धार्मिक उत्सवों में डीजे की मनमानी, विसर्जन के दौरान तेज आवाज से सहमे बच्चे और बुजुर्ग

ग्रामीणों में आक्रोश, पुलिस ने कराए डीजे बंद
कंपटीशियन के दौरान किए गंदे इशारे
डीजे संचालकों को बुलाया थाने
रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
साईखेड़ा । सिलवानी तहसील के ग्राम साईखेड़ा में गणेश विसर्जन चल समारोह के दौरान डीजे संचालकों की भारी मनमानी देखने को मिली। उत्सव के नाम पर बजाए गए गगनभेदी डीजे की आवाज इतनी तीव्र थी कि पंडालों और सड़कों पर मौजूद श्रद्धालु और आम ग्रामीण हताश और बेबस नजर आए। स्थिति यह थी कि भीड़भाड़ के बीच छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग कानों पर हाथ रखे दिखाई दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि डीजे संचालकों ने कानून और मर्यादा की सारी सीमाएं लांघकर लोगों की भावनाओं और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया है।ग्रामीणों ने बताया कि झांकियों के दौरान डीजे की आवाज को निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक तेज कर दिया गया था। तेज बेस और कान फोड़ू संगीत के कारण आसपास के घरों की खिड़कियां तक हिलने लगी थीं। इसके चलते दिल के मरीजों, बुजुर्गों और नवजात बच्चों को भारी असहजता और घबराहट का सामना करना पड़ा। अनेक लोगों ने डीजे संचालकों से आवाज कम करने की मिन्नतें कीं, लेकिन उनकी मनमानी के आगे किसी की एक न चली। सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) और शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि रिहायशी इलाकों में ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के तहत एक निश्चित डेसिबल से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर या डीजे नहीं बजाए जा सकते। इसके बावजूद साईखेड़ा में इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। ग्रामीणों का कहना है कि डीजे संचालकों की इस तानाशाही ने उत्सव के पवित्र माहौल को पूरी तरह खराब कर दिया। वहीं डीजे के कंपटीशियन के दौरान किए गलत इशारे कर मर्यादाओं को तार तार किया गया।
ग्रामीणों की सूचना थाना प्रभारी संजीत परते मौके पर पहुंचे और डीजे बंद कराए।साईखेड़ा के आक्रोशित नागरिकों ने अब इस मामले में कलेक्टर रायसेन, एसडीएम सिलवानी और स्थानीय पुलिस प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे संचालकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उनके उपकरण जब्त किए जाएं। आगामी त्योहार दुर्गा उत्सव) में बिना ‘साउंड लिमिटर’ और बिना लिखित अनुमति के डीजे बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इन बेकाबू डीजे संचालकों पर लगाम नहीं कसी, तो वे सामूहिक रूप से तहसील कार्यालय का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।



