प्राकृतिक खेती से तीन एकड़ में सालाना 5 से 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे कुंदन कुशवाहा

सिलवानी। विकासखंड सिलवानी के ग्राम सियरमऊ में शुक्रवार को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) एवं आत्मा योजना के अंतर्गत प्रगतिशील कृषक कुंदन कुशवाहा के प्राकृतिक कृषि प्रक्षेत्र एवं बीआरसी सेंटर का भ्रमण किया गया। इस दौरान अधिकारियों एवं आसपास के किसानों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों, जैविक खाद निर्माण और विभिन्न फसलों के उत्पादन की प्रक्रिया का अवलोकन किया।
भ्रमण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमल सोलंकी, कृषि विभाग के उपसंचालक के.पी. भगत, आत्मा परियोजना संचालक रवि आम्रवंशी, आत्मा के बीटीएम रघुवीर सिंह कुशवाहा, जनपद पंचायत सिलवानी के कृषि सभापति विनोद शाह, जनपद सदस्य बंशीलाल सहित कृषक बृजेश शुक्ला, माधव सिंह ठाकुर, कृष्णकुमार, अमित शुक्ला, बलवंत शाह एवं आसपास के अन्य किसान उपस्थित रहे।
प्राकृतिक खेती की तकनीकों का किया अवलोकन
अधिकारियों एवं किसानों ने कुंदन कुशवाहा के प्राकृतिक कृषि प्रक्षेत्र पर जीवामृत, घनजीवामृत, अग्निअस्त्र एवं नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया की जानकारी ली। इसके साथ ही जीवामृत तैयार करने के लिए स्थापित डाइजेस्टर, वर्मी कम्पोस्ट पिट तथा खेत में बोई गई अदरक की फसल और प्याज की नर्सरी का निरीक्षण किया गया।
इस दौरान प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न जैविक उत्पादों और कम लागत में खेती करने की तकनीकों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने प्रक्षेत्र पर अपनाई जा रही कृषि पद्धतियों को देखा तथा किसानों ने भी प्राकृतिक खेती के अनुभव साझा किए।
तीन एकड़ भूमि से लाखों रुपये की आय
प्रगतिशील कृषक कुंदन कुशवाहा ने बताया कि आत्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में उन्हें महाराष्ट्र एवं हरियाणा के कृषि भ्रमण पर भेजा गया था। इस भ्रमण से प्राप्त अनुभवों और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर उन्होंने खेती को लाभकारी स्वरूप दिया। शुरुआत में वे एक एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती करते थे, लेकिन अब लगभग तीन एकड़ भूमि में विभिन्न फसलों एवं कृषि गतिविधियों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं।
कुशवाहा के अनुसार, अदरक की खेती, लहसुन-प्याज की फसलों, बैंगन की पौध तैयार कर बेचने तथा केंचुआ खाद, आम, पपीता और नेपियर घास जैसी गतिविधियों से उन्हें सालाना लगभग पांच से छह लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन में एक एकड़ में अदरक की खेती से लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय तथा लहसुन-प्याज और बैंगन की पौध बेचने से भी अच्छी आमदनी होती है।
किसानों के लिए प्रेरणादायक पहल
प्राकृतिक खेती के इस प्रक्षेत्र का भ्रमण आसपास के किसानों के लिए उपयोगी रहा। इस दौरान किसानों ने प्राकृतिक कृषि पद्धतियों, जैविक खाद निर्माण, फसल विविधीकरण तथा खेती से अतिरिक्त आय अर्जित करने के तरीकों की जानकारी प्राप्त की। कुंदन कुशवाहा का अनुभव यह दर्शाता है कि उचित तकनीक, प्रशिक्षण और मेहनत के माध्यम से कम भूमि में भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।



