ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 17 अक्टूबर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 17 अक्टूबर 2023

17 अक्टूबर 2023 दिन मंगलवार को ही अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। आज अश्विन मास के शारदीय नवरात्र तृतीय दिवस है। आज माता चंद्रघंटा देवी के दर्शन एवं पूजन का बहुत पुण्य होता है। आज माता चंद्रघंटा देवी को दर्पण एवं सिंदूर चढ़ाने से माता की विशिष्ट कृपा एवं प्रशन्नता प्राप्त होती है। आप सभी सनातनियों को “शारदीय नवरात्र के तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा देवी के उपासना” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : आश्विन शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 01:26 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि के स्वामी :- तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र विशाखा 08:31 PM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी : विशाखा नक्षत्र का स्वामी गुरू है। तथा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं।
🔕 योग : प्रीति योग 09:21 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
प्रथम करण : तैतिल – 01:23 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 01:26 ए एम, अक्टूबर 18 तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:16:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:44:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:42 ए एम से 05:33 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:08 ए एम से 06:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:29 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:47 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:50 पी एम से 06:15 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:50 पी एम से 07:05 पी एम
💧 अमृत काल : 11:23 ए एम से 01:02 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 18
❄️ रवि योग : 08:31 पी एम से 06:23 ए एम, अक्टूबर 18
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : रवियोग/ मुस्लिम रबि – उल – आखिर मासारंभ, मुगल शासक अकबर स्मृति दिवस, प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री स्मिता पाटिल जन्मोत्सव, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जन्म दिवस, विश्व आघात (ट्रॉमा) दिवस, राष्ट्रीय मुलिगन दिवस, राष्ट्रीय पास्ता दिवस, गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, किसी पूर्व को क्षमा करने का दिन, राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक एवं चतुर्थी को मूली का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य माना गया है। चतुर्थी को मूली एवं तिल का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला और आरोग्यकारी तिथि मानी जाती है। इसकी स्वामी माता गौरी और कुबेर देवता हैं, जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए घर में स्वागत कक्ष की सजावट के बारे में। घर में स्वागत कक्ष, यानी कि ड्राइंग रूम की सजावट का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। जब भी घर में कोई मेहमान आता है, तो सबसे पहले उसे घर के इसी हिस्से में बिठाया जाता है। ऐसे में वास्तु शास्त्र के अनुसार ड्राइंग रूम में रखी चीजों की दिशा का खास ख्याल रखना चाहिए, जिससे घर का माहौल अच्छा बना रहे और आपकी दूर-दूर तक ख्याति फैले।
तो सबसे पहले ड्राइंग रूम में सोफे की दिशा कहां होनी चाहिए, इस पर चर्चा करेंगे। ड्राइंग रूम में दक्षिण-पश्चिम दिशा की दीवार के साथ लगाकर सोफे रखने चाहिए। वहीं टेबल को सोफे से थोड़ी दूरी पर या ड्राइंग रूम के बिल्कुल सेंटर में रख सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे टेबल के किनारे नुकीले या त्रिकोणाकार नहीं होने चाहिए।
⏹️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
विवादों और झंझटों से बचने के लिए व्यक्ति से बात न करें। कोशिश करें कि दिन के अंत तक बिलकुल भी बात न करें। क्योंकि आपके दिमाग में दिनभर ये बातें चल सकती हैं और आप कभी भी बात करने पर अपना रिएक्शन दे सकते हैं। तो, दूरी बनाएं और चुप्पी साध लें। ये आपके लिए बेहतर तरीके से काम करेंगे।
अब अगर बात करना जरूरी है तो अगले दिन खुद सामने से जाकर ठंडे दिमाग से बात करें। ऐसा करना आपको और उनको बेहतर बातचीत और समझौता का मौका देगा। पर ध्यान रखें कि तुरंत कुछ न बोलें या करें। ऐसे में आप खुद भी गलती कर सकते हैं, शायद जिसका आपको बाद में पछतावा हो। इसके अलावा तुरंत रिएक्शन देना चीजों को और खराब कर सकता है। तो, गुस्से में इन बातों का ध्यान रखें और मानसिक शांति के लिए जितना हो सके विवादों से बचें।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
