतुलन बना रहेगा। आयुर्वेद के अनुसार पित्त को नियंत्रित करने के लिए घी का प्रयोग करना सबसे फायदेमंद है। खाने का समय निश्चित करें और रात में सोने से दो घंटे पहले भोजन कर लें। अपनी जीवनशैली को व्यवस्थित करें। इससे शरीर में पित्त दोष को काफी कंट्रोल किया जा सकता है।         
🌷 *_गुरु भक्ति योग_* 🌹
   सती के अपमान और आत्मदाह के पश्चात भगवान शिव का चारों ओर विनाश शुरु कर देना और दक्ष को दंड देना । लोग तो सिर्फ बोलते हैं कि अगर तुम्हें कुछ हो गया तो पूरी दुनिया मे आग लगा देंगे । भले कोई यह कर न सके पर भगवान शिव ने लगभग कर ही दिया था बस देवों की प्रार्थना पर शांत हुए । लड़कियां भी ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उनके मान सम्मान के लिए दुनिया से भिड़ जाए । शक्तिशाली इतना की कोई हाथ लगाने से पहले कांप उठे । जिसका सब स्ममान करे और डरे भी ।
         *_देवी पार्वती (सती) के न होने पर अन्य किसी स्त्री के न देखना न स्वीकार करना । एक ही पत्नि से दो बार विवाह और देवी के हर रूप मे उनके साथ होना । किसी एक के होकर रहना ।
       *_शिव पुराण के अनुसार देवी पार्वती जन्म से ही श्याम वर्ण (नीलकमल के समान), इसलिए उनको पार्वती के साथ साथ काली का नाम भी दिया गया । भगवान शिव हमेशा से गौर वर्ण (कर्पूर के समान), फिर भी देवी की तपस्या पूर्ण होने के बाद बिना रंग के भेदभाव के विवाह किया । यह प्रमाणित करता हैं कि प्यार रंग रूप, अमीरी गरीबी, सोशल स्टेटस नहीं देखता ।
        *_प्रदोष काल मे देवी के लिए कभी तांडव करना तो कभी रुद्र वीणा बजाकर सुनाना । कभी चौसड़ खेलना तो कभी नंदी पर सवार होकर भ्रमण । देवी पार्वती हमेशा कोई प्रश्न पूछती तो भगवान शिव पहले शांती से सुनते और फिर उत्तर देते या कहानी सुनाते । यह ठीक आज के समय जैसा हैं कि प्रेमी अपनी प्रेमिका या पति अपनी पत्नि के लिए कभी नाचता, गाता, बजाता या घूमने चलता लौंग ड्राईव पर । लड़कियां चाहती हैं कि पहले कोई उन्हें सुने और फिर उसके बाद उत्तर दे या बातों को आगे बढ़ाए, कहानी सुनाए ।
         *_सादगी के आदर्श हैं शिव, कम आहार, साधारण रहन सहन और जीवनशैली बिना दिखावे के । पहनावा बाघ की खाल, निवास कैलाश पर्वत, शिव जी को खुद ज़्यादा खाने पीने की ज़रूरत नहीं पड़ती । तो माता पार्वती को घर की साफ सफाई, कपड़े धोने खाना बनाने का कष्ट नहीं (खाना बने भी तो पुत्रों और गणों के लिए) और सास ससुर, ननद देवर, जेठ जेठानी का कोई झमेला नहीं । आज की लड़कियों को यह सुविधाए मिल जाएं तो क्या ही बात हैं ।
         *_शिव पुरुषत्व के प्रतीक हैं सभी गुणों से परिपूर्ण शक्तिशाली पुरुष कभी स्त्री के पीछे नहीं होता, वह अपने काम मे लगा रहता हैं । उसकी शक्ति, साहस, सम्मान, व्यक्तित्व और रूप को देखकर स्त्री स्वंय ही उसका चयन करती हैं । देवी शक्ति ने भी सती के रूप मे नंदा व्रत करके और पार्वती के रूप मे कठोर तपस्या करके ही भगवान शिव के पाया ।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
*_मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

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