एसडीएम सीजी गोस्वामी के बंगले पर हंगामा और झूमाझपटी का आरोप, पत्रकार सहित चार लोगों के खिलाफ थाने में शिकायत

एसडीएम ने थाना प्रभारी को सौंपा शिकायती आवेदन, 50 हजार रुपये मांगने और मारपीट का प्रयास करने के लगाए आरोप
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
तेंदूखेड़ा/दमोह। तेंदूखेड़ा में उस समय हड़कंप मच गया, जब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सीजी गोस्वामी ने पत्रकार अर्पित बड़कुल, उनके भाई अभिषेक बड़कुल, चाचा सुभाष बड़कुल सहित एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ थाना तेंदूखेड़ा में शिकायती आवेदन दिया। आवेदन में एसडीएम ने अपने सरकारी बंगले पर पहुंचकर अभद्रता, झूमाझपटी और जान से मारने का प्रयास करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
एसडीएम द्वारा 6 नवंबर 2026 को थाना प्रभारी तेंदूखेड़ा के नाम दिए गए आवेदन के अनुसार, घटना सुबह की बताई गई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि सुबह करीब 7:37 बजे पत्रकार अर्पित बड़कुल का फोन आया। इसके बाद सुबह 7:49 बजे दोबारा फोन आया और 8:07 बजे उनसे संपर्क हुआ। एसडीएम के अनुसार, अर्पित बड़कुल ने उनसे मिलने की बात कही, जिस पर उन्होंने अपने बंगले पर बुलाया।
50 हजार रुपये मांगने का लगाया आरोप
शिकायती आवेदन में एसडीएम ने आरोप लगाया है कि बातचीत के दौरान अर्पित बड़कुल ने स्वयं को अधिमान्य पत्रकार बताते हुए अन्य पत्रकारों को फर्जी पत्रकार कहा। साथ ही उनसे 50 हजार रुपये देने की बात कही। एसडीएम के अनुसार, उन्होंने रुपये देने से इनकार कर दिया।
आवेदन में आगे बताया गया है कि कुछ देर बाद बंगले के बाहर से तीन लोग मुंह बांधकर पहुंचे और अर्पित बड़कुल के साथ मिलकर उनके साथ झूमाझपटी करने लगे। एसडीएम ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ मारपीट करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
चालक और अन्य कर्मचारियों के पहुंचने पर मामला शांत
एसडीएम ने अपने आवेदन में बताया कि घटना के दौरान उन्होंने आवाज लगाई, जिसके बाद उनके ड्राइवर सतेंद्र लोधी और यशवंत चौधरी सहित अन्य लोग मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद स्थिति नियंत्रित हुई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना के दौरान जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई।
पुलिस से कार्रवाई की मांग
एसडीएम सीजी गोस्वामी ने थाना प्रभारी को दिए आवेदन में अर्पित बड़कुल, अभिषेक बड़कुल, सुभाष बड़कुल एवं एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और पत्रकारिता जगत में चर्चा का विषय बन गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच और संबंधित पक्षों का बयान सामने आने के बाद ही घटना की पूरी वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने अथवा जांच की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।