अजवाइन और काला नमक एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। ये दोनों ही सूजन को कम कर सकते हैं और दर्द में कमी ला सकते हैं। ऐसे में जब आपका यूरिक एसिड बढ़ा होता है और हड्डियों में सूजन आ रही होती है तो इन दोनों का खाली पेट सेवन सूजन को कम करने में मददगार हो सकता है। इससे गर्माहट पैदा होती है और फिर सूजन में कमी आती है।
अजवाइन और काला नमक पथरियों को फ्लश ऑउट करने में मददगार है। ये दोनों डिटॉक्सीफाई एजेंट के रूप में भी काम करते हैं। तो, ये प्यूरिन की पथरियों से चिपककर इन्हें शरीर से फ्लश ऑउट करने में मदद करते हैं। रेगुलर कुछ दिनों तक इनका सेवन हड्डियों में जमा पथरियों को कम करने में मददगार है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
माता दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघंटा देवी है । नवरात्रि की उपासना में चन्द्रघंटा माता की तीसरे दिन पूजा होती है क्योंकि आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार तीसरे दिन का बहुत ही महत्व है । सन्तों से सुना है, कि आज माता चन्द्रघंटा की पूजा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन एवं दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं ।
माँ चन्द्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं । इनकी आराधना सदैव फलदायी होती है तथा माता अपने भक्तों के सभी कष्टों का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं । माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण है । इनको भक्तों के स्वर में दिव्य एवं अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है ।
माता की कृपा से इनके भक्त जहाँ भी जाते हैं अन्य लोगों को शान्ति और सुख का अनुभव करते हैं । माँ का यह स्वरूप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है । इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचन्द्र है इसलिए इन्हें चन्द्रघंटा देवी कहा जाता है । इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमक वाला बताया गया है ।
इनके दस हाथ हैं तथा दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित रहते हैं । इनका वाहन शेर है तथा सदैव युद्ध के लिए उद्यत रहने की मुद्रा में इनको दर्शाया गया है । फिर भी माता का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शान्ति से सदैव परिपूर्ण रहता है । इनकी आराधना से भक्तों को वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता भी आती है ।
माता अपने भक्तों का सर्वतोमुखी विकास, शरीर एवं शरीर के सम्पूर्ण अंगों में दिब्य कांति एवं अनेक गुणों की वृद्धि करती देती हैं । चन्द्रघंटा अर्थात चाँद की तरह चमकने और सदैव प्रकाशित रहने वाली देवी । नवरात्री के तीसरे दिन माता की विग्रह रूप में पूजा की जाती है । इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा के बाद ध्यान एवं साधना करना चाहिये ।
ऐसा करने वाले भक्तों अथवा साधकों को अलग-अलग तरह की ध्वनियाँ सुनाई देती है । परन्तु इससे सच्चे साधक को डरना नहीं चाहिए । पूजा के समय निरंतर माता के श्री विग्रह का ध्यान में दर्शन करते रहना चाहिए । माता चन्द्रघंटा की पूजा और साधना करने से भक्तों को इस लोक में नहीं बल्कि परलोक में भी मोक्ष की प्राप्ति होती है ।
माता चन्द्रघंटा अपने गले में सफेद रंग के फूलों की माला पहनती है । हमे माता चन्द्रघंटा की पूजा उपासना में तन, मन, वचन से शुद्ध और पवित्र आचरण करना चाहिये इतना ही नहीं ब्रह्मचर्य व्रत का भी पालन करना चहिये । पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करनी चाहिए ।
अगर आप आज के इस लेख को पूरा पढने के बाद अगर दुर्गा सप्तशती के तीसरे अध्याय को भी पढ सकें साथ ही माँ भगवती के 108 नाम और दुर्गा चालीसा भी अवश्य पढ़ें । इसके बाद में माता की आरती करें उसके बाद सूर्य को सूर्यार्घ्य देकर परिवार के सभी लोगों को तथा अन्य जनों में भी प्रसाद वितरीत करें ।
माता भगवती की तीसरी शक्ति माता चन्द्रघंटा की पूजा दूध से की जाती है । 3 वर्ष की कन्या को “त्रिमूर्ति” कहते हैं आज माता चन्द्रघंटा के स्वरुप में इनकी पूजा से घर में सुख समृद्धि आती है । अगर हो सके तो इस छोटी बच्ची को दूध का दान करें । माता की पूजा उपासना करने से सभी मनुष्य संसार में मिलने वाले सभी कष्टों-कलेशों से मुक्त हो जाता है ।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

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